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सात वर्ष पूर्व बनबसा आए थे दिवंगत क्रिकेटर चेतन चौहान
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बनबसा स्थित शारदा बैराज चौकी पर 13 अप्रैल 2013 को अमर उजाला द्वारा लिया गया फोटो। फाइल फोटो
- फोटो : TANAKPUR
बनबसा (चंपावत)। प्रख्यात क्रिकेटर एवं राजनीति के माहिर खिलाड़ी रहे दिवंगत चेतन चौहान सात वर्ष पहले बनबसा आए थे। यहां से होकर वह नेपाल के कंचनपुर जिला मुख्यालय महेंद्रनगर रवाना हुए थे। नेपाल में संस्कृति दौड़ के चौहान मुख्य अतिथि थे। तब वह आरएसएस खेल प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दिल्ली क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष भी थे। अमर उजाला से उन्होंने कहा था कि खेलों के माध्यम से हिंदी, हिंदुत्व, संस्कृति और संस्कार का प्रचार-प्रसार किया जा सकता है।
बनबसा से नेपाल सीमा तक वाहन में बैठे चौहान ने 13 अप्रैल 2013 को अमर उजाला से कहा था कि समय की कमी के चलते तुरंत परिणाम देने वाले वन डे एवं टी-20 मैच लोगों में भले ही प्रचलित हो रहे हैं, लेकिन असली क्रिकेट तो टेस्ट क्रिकेट ही है, जिस पर आंच नहीं आ सकती। टेस्ट में ही क्रिकेट के खेल की असली भावना छिपी है, जिसमें खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। वन डे और टी-20 क्रिकेट को उन्होंने इंस्टेट कॉफी की तरह बताया था। निष्ठा, ईमानदारी, अनुशासन की भावना रखने वाले खिलाड़ी राजनीतिक जीवन में भी उसी अंदाज में कार्य करते हैं। देश के लिए खेलने वाले खिलाड़ियों की तरह राजनेता को भी देश के लिए ही सोचना चाहिए।
पूर्व क्रिकेटर का खास लोगों ने किया था स्वागत
बनबसा (चंपावत)। बनबसा में 13 अप्रैल 2013 को पहुंचे क्रिकेटर चेतन चौहान का पेट्रोल पंप पर चंद खास लोगों ने स्वागत किया था। इनमें बीएड कॉलेज के निदेशक कैलाश थपलियाल, लायंस क्लब अध्यक्ष राजेंद्र पाल सिंह, ग्लोबल विजन संस्था के उत्तम चंद, रिटायर्ड मेजर गणेश चंद, डॉ. जनक चंद, सुभाष थपलियाल आदि थे। बनबसा जैसी छोटी जगह पर बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) की शाखा देख रोमांचित हो उठे थे। बताया कि वह राजनीति में आने से पहले बीओबी में (जनसंपर्क विभाग) अधिकारी थे। संवाद
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बनबसा से नेपाल सीमा तक वाहन में बैठे चौहान ने 13 अप्रैल 2013 को अमर उजाला से कहा था कि समय की कमी के चलते तुरंत परिणाम देने वाले वन डे एवं टी-20 मैच लोगों में भले ही प्रचलित हो रहे हैं, लेकिन असली क्रिकेट तो टेस्ट क्रिकेट ही है, जिस पर आंच नहीं आ सकती। टेस्ट में ही क्रिकेट के खेल की असली भावना छिपी है, जिसमें खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। वन डे और टी-20 क्रिकेट को उन्होंने इंस्टेट कॉफी की तरह बताया था। निष्ठा, ईमानदारी, अनुशासन की भावना रखने वाले खिलाड़ी राजनीतिक जीवन में भी उसी अंदाज में कार्य करते हैं। देश के लिए खेलने वाले खिलाड़ियों की तरह राजनेता को भी देश के लिए ही सोचना चाहिए।
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पूर्व क्रिकेटर का खास लोगों ने किया था स्वागत
बनबसा (चंपावत)। बनबसा में 13 अप्रैल 2013 को पहुंचे क्रिकेटर चेतन चौहान का पेट्रोल पंप पर चंद खास लोगों ने स्वागत किया था। इनमें बीएड कॉलेज के निदेशक कैलाश थपलियाल, लायंस क्लब अध्यक्ष राजेंद्र पाल सिंह, ग्लोबल विजन संस्था के उत्तम चंद, रिटायर्ड मेजर गणेश चंद, डॉ. जनक चंद, सुभाष थपलियाल आदि थे। बनबसा जैसी छोटी जगह पर बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) की शाखा देख रोमांचित हो उठे थे। बताया कि वह राजनीति में आने से पहले बीओबी में (जनसंपर्क विभाग) अधिकारी थे। संवाद
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