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खेल नहीं, टेनिस कोर्ट में चल रही पढ़ाई
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बनबसा जीजीआईसी में बने टेनिस कोर्ट जिसमें कक्षा कक्षों की कमी के चलते चल रही हैं कक्षाएं।
- फोटो : TANAKPUR
कमरों की कमी से जूझ रहे बनबसा जीजीआईसी में लॉन टेनिस कोर्ट में कक्षाएं चल रही है। कॉलेज में कमरों की कमी है। महज दो कमरों में हाईस्कूल व इंटर की चार कक्षाएं चल रही हैं। पर यहां एक ऐसा कोर्ट बना दिया गया, जिसका कभी उपयोग नहीं हुआ। लॉन टेनिस को सिखाने के लिए न कोई प्रशिक्षक है और नहीं इस खेल को जानने वाली छात्राएं। मामले के प्रकाश में आने पर अब जिला प्रशासन ने जांच की बात कही है।
90 छात्राओं वाले बनबसा जीजीआईसी में कुल चार कमरे हैं। इनमें दो कमरे कार्यालय और दो कमरों में कक्षाएं चलती हैं। मगर इस स्कूल में सीमावर्ती क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) से 2017-18 में 12 लाख रुपये का 78 फीट लंबा और 27 फीट चौड़ा लॉन टेनिस कोर्ट बना दिया गया।
कार्यदायी संस्था ग्रामीण निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता केके जोशी ने बताया कि 2019 के शुरू में इस कोर्ट को पूरा कर स्कूल को हस्तांतरित कर दिया गया। लेकिन इस टेनिस कोर्ट में आज तक कभी भी टेनिस नहीं खेला गया। अब उसमें न तो नैट है और नहीं स्टेंड है। छात्राओं का कहना है कि खेलना तो दूर, लॉन टेनिस की उन्हें बिल्कुल भी जानकारी नहीं है।
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प्रधानाचार्या गीता चंद का कहना है कि इस कोर्ट के लिए कॉलेज की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं गया था और न ही कॉलेज में इस खेल को सिखाने की कोई शिक्षिका है। अभिभावक संघ के पूर्व अध्यक्ष गोपाल राम का कहना है कि टेनिस कोर्ट की अभिभावकों या प्रबंधन समिति की ओर से मांग तक नहीं की गई।
कॉलेज की ओर से कभी भी टेनिस कोर्ट की मांग ही नहीं की गई थी। कॉलेज की जरूरत तो अतिरिक्त कमरों की थी। ताकि छात्राओं की पढ़ाई के लिए पर्याप्त जगह हो सकी है। इस मामले को अब डीएम के सम्मुख उठाया जाएगा। पुष्कर दत्त कापड़ी, सदस्य, जिला पंचायत, बनबसा।
जीजीआईसी में टेनिस कोर्ट के निर्माण के औचित्य की जांच की जाएगी। आखिर बीएडीपी में इस गैर जरूरी कोर्ट को कैसे मंजूरी मिली। जबकि चंपावत जिले में न तो खेल विभाग के पास और नहीं शिक्षा विभाग के पास लॉन टेनिस का कोई प्रशिक्षक है। टेनिस का रैकेट और बॉल भी बेहद महंगी आती है। सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम, चंपावत।
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90 छात्राओं वाले बनबसा जीजीआईसी में कुल चार कमरे हैं। इनमें दो कमरे कार्यालय और दो कमरों में कक्षाएं चलती हैं। मगर इस स्कूल में सीमावर्ती क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) से 2017-18 में 12 लाख रुपये का 78 फीट लंबा और 27 फीट चौड़ा लॉन टेनिस कोर्ट बना दिया गया।
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कार्यदायी संस्था ग्रामीण निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता केके जोशी ने बताया कि 2019 के शुरू में इस कोर्ट को पूरा कर स्कूल को हस्तांतरित कर दिया गया। लेकिन इस टेनिस कोर्ट में आज तक कभी भी टेनिस नहीं खेला गया। अब उसमें न तो नैट है और नहीं स्टेंड है। छात्राओं का कहना है कि खेलना तो दूर, लॉन टेनिस की उन्हें बिल्कुल भी जानकारी नहीं है।
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प्रधानाचार्या गीता चंद का कहना है कि इस कोर्ट के लिए कॉलेज की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं गया था और न ही कॉलेज में इस खेल को सिखाने की कोई शिक्षिका है। अभिभावक संघ के पूर्व अध्यक्ष गोपाल राम का कहना है कि टेनिस कोर्ट की अभिभावकों या प्रबंधन समिति की ओर से मांग तक नहीं की गई।
कॉलेज की ओर से कभी भी टेनिस कोर्ट की मांग ही नहीं की गई थी। कॉलेज की जरूरत तो अतिरिक्त कमरों की थी। ताकि छात्राओं की पढ़ाई के लिए पर्याप्त जगह हो सकी है। इस मामले को अब डीएम के सम्मुख उठाया जाएगा। पुष्कर दत्त कापड़ी, सदस्य, जिला पंचायत, बनबसा।
जीजीआईसी में टेनिस कोर्ट के निर्माण के औचित्य की जांच की जाएगी। आखिर बीएडीपी में इस गैर जरूरी कोर्ट को कैसे मंजूरी मिली। जबकि चंपावत जिले में न तो खेल विभाग के पास और नहीं शिक्षा विभाग के पास लॉन टेनिस का कोई प्रशिक्षक है। टेनिस का रैकेट और बॉल भी बेहद महंगी आती है। सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम, चंपावत।