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Champawat News: नियमित पुलिस व्यवस्था वाला पहला पहाड़ी जिला बना चंपावत

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 14 Jan 2023 11:16 PM IST
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Champawat became the first hill district with regular police system
चंपावत। नेपाल सीमा से लगा चंपावत उत्तराखंड का पहला पर्वतीय जिला है, जिसमें राजस्व पुलिस की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो गई है। इस जिले के 75 राजस्व गांवों को नियमित पुलिस से जोड़ दिया गया है। इस निर्णय के बाद न केवल कानून व्यवस्था एकीकृत हुई है, बल्कि इससे अपराधों पर नियंत्रण भी बेहतर तरीके से हो सकेगा।
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उत्तराखंड में अब तक हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिलों की कानून व्यवस्था नियमित पुलिस के पास थी। अब इस श्रेणी में प्रदेश का पहला पर्वतीय जिला चंपावत भी शामिल हो गया है। 90 किलोमीटर की नेपाल सीमा से लगे चंपावत जिले का 85 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र पर्वतीय है। इस पहाड़ी क्षेत्र में दो कोतवाली और चार थाने हैं। शेष 15 प्रतिशत मैदानी हिस्सा टनकपुर में दो थाने हैं। मैदानी हिस्से का समूचा क्षेत्र पहले से ही रेगुलर पुलिस के पास था। पहाड़ के 75 गांव राजस्व पुलिस के पास थे। अब इन सभी गांवों को लोहाघाट थाने में बनाई गई चौकी बाराकोट में शामिल कर दिया गया है। इस चौकी में इन 75 गांवों सहित कुल 103 गांव शामिल किए गए हैं। संवाद
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रेगुलर पुलिस में शामिल होने से ये लाभ होंगे
- राजस्व पुलिस के पास आधुनिक तकनीक, संसाधन और पुलिस के प्रशिक्षण की कमी से अपराध से निपटने में अड़चन आती थी। राजस्व पुलिस क्षेत्र में हुए अपराध भी रेगुलर पुलिस क्षेत्र को स्थानांतरित किया जाता है। संवेदनशील और सीमांत क्षेत्र में अब आपराधिक वारदातों से निपटने में दिक्कतें कम होंगी।
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- पुलिस की पूरी व्यवस्था एकीकृत हो गई है, इससे किसी अन्य विभाग से समन्वय की जरूरत नहीं होगी और बेहतर नियंत्रण होगा।
चंपावत जिले के थाने-कोतवाली और उनमें शामिल गांवों की संख्या:
चंपावत कोतवाली: 156, पंचेश्वर कोतवाली: 96, लोहाघाट थाना: 139, तामली: 48, रीठा साहिब: 32, पाटी: 114, टनकपुर: 28, बनबसा: 10 गांव।
चंपावत जिले की नौ पुलिस चौकी:
बनबसा शारदा बैराज, मनिहारगोठ, बूम, ठुलीगाड़, चल्थी, डांडा, रौसाल, मडलक और बाराकोट।
बाक्स
बाराकोट चौकी खुलने से नहीं लगानी पड़ेगी लंबी दौड़
चंपावत। बाराकोट ब्लॉक को रेगुलर पुलिस में शामिल होने से चंपावत जिले में अब पुलिस की नौ चौकियां हो गई हैं। इस पुलिस चौकी के खुलने से अपराध नियंत्रण के साथ ही क्षेत्र के लोगों को शिकायत दर्ज कराने के लिए 15 से 50 किमी दूर लोहाघाट की दौड़ लगाने से निजात मिल सकेगी। तहसील और ब्लॉक मुख्यालय होने के बावजूद बाराकोट में न पुलिस थाना था और न ही पुलिस चौकी। इस वजह से यहां के लोग लंबी दूरी तय कर लोहाघाट थाना जाने को मजबूर होते थे। चौकी खुलने से क्षेत्र के 40 हजार से अधिक लोगों को सुविधा मिल सकेगी। एसपी देवेंद्र पींचा का कहना है कि बाराकोट चौकी में एक दरोगा के अलावा हेड कांस्टेबल सहित चार आठ कांस्टेबल तैनात किए जाएंगे।

कोट
चंपावत जिले के सभी राजस्व गांव अब नियमित पुलिस के अधीन आ गए हैं। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के बाद यह पहला पहाड़ी जिला है, जिसकी कानून व्यवस्था रेगुलर पुलिस के पास आ गई है। इस एकीकृत व्यवस्था से कानून व्यवस्था को और बेहतर करने में मदद मिलेगी।
देवेंद्र पींचा, एसपी, चंपावत।
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