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पढ़ाई छोड़ पानी ढो रहे पॉलीटेक्निक के छात्र
नवल जोशी/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)
Updated Sun, 26 Feb 2017 10:12 PM IST
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राजकीय पॉलीटेक्निक में गंभीर पेयजल समस्या बनी हुई है। छात्र-छात्राओं और शिक्षक पानी की किल्लत से परेशान हैं। छात्र-छात्राएं पढ़ाई छोड़कर पानी ढोने को मजबूर हैं। करीब छह माह पहले पॉलीटेक्निक के लिए बनस्वाड़ गधेरे से बनी पेयजल योजना बरसात के दौरान कूड़े के ढेर में पट गई थी। इसके बाद से पेयजल व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ गई थी। कुछ समय बाद काम चलाऊ व्यवस्था की गई लेकिन स्रोत में कम पानी होने से पॉलीटेक्निक भवन तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
पॉलीटेक्निक में 425 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। इनमें से 90 छात्र छात्रावास में रहते हैं। इसके अलावा शिक्षकों और कर्मचारियों के 20 परिवार फैमिली आवास में रह रहे हैं। छात्र-छात्राओं सहित आवासीय परिसर में रहने वाले शिक्षकों और कर्मियों की निर्भरता मुख्य रूप से हैंडपंप और गाड़-गधेरों में निर्भर हो गई है।
प्रभारी प्रधानाचार्य गोविंद बल्लभ का कहना है कि रोजाना 15 हजार लीटर पानी की आवश्यकता है, लेकिन उन्हें पेयजल योजना से बमुश्किल मात्र पांच हजार लीटर पानी ही मिल पा रहा है। स्रोत में पानी कम होने की दिक्कत से निपटने के लिए एक टैंक भी बनाया गया है। इस टैंक से पॉलीटेक्निक के लिए सप्ताह में दो दिन जलापूर्ति हो पा रही है। छात्र-छात्राएं पानी के लिए हैंडपंप पर लाइन पर खड़े रहते हैं। पानी की कमी के चलते 50 छात्राओं के लिए बनाया गया छात्रावास शुरू नहीं हो पाया।
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कई बार निदेशालय को विद्यालय परिसर में ट्यूबवेल लगाने और क्षतिग्रस्त पेयजल योजना की मरम्मत के लिए पत्राचार किया गया है, लेकिन अभी कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हो सकी है। पेयजल किल्लत के चलते नवनिर्मित छात्रावास भी शुरू नहीं हो पा रहा है।
गोविंद बल्लभ प्रधानाचार्य, राजकीय पॉलीटेक्निक, लोहाघाट।
मौजूदा जल स्रोत से राजकीय पॉलीटेक्निक में पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था मुमकिन नहीं है। पॉलीटेक्निक के आग्रह पर ट्यूबवेल का इस्टीमेट बनाकर भेजा गया है। भुगतान करने पर ही जल संस्थान ट्यूबवेल का निर्माण करेगा।
पवन बिष्ट, अवर अभियंता, जल संस्थान, लोहाघाट।
प्रभावित हो रही पढ़ाई
राजकीय पॉलीटेक्निक में मूनाकोट, बांसबगड़, बांस बेरीनाग, चंपावत संस्थाओं के इलेक्ट्रानिक्स और सिविल इंजीनियरिंग अंतिम वर्ष के करीब 50 छात्र-छात्राएं भी यहीं पढ़ते हैं। छात्र भूपेंद्र सिंह कुंजवाल, सूरजनाथ गोस्वामी, ममता बिष्ट, जागृति पाटनी आदि का कहना है कि पेयजल किल्लत के चलते उनकी पढ़ाई भी काफी प्रभावित हो रही है। सुबह-शाम पानी के लिए हैंडपंप में लाइन लगानी पड़ रही है। इससे उन्हें पढ़ाई के लिए कम समय मिल पाता है।
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पॉलीटेक्निक में 425 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। इनमें से 90 छात्र छात्रावास में रहते हैं। इसके अलावा शिक्षकों और कर्मचारियों के 20 परिवार फैमिली आवास में रह रहे हैं। छात्र-छात्राओं सहित आवासीय परिसर में रहने वाले शिक्षकों और कर्मियों की निर्भरता मुख्य रूप से हैंडपंप और गाड़-गधेरों में निर्भर हो गई है।
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प्रभारी प्रधानाचार्य गोविंद बल्लभ का कहना है कि रोजाना 15 हजार लीटर पानी की आवश्यकता है, लेकिन उन्हें पेयजल योजना से बमुश्किल मात्र पांच हजार लीटर पानी ही मिल पा रहा है। स्रोत में पानी कम होने की दिक्कत से निपटने के लिए एक टैंक भी बनाया गया है। इस टैंक से पॉलीटेक्निक के लिए सप्ताह में दो दिन जलापूर्ति हो पा रही है। छात्र-छात्राएं पानी के लिए हैंडपंप पर लाइन पर खड़े रहते हैं। पानी की कमी के चलते 50 छात्राओं के लिए बनाया गया छात्रावास शुरू नहीं हो पाया।
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कई बार निदेशालय को विद्यालय परिसर में ट्यूबवेल लगाने और क्षतिग्रस्त पेयजल योजना की मरम्मत के लिए पत्राचार किया गया है, लेकिन अभी कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हो सकी है। पेयजल किल्लत के चलते नवनिर्मित छात्रावास भी शुरू नहीं हो पा रहा है।
गोविंद बल्लभ प्रधानाचार्य, राजकीय पॉलीटेक्निक, लोहाघाट।
मौजूदा जल स्रोत से राजकीय पॉलीटेक्निक में पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था मुमकिन नहीं है। पॉलीटेक्निक के आग्रह पर ट्यूबवेल का इस्टीमेट बनाकर भेजा गया है। भुगतान करने पर ही जल संस्थान ट्यूबवेल का निर्माण करेगा।
पवन बिष्ट, अवर अभियंता, जल संस्थान, लोहाघाट।
प्रभावित हो रही पढ़ाई
राजकीय पॉलीटेक्निक में मूनाकोट, बांसबगड़, बांस बेरीनाग, चंपावत संस्थाओं के इलेक्ट्रानिक्स और सिविल इंजीनियरिंग अंतिम वर्ष के करीब 50 छात्र-छात्राएं भी यहीं पढ़ते हैं। छात्र भूपेंद्र सिंह कुंजवाल, सूरजनाथ गोस्वामी, ममता बिष्ट, जागृति पाटनी आदि का कहना है कि पेयजल किल्लत के चलते उनकी पढ़ाई भी काफी प्रभावित हो रही है। सुबह-शाम पानी के लिए हैंडपंप में लाइन लगानी पड़ रही है। इससे उन्हें पढ़ाई के लिए कम समय मिल पाता है।