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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Communications sector was not marginal

सीमांत क्षेत्र को नहीं मिल सकी संचार सुविधा

Wed, 08 Feb 2017 10:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत Updated Wed, 08 Feb 2017 10:31 PM IST
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अलग उत्तराखंड राज्य बनने के 16 साल बाद भी चंपावत जिले के सीमांत तल्लादेश क्षेत्र में भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) की मोबाइल फोन सुविधा उपलब्ध नहीं होने से नागरिकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विधानसभा चुनाव में सीमांत क्षेत्र में संचार सुविधा की बदहाली प्रमुख चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है।
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मोबाइल फोन सुविधा नहीं होने के कारण सीमांत क्षेत्र का शेष दुनिया से संपर्क कटा रहता है। भारतीय मोबाइल कंपनियों की ओर से लगाए गए मोबाइल टावरों में सीमा सुरक्षा के चलते सिग्नल बेहद कम रखे गए हैं, लेकिन इन सिग्नलों का लाभ भारतीय क्षेत्र के गांवों की अपेक्षा पड़ोसी देश नेपाल के लोग उठा रहे हैं। सीमांत क्षेत्र में मोबाइल सुविधा नहीं होने के कारण एसएसबी सहित सीमा सुरक्षा के कार्य में लगे विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के जवानों और अधिकारियों को भी दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है।
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सीमांत क्षेत्र के ग्रामीणों की मांग पर बीएसएनएल की ओर से कम सिग्नल क्षमता के मोबाइल टावर लगाने को सर्वे तो कई बार किया जा चुका है। लेकिन टावर लगाने की कार्रवाई अब तक अमलीजामा नहीं पहन सकी है। विपिन चंद्र, राजेंद्र सिंह, होरी लाल आदि ग्रामीणों का कहना है कि बेवजह सुरक्षा के नाम पर सीमांत क्षेत्र के लोगों को संचार सुविधा से वंचित रखा जा रहा है। जबकि पड़ोसी देश नेपाल में तो भारतीय मोबाइल कंपनियों के सिग्नल काम कर रहे हैं। वह कहते हैं कि बीएसएनएल के अतिरिक्त अन्य कंपनियों के मोबाइल टावर लगाने के लिए भी कड़े मानक बनाए गए हैं। जिसके चलते सीमांत क्षेत्र में मोबाइल फोन सुविधा का विस्तार नहीं हो पा रहा है।
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ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान समय में मोबाइल फोन भी अन्य बुनियादी जरूरतों की तरह आवश्यक हो गया है। ई मेल और इंटरनेट के युग में चंपावत जिले के सीमांत गांवों को अब तक मोबाइल फोन सुविधा का लाभ नहीं मिल सका है। ग्रामीणों को अब राज्य में बनने वाली नई सरकार से उम्मीद है कि सीमांत क्षेत्रों में मोबाइल फोन सेवा के विस्तार को तवज्जो दी जाएगी।
 
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