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ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के स्थलों की नगरी है चंपावत

Sat, 20 Apr 2019 11:02 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन सतीश जोशी ‘सत्तू’ चंपावत
सतीश जोशी ‘सत्तू’ चंपावत Published by: बृजमोहन बृजमोहन Updated Sat, 20 Apr 2019 11:02 PM IST
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Champawat is the land of historical and religious places
चंपावत जिला मुख्यालय में ऐतिहासिक राजबुंगा किले का प्रवेश द्वार। - फोटो : अमर उजाला

चंपावत नगर अतीत से ही ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के स्थलों का केंद्रबिंदु रहा है। यहां पग-पग पर बिखरी चंद और कत्यूर राजवंशों की विरासत के अलावा कण-कण में आध्यात्मिक शक्ति की अलौकिक ताकत का एहसास होता है। सर्व धर्म समभाव की लोकोक्ति को चरितार्थ करते हुए चंपावत जिले में ऐसे अनेक स्थल हैं जो आज भी सामाजिक एकता के लिए अनूठी मिसाल बने हुए हैं।

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उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में चंपावत जिले के अनेक स्थल भी शामिल हैं। मगर जब बात कुदरती खुबसूरती के साथ ही उस स्थान के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व से जुड़ी होती है तो उसमें चंपावत का नाम सबसे पहले आता है। इसकी वजह यहां के अनछुए पर्यटन स्थल, ऐतिहासिक मंदिर और देवालय हैं।
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न्याय के लिए प्रसिद्ध माने जाने वाले गोरल देव गोलज्यू महाराज का मूल स्थान जहां जिला मुख्यालय के ठीक मध्य में स्थित है, वहीं गोरखा समुदाय के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र गुरू गोरखनाथ दरबार आज भी सतयुग से अखंड जली आ रही धूनी के लिए खासा प्रसिद्ध है।
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जिले में प्रमुख देवी शक्ति पीठ मां पूर्णागिरि दरबार है और सिखों का ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री रीठासाहिब आज भी अपनी गौरवगाथा स्वयं सुनाता प्रतीत होता है। अंग्रेजों के बसाया टनकपुर नगर और एबटमाउंट कस्बा, वाणासुर के किले से जुड़ी किवदंतियां, परमाणु और इंटरनेट के युग में पत्थरों की मार अथवा युद्ध के लिए प्रसिद्ध मां बाराहीधाम देवीधुरा आदि चंपावत जिले के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को प्रमाणित करते हैं।

सुरक्षा प्रहरी के रूप में तैनात हैं भगवान शिव के सात श्वर
चंपावत। चंद, कत्यूर, पाल और अन्य राजवंशों के राजाओं की राजधानी रहे चंपावत नगर के आसपास भगवान शिव के नाम पर बने सात श्वर जहां पर शिवालय स्थित हैं, नगर के सुरक्षा प्रहरी की तरह तैनात हैं। पुराणों के मुताबिक क्रांतेश्वर पर्वत पर ही भगवान विष्णु का कुर्म अवतार हुआ था। इसके अलावा महाभारत कालीन मानेश्वर शिवालय है जहां ऊंची चोटी पर अर्जुन के वाणों से निर्मित जलाशय मौजूद है। नगर से कुछ ही दूरी पर डिप्टेश्वर मंदिर स्थित है, जहां संपूर्ण भारत में नासिक, महाराष्ट्र के अलावा कालसर्प योग दोष निवारण होता है। मल्लाड़ेश्वर, सप्तेश्वर, ऋषेश्वर के साथ ही चंपानगरी के ठीक बीचोंबीच स्थित बालेश्वर महादेव मंदिर अपने अनूठे निर्माण, शिल्पकला और सौंदर्य के लिए खासे प्रसिद्ध हैं।


अद्वैत आश्रम में रोगियों के साथ होती है परिजनों की सेवा
चंपावत। जिले में ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के अलावा सेवा भावना की अनूठी मिसाल कायम करने वाला अद्वैत आश्रम मायावती भी है। इसकी स्थापना स्वामी विवेकानंद के अनुयायियों ने की थी। असाध्य रोग टीबी व दमा रोगियों के लिए यह आश्रम स्वर्ग बना हुआ है। यहां रोगियों के साथ ही उनके परिजनों की भी सेवा की जाती है। आश्रम में रामकृष्ण मिशन की ओर से प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय महत्व की पत्रिका सत्यार्थ प्रकाश का संपादकीय कार्यालय भी है। ब्यूरो

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