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कैलपाल बाबा का डोला वापस दियूरी पहुंचा, शोभा यात्रा में उमड़े श्रद्धालु
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त्तरायणी मेले में बेलखेत में नाचते देवडांगर और कलश यात्रा निकालती महिला श्रद्घालु।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत /लोहाघाट। बेलखेत-दियूरी में दो दिनी उत्तरायणी महोत्सव संपन्न हुआ। बुधवार को पारंपरिक गीतों के साथ कैलपाल बाबा का डोला बेलखेत से वापस दियूरी पहुंचा। इस मौके पर निकली शोभा यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। देवडांगरों ने भक्तों को आशीर्वाद दिया। बुधवार सुबह से विशेष पूजा अनुष्ठान हुए। शोभा यात्रा में जिला पंचायत सदस्य दीपा जोशी बालम सिंह, बीडीसी सदस्य सुंदर सिंह बोरा, दीवान सिंह, मनोज चौहान, जीवन चौड़ाकोटी, गंगा बिष्ट, मोहन जोशी, कमल पंत, अमित मिश्रा, भाजपा मंडल अध्यक्ष गोविंद बौहरा आदि मौजूद थे। चल्थी चौकी प्रभारी हरीश प्रसाद के नेतृत्व में सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम था।
उधर नेपाल सीमा से गोरी, काली, सरयू, धौली, रामगंगा के संगम पंचेश्वर के चौमू मंदिर में दो दिनी महोत्सव संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। भारत-नेपाल से बड़ी संख्या में आए लोगों ने बच्चों का यज्ञोपवीत संस्कार कराया। उत्तरायणी महोत्सव समित के अध्यक्ष शमशेर चंद की देखरेख में पिथौरागढ़ के प्रकाश रावत एंड पार्टी ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां पेश की। कलाकारों ने कांछ तेरो जलेबी को ढाब, थल की बजार, ओ हीरा समधनी आदि गीतों पर दर्शक झूमते रहे। मेेले में टनकपुर, खटीमा, बरेली, पीलीभीत, हल्द्वानी आदि स्थानों से बड़ी संख्या में व्यापारी पहुंचे हुए थे।
काले कौआ आ, घुघुतिया खा...
चंपावत/लोहाघाट। उत्तरायणी का पर्व उल्लास से मना। लोगों ने सुबह पूजापाठ के बाद कौओं को घुघुते खिलाए। निहारिका, काव्या सहित तमाम छोटे-छोटे बच्चे गले में घुघुतियां की माला डालकर खुशी का इजहार कर रहे थे। बच्चे घुघुतिया की माला लेकर कौओं को खिलाने के लिए छत और आंगन में घूमते रहे। बच्चों ने काले कौआ आ, घुघुतिया खा... के बोल से कौओं को बुलाया। वहीं कई जगह कौओं के न पहुंचने से बच्चों को मायूस भी होना पड़ा। डिप्टेश्वर, क्रांतेश्वर, मानेश्वर, हरेश्वर, ताड़केश्वर, हिंगला देवी, गोरलदेव, नागनाथ, बालेश्वर आदि में श्रद्धालुओं ने मत्था टेका।
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उधर नेपाल सीमा से गोरी, काली, सरयू, धौली, रामगंगा के संगम पंचेश्वर के चौमू मंदिर में दो दिनी महोत्सव संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। भारत-नेपाल से बड़ी संख्या में आए लोगों ने बच्चों का यज्ञोपवीत संस्कार कराया। उत्तरायणी महोत्सव समित के अध्यक्ष शमशेर चंद की देखरेख में पिथौरागढ़ के प्रकाश रावत एंड पार्टी ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां पेश की। कलाकारों ने कांछ तेरो जलेबी को ढाब, थल की बजार, ओ हीरा समधनी आदि गीतों पर दर्शक झूमते रहे। मेेले में टनकपुर, खटीमा, बरेली, पीलीभीत, हल्द्वानी आदि स्थानों से बड़ी संख्या में व्यापारी पहुंचे हुए थे।
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काले कौआ आ, घुघुतिया खा...
चंपावत/लोहाघाट। उत्तरायणी का पर्व उल्लास से मना। लोगों ने सुबह पूजापाठ के बाद कौओं को घुघुते खिलाए। निहारिका, काव्या सहित तमाम छोटे-छोटे बच्चे गले में घुघुतियां की माला डालकर खुशी का इजहार कर रहे थे। बच्चे घुघुतिया की माला लेकर कौओं को खिलाने के लिए छत और आंगन में घूमते रहे। बच्चों ने काले कौआ आ, घुघुतिया खा... के बोल से कौओं को बुलाया। वहीं कई जगह कौओं के न पहुंचने से बच्चों को मायूस भी होना पड़ा। डिप्टेश्वर, क्रांतेश्वर, मानेश्वर, हरेश्वर, ताड़केश्वर, हिंगला देवी, गोरलदेव, नागनाथ, बालेश्वर आदि में श्रद्धालुओं ने मत्था टेका।
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