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चंपावत हादसा : 14 मौतों का कौन है गुनहगार, किसे ठहराए कसूरवार

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 22 Feb 2022 11:57 PM IST
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Champawat accident: Who is the culprit of 14 deaths, who should be blamed
ककनई में खाई से शव को निकालते राहत दल। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : TANAKPUR
ध्यानार्थ... सभी केंद्र... चंपावत हादसा
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14 मौतें: कौन है गुनहगार, किसे ठहराए कसूरवार
आवाजाही के लिए अनुमोदित न होने के बावजूद इस सड़क पर दौड़ रहे हैं वाहन
कैच लाइन:: सबसे बड़े सवाल
कॉमन इंट्रो
चंपावत जिले में बीते 13 साल में यह सबसे बड़ी सड़क दुर्घटना है, जिसने एक झटके में 14 लोगों की जिंदगी को निगल लिया। लोगों का कहना है कि यह महज सड़क हादसा नहीं है, यह किसी हत्या से कम नहीं है। सूखीढांग-डांडा-मीनार की यह सड़क न तो इस लायक है कि इसमें सुरक्षित और सहज तरीके से आवाजाही की जा सके और न ही यह सड़क आवाजाही के लिए अनुमोदित थी। इसके बावजूद यहां आवाजाही भी हो रही है। इस हादसे में हुई 14 मौतों का गुनहगार कौन है? व्यवस्था की चूक, सड़क की बदहाली, परिवहन विभाग की ढिलाई या कुछ और... ये सवाल लोगों के जेहन में हैं। संवाद
सड़क का हाल: जिंदगी को झटका दे रहे ये गड्ढे
मुख्यमंत्री ने 28 फरवरी 2020 को एसडीएम रोड के डामरीकरण का किया था एलान, अब तक कुछ नहीं हुआ
संवाद न्यूज एजेंसी
चंपावत। ककनई में बरात की जीप हादसे की वजह सड़क पर बिछे रोड़े से असंतुलित होकर जीप का खाई में जाना बताया गया है। जीप चालक प्रकाश राम के इस दावे में सच्चाई हो या न हो लेकिन यह तो तय है कि एसडीएम सड़क पर आवाजाही जान हथेली में रखकर ही हो रही है।
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56 किमी लंबे एसडीएम मार्ग की कटिंग पांच साल पहले जनवरी 2017 में 15 करोड़ रुपये से पूरी हुई थी लेकिन सड़क में डामरीकरण नहीं हुआ। दो साल पहले तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चंपावत के दौरे पर सड़क के डामरीकरण की घोषणा की थी, लेकिन यह काम आज तक शुरू नहीं हो सका है। झटकों के बीच आवाजाही का नतीजा लोग असुरक्षित यात्रा के रूप में चुका रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता पंडित शंकर दत्त जोशी ने इस हादसे के लिए रोड में डामरीकरण नहीं होने को दुर्घटना के लिए जिम्मेदार बताया है। पीएमजीएसवाई द्वारा इन्कार के बाद लोनिवि डामरीकरण की प्रक्रिया में जुटा है। ईई एमसी पांडे का कहना है कि डामरीकरण के लिए 18 करोड़ रुपये की मांग की गई है।
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ओवरलोडिंग: परिवहन विभाग और पुलिस की भूमिका पर सवाल
चंपावत। 14 घरों का चिराग बुझाने वाली ककनई जीप दुर्घटना में ओवरलोडिंग का भी कम कसूर नहीं है। चालक सहित 10 सवारी को ले जाने के लिए अनुमन्य इस मैक्स जीप में 60 प्रतिशत सवारी अधिक थी। यानी 10 के बजाय 16 लोग इस जीप में सफर कर रहे थे। ऊपर से ज्यादातर लोग बरात के उल्लास में झूम रहे थे। शाह मोर्ट्स के स्वामी कहते हैं कि ऐसी स्थिति में चालक की एकाग्रता बाधित होती है, साथ ही ओवरलोडिंग उनके यांत्रिकी काम पर असर डालता है। साथ ही दुर्घटनाग्रस्त जीप का बीमा नहीं है। एआरटीओ सुरेंद्र वर्मा का कहना है कि जीप का फिटनेस पास था। बीमा के बारे में जानकारी लेकर स्थिति साफ हो सकेगी। उनका कहना है कि कम स्टाफ से वाहनों की मॉनिटरिंग पर दिक्कत आती है।
स्वास्थ्य सुविधा: यहां से अस्पताल की दूरी 49 किमी
चंपावत। डांडा-ककनई सहित तल्लापाल के इस पिछड़े क्षेत्र में आकस्मिक और आपातकाल में भी इलाज की कोई उम्मीद नहीं है। घायलों को फौरन प्राथमिक उपचार के लिए 49 किमी दूर टनकपुर उप जिला अस्पताल की दौड़ लगानी होती है, जहां पहुंचने में तीन घंटे से अधिक लगते हैं। आज भी एक घायल को 49 किमी दूर टनकपुर तो दूसरे घायल को 76 किमी दूर चंपावत भेजना पड़ा।
संचार सेवा: संकट में काम नहीं आई मोबाइल सेवा
चंपावत। तल्लापाल क्षेत्र के डांडा-ककनई इलाके में डिजिटल इंडिया के दौर का कोई मतलब नहीं है। सामान्य समय में लोग इसका खास उपयोग नहीं कर पाते, तो आपातकाल में वक्त पर मदद के लिए तरसना पड़ता है। नतीजा यह हुआ कि सोमवार रात 11 बजे से पहले हुई इस दुर्घटना की जानकारी ग्रामीणों को करीब डेढ़ घंटे बाद, तो प्रशासन को चार घंटे बाद मिल सकी। इसके बाद राहत का सिलसिला शुरू हुआ। सामाजिक कार्यकर्ता महेश चौड़ाकोटी सहित तमाम ग्रामीण कहते हैं कि यहां बीएसएनएल और जियो के नेटवर्क है, लेकिन कहीं-कहीं और कभी-कभी ही काम करते हैं। संकट की इस घड़ी में संचार व्यवस्था ने साथ नहीं दिया।

कोट
ककनई जीप हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है, यह दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई, इन सबका पता लगाने के लिए मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए हैं। सड़क के डामरीकरण से लेकर क्षेत्र की आधारभूत समस्याओं को दूर करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
-विनीत तोमर, डीएम, चंपावत।
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