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प्रधानाचार्य के पद भी नहीं भर पा रहा विभाग
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पाटी आदर्श जीआईसी भवन।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत जिले के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था बुरे हाल में हैं। शिक्षकों की भारी कमी के चलते पाटी, चंपावत, टनकपुर सहित कई ऐसे स्कूल हैं, जहां अभिभावक कोष के जरिये अध्यापकों की कामचलाऊ तैनाती की गई है। सबसे खास बात यह है कि जिले के 44 राजकीय हाईस्कूल में से 26 और 61 राजकीय इंटर कॉलेजों में से 34 में प्रधानाचार्य के पद तक खाली हैं।
चंपावत जिले में हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों की कुल संख्या 105 है। जिनमें 10254 छात्राओं सहित कुल 18702 छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। लेकिन इनमें से एक भी स्कूल में सृजित पद के सापेक्ष शिक्षकों की तैनाती नहीं है। 3138 सृजित शिक्षकों के पदों में से 2371 शिक्षक हैं। प्रवक्ताओं के 537 सृजित पदों में से 246 रिक्त हैं।
आदर्श जीजीआईसी टनकपुर तक में छात्राएं अभिभावक कोष में शुल्क देकर ठेके पर रखी कुछ शिक्षिकाओं के माध्यम से पढ़ाई करने को मजबूर हैं। ऐसे ही हाल चंपावत और कई अन्य स्कूलों में भी है। 11 कॉलेजों को छोड़ कहीं भी कायदे की प्रयोगशाला नहीं है। जहां प्रयोगशाला हैं, उनमें इक्का-दुक्का लैब तकनीशियन के जरिये काम चल रहा है।
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जूनियर हाईस्कूल में भी कम हैं 41 शिक्षक
चंपावत। माध्यमिक शिक्षा ही नहीं, जूनियर हाईस्कूल की व्यवस्था भी बे-पटरी है। चंपावत जिले में इस वक्त कुल 92 जूनियर हाईस्कूल हैं। जिनमें 1759 बालिकाएं और 1472 छात्र पढ़ रहे हैं। मगर इन छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए भी पर्याप्त शिक्षक नहीं है। जिले में कुल सृजित 342 पदों के सापेक्ष महज 301 शिक्षक ही तैनात हैं।
शिक्षकों की भारी कमी से शिक्षण कार्य पर असर पड़ रहा है। रिक्त पदों पर तैनाती के लिए निदेशालय स्तर से नियमित रूप से पत्राचार किया जा रहा है। कुल स्कूलों में अभिभावक कोष के जरिये रखे गए शिक्षकों से व्यवस्था को सुधारा जा रहा है। वहीं प्रयोगशालाओं की स्थिति को ठीक करने के लिए प्रयास चल रहे हैं। आरसी पुरोहित, मुख्य शिक्षाधिकारी
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चंपावत जिले में हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों की कुल संख्या 105 है। जिनमें 10254 छात्राओं सहित कुल 18702 छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। लेकिन इनमें से एक भी स्कूल में सृजित पद के सापेक्ष शिक्षकों की तैनाती नहीं है। 3138 सृजित शिक्षकों के पदों में से 2371 शिक्षक हैं। प्रवक्ताओं के 537 सृजित पदों में से 246 रिक्त हैं।
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आदर्श जीजीआईसी टनकपुर तक में छात्राएं अभिभावक कोष में शुल्क देकर ठेके पर रखी कुछ शिक्षिकाओं के माध्यम से पढ़ाई करने को मजबूर हैं। ऐसे ही हाल चंपावत और कई अन्य स्कूलों में भी है। 11 कॉलेजों को छोड़ कहीं भी कायदे की प्रयोगशाला नहीं है। जहां प्रयोगशाला हैं, उनमें इक्का-दुक्का लैब तकनीशियन के जरिये काम चल रहा है।
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जूनियर हाईस्कूल में भी कम हैं 41 शिक्षक
चंपावत। माध्यमिक शिक्षा ही नहीं, जूनियर हाईस्कूल की व्यवस्था भी बे-पटरी है। चंपावत जिले में इस वक्त कुल 92 जूनियर हाईस्कूल हैं। जिनमें 1759 बालिकाएं और 1472 छात्र पढ़ रहे हैं। मगर इन छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए भी पर्याप्त शिक्षक नहीं है। जिले में कुल सृजित 342 पदों के सापेक्ष महज 301 शिक्षक ही तैनात हैं।
शिक्षकों की भारी कमी से शिक्षण कार्य पर असर पड़ रहा है। रिक्त पदों पर तैनाती के लिए निदेशालय स्तर से नियमित रूप से पत्राचार किया जा रहा है। कुल स्कूलों में अभिभावक कोष के जरिये रखे गए शिक्षकों से व्यवस्था को सुधारा जा रहा है। वहीं प्रयोगशालाओं की स्थिति को ठीक करने के लिए प्रयास चल रहे हैं। आरसी पुरोहित, मुख्य शिक्षाधिकारी