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Champawat News: दालचीनी का हब बनेगा चंपावत
Sun, 30 Jul 2023 09:42 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Sun, 30 Jul 2023 09:42 PM IST
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खतेड़ा की पौधशाला। संवाद
चंपावत। चंपावत जिले में जड़ी बूटी की खेती को प्रोत्साहित कर रोजगार से जोडऩे की कवायद चल रही है। वर्तमान वित्त वर्ष 2023-24 में भेषज विकास इकाई के बजट में 168 प्रतिशत वृद्धि कर 9.30 लाख से बढ़ाकर 25 लाख किया गया है। यहां खतेड़ा की पौधशाला को दालचीनी का हब बनाने का प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है। इससे किसान उत्साहित हैं।
कृषि मंत्रालय ने अब लोहाघाट ब्लॉक के खतेड़ा की पौधशाला को दालचीनी का केंद्र बनाने का निर्णय लिया है। इससे दालचीनी की खेती में तेजी आएगी। जिला उद्यान अधिकारी टीएन पांडेय का कहना है कि खतेड़ा की 13.10 हेक्टेयर पौधशाला में से नौ हेक्टेयर पौधशाला दो साल पहले केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान को दी गई है। उनकी ओर से इसमें तेजपात की खेती की गई है। वहीं शेष 4.10 हेक्टेयर में उद्यान विभाग ने आलू के बीच के आवा नींबू और माल्टा की पौध लगा रखे हैं।
बाक्स
दालचीनी की खेती कर रहे हैं तीन हजार किसान
चंपावत। चंपावत जिले की पहाड़ी जलवायु दालचीनी के लिए अनुकूल है। दालचीनी की छाल तेजपात के पेड़ की छाल से अधिक पतली और सुगंधित होती है। भेषज विकास इकाई के जिला समन्वयक कमलेंद्र यादव का कहना है कि चंपावत में 1900 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में तीन हजार से अधिक किसान दालचीनी की खेती कर रहे हैं। पिछले साल 3500 क्विंटल का उत्पादन हुआ है।
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ये हैं दालचीनी के लाभ
आयुर्वेदिक चिकित्सक मोहम्मद शाहिद बताते हैं कि दालचीनी के सेवन से पाचनतंत्र संबंधी विकार दूर होते हैं। दांत, सिरदर्द, चर्म रोग सहित कई अन्य परेशानियों को दूर करने में भी यह खासा मददगार है।
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कृषि मंत्रालय ने अब लोहाघाट ब्लॉक के खतेड़ा की पौधशाला को दालचीनी का केंद्र बनाने का निर्णय लिया है। इससे दालचीनी की खेती में तेजी आएगी। जिला उद्यान अधिकारी टीएन पांडेय का कहना है कि खतेड़ा की 13.10 हेक्टेयर पौधशाला में से नौ हेक्टेयर पौधशाला दो साल पहले केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान को दी गई है। उनकी ओर से इसमें तेजपात की खेती की गई है। वहीं शेष 4.10 हेक्टेयर में उद्यान विभाग ने आलू के बीच के आवा नींबू और माल्टा की पौध लगा रखे हैं।
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दालचीनी की खेती कर रहे हैं तीन हजार किसान
चंपावत। चंपावत जिले की पहाड़ी जलवायु दालचीनी के लिए अनुकूल है। दालचीनी की छाल तेजपात के पेड़ की छाल से अधिक पतली और सुगंधित होती है। भेषज विकास इकाई के जिला समन्वयक कमलेंद्र यादव का कहना है कि चंपावत में 1900 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में तीन हजार से अधिक किसान दालचीनी की खेती कर रहे हैं। पिछले साल 3500 क्विंटल का उत्पादन हुआ है।
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ये हैं दालचीनी के लाभ
आयुर्वेदिक चिकित्सक मोहम्मद शाहिद बताते हैं कि दालचीनी के सेवन से पाचनतंत्र संबंधी विकार दूर होते हैं। दांत, सिरदर्द, चर्म रोग सहित कई अन्य परेशानियों को दूर करने में भी यह खासा मददगार है।