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करोड़ों का भवन, मगर ताला खोलने वाला कोई नहीं
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
Updated Sun, 30 Jul 2017 10:25 PM IST
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चंपावत का सर्किट हाउस।
- फोटो : अमर उजाला
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लंबे इंतजार के बाद दो सीमांत जिले पिथौरागढ़ और चंपावत का पहला सर्किट हाउस तीन साल पूर्व अस्तित्व में आया। मगर कई करोड़ की लागत से बने इस भवन का कोई खैरख्वाह नहीं है। अति महत्वपूर्ण मेहमानों के इस विश्रामगृह का ताला खोलने वाला भी कोई नहीं। तीन साल बाद भी इसके संचालन के लिए एक पद सृजित नहीं हो सका।
मार्च 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सर्किट हाउस का लोकार्पण किया। सर्किट हाउस में 2 वीवीआईपी, 3 वीआईपी और 2 जनरल गेस्ट हाउस बनाए गए हैं। 249.40 लाख की लागत के अलावा इसे 35 लाख रुपये से साज सज्जा भी किया गया है। प्रदेश के कई मंत्री सहित 15 से अधिक विशिष्ट मेहमान यहां आ चुके हैं। मगर अति विशिष्ट अतिथियों के लिए बने इस खूबसूरत भवन के संचालन के लिए तीन वर्ष बाद भी एक भी कर्मी विभाग के पास नहीं है।
सर्किट हाउस की व्यवस्था के लिए व्यवस्था अधिकारी सहित कुल 13 कार्मिकों की जरूरत है। पर इसमें तैनाती तो दूर, किसी भी पद का सृजन नहीं हुआ है। ऐसे में अति महत्वपूर्ण राजकीय अतिथियों के लिए बने इस सर्किट हाउस का संचालन बेहद कठिन हो रहा है।
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निर्माण में भी 150 लाख की लागत
2002 में स्वीकृत चंपावत के सर्किट हाउस के भवन का मूल इस्टीमेट 99.40 रुपये लाख था। भूमि चयन में चार साल लगने और फिर धन मिलने में हुई देरी ने इसके काम को बीच-बीच में लटकाए रखा। 2010 में 150 लाख रिलीज होने के बाद काम शुरू हो सका। नतीजा यह हुआ कि 99.40 लाख के मूल आगणन के स्थान पर फर्नीचर सहित इसकी लागत बढ़कर 249.40 लाख पहुंच गई। देरी ने न केवल अधिक वक्त लिया बल्कि 150 लाख रुपये की चपत भी लगाई।
क्रासर
राज्य संपत्ति विभाग के इस भवन के लिए अभी एक भी पद सृजित नहीं हुआ है। सर्किट हाउस को लोनिवि की गैंग के दो-तीन बेलदारों के जरिए किसी तरह संचालित किया जा रहा है। स्टाफ नहीं होने से देखरेख और संचालन बेहद कठिन हो रहा है। यहां तक कि भवन की सफाई कराना भी चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
डीडी भट्ट, अधिशासी अभियंता, लोनिवि, चंपावत डिवीजन।
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मार्च 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सर्किट हाउस का लोकार्पण किया। सर्किट हाउस में 2 वीवीआईपी, 3 वीआईपी और 2 जनरल गेस्ट हाउस बनाए गए हैं। 249.40 लाख की लागत के अलावा इसे 35 लाख रुपये से साज सज्जा भी किया गया है। प्रदेश के कई मंत्री सहित 15 से अधिक विशिष्ट मेहमान यहां आ चुके हैं। मगर अति विशिष्ट अतिथियों के लिए बने इस खूबसूरत भवन के संचालन के लिए तीन वर्ष बाद भी एक भी कर्मी विभाग के पास नहीं है।
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सर्किट हाउस की व्यवस्था के लिए व्यवस्था अधिकारी सहित कुल 13 कार्मिकों की जरूरत है। पर इसमें तैनाती तो दूर, किसी भी पद का सृजन नहीं हुआ है। ऐसे में अति महत्वपूर्ण राजकीय अतिथियों के लिए बने इस सर्किट हाउस का संचालन बेहद कठिन हो रहा है।
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निर्माण में भी 150 लाख की लागत
2002 में स्वीकृत चंपावत के सर्किट हाउस के भवन का मूल इस्टीमेट 99.40 रुपये लाख था। भूमि चयन में चार साल लगने और फिर धन मिलने में हुई देरी ने इसके काम को बीच-बीच में लटकाए रखा। 2010 में 150 लाख रिलीज होने के बाद काम शुरू हो सका। नतीजा यह हुआ कि 99.40 लाख के मूल आगणन के स्थान पर फर्नीचर सहित इसकी लागत बढ़कर 249.40 लाख पहुंच गई। देरी ने न केवल अधिक वक्त लिया बल्कि 150 लाख रुपये की चपत भी लगाई।
क्रासर
राज्य संपत्ति विभाग के इस भवन के लिए अभी एक भी पद सृजित नहीं हुआ है। सर्किट हाउस को लोनिवि की गैंग के दो-तीन बेलदारों के जरिए किसी तरह संचालित किया जा रहा है। स्टाफ नहीं होने से देखरेख और संचालन बेहद कठिन हो रहा है। यहां तक कि भवन की सफाई कराना भी चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
डीडी भट्ट, अधिशासी अभियंता, लोनिवि, चंपावत डिवीजन।