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जनरल रावत पिथौरागढ़ आने वाले चौथे थल सेनाध्यक्ष
ब्यूरो, अमर उजाला पिथौरागढ़।
Updated Mon, 23 Oct 2017 11:00 PM IST
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तीन कुमाऊं राइफल्स के शताब्दी समारोह में परेड का निरीक्षण करते सेना प्रमुख
- फोटो : अमर उजाला
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थल सेनाध्यक्ष बिपिन रावत से पहले फील्ड मार्शल जनरल केएम करियप्पा, थल सेनाध्यक्ष जनरल बीसी जोशी और जनरल विक्रम सिंह जिले के दौरे पर आ चुके हैं। जनरल रावत पिथौरागढ़ के दौरे पर आने वाले चौथे थल सेनाध्यक्ष हैं।
वर्ष 1950 में तत्कालीन थल सेनाध्यक्ष फील्ड मार्शल जनरल केएम करियप्पा सड़क मार्ग से पिथौरागढ़ आए थे। बुजुर्ग लोग बताते हैं कि तब उनके सम्मान में मालदार परिवार ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कराया था। द्वितीय विश्व युद्ध के सेनानियों और पिथौरागढ़ की कलाप्रेमी जनता ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ जनरल करियप्पा का का स्वागत किया गया था। फील्ड मार्शल करियप्पा ने स्व. दान सिंह बिष्ट मालदार की ओर से अपनी माता सरस्वती बिष्ट और पिता देव सिंह बिष्ट की स्मृति में स्थापित माध्यमिक विद्यालय का उद्घाटन किया था। जो वर्तमान में सरस्वती देव सिंह राजकीय इंटर कॉलेज के नाम से जाना जाता है।
वर्ष 1994 में तत्कालीन थल सेनाध्यक्ष जनरल बीसी जोशी ने नैनीसैनी हवाई पट्टी में पूर्व सैनिकों से मुलाकात की थी। गंगोेलीहाट के महाकाली मंदिर के दर्शन किए थे। महाकाली मंदिर परिसर में सेना के गोल्डन फिश नामक गेस्टहाउस का शिलान्यास किया था। वर्ष 2012 में तत्कालीन थल सेनाध्यक्ष जनरल विक्रम सिंह पिथौरागढ़ के दौरे पर आए थे।
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सेवानिवृत्त सैनिकों की समस्याओं के प्रति गंभीर दिखे जनरल
पिथौरागढ़। सोमवार को थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत सैन्य बहुल सीमांत जिले पिथौरागढ़ में मौजूद थे। जनरल ने पूर्व सैनिकों की समस्याओं का समाधान करने का भरोसा दिलाकर पूर्व सैनिकों के प्रति सम्मान प्रकट किया। अधिकारी, जवानों और सेवानिवृत्त सैनिकों को संबोधित करने के दौरान थल सेनाध्यक्ष ने कहा कि भूतपूर्व सैनिकों और विधवाओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा। उन्हें किसी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। जनरल रावत ने सैन्य अधिकारियों से कहा कि पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों से पूरा मेल-मिलाप रखा जाए। दूरदराज में रहने वाले पूर्व सैनिकों और उनकी विधवाओं की हरसंभव मदद की जाए। थल सेनाध्यक्ष ने पूर्व सैनिकों की पेंशन आदि समस्याओं का तत्परता से समाधान करने के निर्देश दिए। थल सेनाध्यक्ष से मिले आश्वासन से पूर्व सैनिकों के चेहरे पर मुस्कान देखने को मिली।
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वर्ष 1950 में तत्कालीन थल सेनाध्यक्ष फील्ड मार्शल जनरल केएम करियप्पा सड़क मार्ग से पिथौरागढ़ आए थे। बुजुर्ग लोग बताते हैं कि तब उनके सम्मान में मालदार परिवार ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कराया था। द्वितीय विश्व युद्ध के सेनानियों और पिथौरागढ़ की कलाप्रेमी जनता ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ जनरल करियप्पा का का स्वागत किया गया था। फील्ड मार्शल करियप्पा ने स्व. दान सिंह बिष्ट मालदार की ओर से अपनी माता सरस्वती बिष्ट और पिता देव सिंह बिष्ट की स्मृति में स्थापित माध्यमिक विद्यालय का उद्घाटन किया था। जो वर्तमान में सरस्वती देव सिंह राजकीय इंटर कॉलेज के नाम से जाना जाता है।
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वर्ष 1994 में तत्कालीन थल सेनाध्यक्ष जनरल बीसी जोशी ने नैनीसैनी हवाई पट्टी में पूर्व सैनिकों से मुलाकात की थी। गंगोेलीहाट के महाकाली मंदिर के दर्शन किए थे। महाकाली मंदिर परिसर में सेना के गोल्डन फिश नामक गेस्टहाउस का शिलान्यास किया था। वर्ष 2012 में तत्कालीन थल सेनाध्यक्ष जनरल विक्रम सिंह पिथौरागढ़ के दौरे पर आए थे।
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सेवानिवृत्त सैनिकों की समस्याओं के प्रति गंभीर दिखे जनरल
पिथौरागढ़। सोमवार को थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत सैन्य बहुल सीमांत जिले पिथौरागढ़ में मौजूद थे। जनरल ने पूर्व सैनिकों की समस्याओं का समाधान करने का भरोसा दिलाकर पूर्व सैनिकों के प्रति सम्मान प्रकट किया। अधिकारी, जवानों और सेवानिवृत्त सैनिकों को संबोधित करने के दौरान थल सेनाध्यक्ष ने कहा कि भूतपूर्व सैनिकों और विधवाओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा। उन्हें किसी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। जनरल रावत ने सैन्य अधिकारियों से कहा कि पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों से पूरा मेल-मिलाप रखा जाए। दूरदराज में रहने वाले पूर्व सैनिकों और उनकी विधवाओं की हरसंभव मदद की जाए। थल सेनाध्यक्ष ने पूर्व सैनिकों की पेंशन आदि समस्याओं का तत्परता से समाधान करने के निर्देश दिए। थल सेनाध्यक्ष से मिले आश्वासन से पूर्व सैनिकों के चेहरे पर मुस्कान देखने को मिली।