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ईसाईयों का पवित्र स्थल है फुलवाड़ी चर्च
योगेश जोशी /अमर उजाला, चंपावत
Updated Thu, 24 Dec 2015 10:35 PM IST
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फुलवाड़ी गांव मैथोडिस्ट चर्च की नींव अंग्रेज महिला मिस एनी न्यूटन बटन ने रखी थी। 1931 में हुई स्थापना के बाद से आज भी यह चर्च ईसाईयों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। मिस बटन की सेवा से प्रेरित होकर उस वक्त बड़ी संख्या में लोगों ने ईसाई धर्म अपनाया था। लकड़ी से बने इस चर्च में शानदार नक्काशी भी की गई है।
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चर्च के पास्टर सुरेंद्र सिंह बताते है कि ईसाईयों के आस्था के इस केंद्र में क्रिसमस और उसकी पूर्व संध्या पर कई कार्यक्रम होते हैं। क्रिसमस से पूर्व देर रात तक धूमधाम से प्रभु यीशु का जन्मदिन मनाने के साथ विशेष प्रार्थना होती है। 25 दिसंबर को ईसाईयों के साथ ही अन्य धर्मों के लोग भी क्रिसमस के दिन चर्च पहुंचते हैं। बताया कि क्रिसमस पर प्रार्थना के अलावा कई खास कार्यक्रम होंगे। चर्च को विशेष रूप से सजाया गया है। मैथोडिस्ट ईसाई टीचिंग, हीलिंग और प्रीचिंग (शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रार्थना) को विशेष तवज्जो देते हैं।
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चार पीढ़ियों से मान रहे ईसाई धर्म को
पास्टर सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि उनकी चार पीढ़ियां ईसाई धर्म को मानती रही हैं। उनके परदादा हर सिंह और दादा जीत सिंह ने जीवनभर ईसाई धर्म का ही पालन किया। फुलवाड़ी, छीड़ापानी और लोहाघाट के ईसाईयों के कुल मिलाकर 23 परिवार हैं। करीब 150 की आबादी वाला यह समाज क्रिसमस की तैयारियों में जुटा है।
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आकर्षण का केंद्र बने क्रिसमस ट्री
क्रिसमस पर्व को लेकर ईसाईयों में खासा उत्साह है। चर्च के अलावा लोगों ने अपने घरों को भी बिजली की मालाओं से सजाया है। जगह-जगह क्रिसमस ट्री बनाए गए हैं। चंपावत के माउंट कार्मल पब्लिक स्कूल में प्रभु यीशु के जन्म को दर्शाने वाली झांकी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी है।