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दावेदारी चंपावत से, बगावत लोहाघाट से

Wed, 25 Jan 2017 10:07 PM IST
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत Updated Wed, 25 Jan 2017 10:07 PM IST
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Champawat bid, the revolt of Lohaghat
दावेदारी चंपावत से, बगावत लोहाघाट से - फोटो : अमर उजाला
भाजपा में लोहाघाट सीट पर बगावत के आसार बढ़ गए हैं। उत्तरप्रदेश विधानसभा में पिथौरागढ़ से दो बार विधायक रहे केसी पुनेठा पार्टी के बदलते मिजाज से नाराज हैं। भले उनका लोहाघाट से बागी उम्मीदवार के रूप में उतरना फिलहाल तय है। चंपावत से दावेदारी के बाद लोहाघाट से मैदान में उतरने से एक खास वर्ग के वोटों पर असर पड़ने की आशंका है।
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करीब तीन दशक से भाजपा में सक्रिय भूमिका निभाने वाले पुनेठा पार्टी से अलग होकर अब बगावत का झंडा बुलंद कर रहे हैं। लोहाघाट से भाजपा विधायक के काबिज होने से उन्होंने लोहाघाट सीट पर दावा भी नहीं किया था, जबकि चंपावत सीट पर पिछली बार बेहद बुरे प्रदर्शन के चलते उन्होंने बीते कुछ वर्षों में सक्रियता भी चंपावत, टनकपुर-बनबसा में बढ़ा दी थी, लेकिन पार्टी ने चंपावत सीट से उनकी दावेदारी को खारिज कर दिया। इसलिए भाजपा छोड़ अब उन्होंने लोहाघाट सीट से चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। उनके चुनावी दंगल में आने से लोहाघाट सीट के चुनावी समीकरण प्रभावित होंगे, ऐसा जानकारों का मानना है।
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पुराने नेता होने के चलते उनकी एक खास वर्ग पर पकड़ रही है। देखना दिलचस्प होगा कि राम जन्म भूमि आंदोलन के दौर से भाजपा में सक्रिय हुए पुनेठा चुनाव नतीजों पर कितना असर डालेंगे। 100378 वोटरों वाली लोहाघाट सीट में तीन ब्लॉक लोहाघाट, पाटी, बाराकोट हैं। नेपाल से लेकर नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ जिले की सरहद से लगी इस सीट से निर्दलीय का जीतना तो चमत्कार सरीखा है, मगर चुनावी नतीजे को बनाने-बिगाड़ने की क्षमता हो सकती है। वर्ष 2002, 2007 के विधानसभा चुनावों में भी निर्दलीय प्रत्याशी अपनी इस क्षमता को दिखा चुके हैं।
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भाजपा के कांग्रेसीकरण से निराश हूं : पुनेठा
 उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए दो बार पिथौरागढ़ सीट से विधायक रहे केसी पुनेठा का कहना है कि भाजपा अब बदल गई है। उसकी रीति-नीति, विचारधारा, सिद्धांत सब कुछ बदल रहे हैं। टिकट न मिलने से उन्हें ज्यादा नाराजगी नहीं है। अगर ऐसा होता, तो वे 2012 में ही बगावत करते, लेकिन तब वे पार्टी के अनुशासित सिपाही रहे। पुनेठा का कहना है कि उनका गुस्सा भाजपा के कांग्रेसीकरण से है, क्योंकि भाजपा भी अब कांग्रेस की राह पर है। सुबह पार्टी में शामिल होने वालों को शाम तक टिकट दे दिए जा रहे हैं। पुराने कार्यकर्ताओं की पार्टी में कद्र नहीं रह गई है।
 
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