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ब्यानधूरा धाम : यहां आज भी पूजे और चढ़ाए जाते हैं धनुष-बाण
Sun, 14 Jan 2024 12:04 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Sun, 14 Jan 2024 12:04 PM IST
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ब्यानधूरा मंदिर।
चंपावत। ब्यानधूरा धाम अपनी अनूठी मान्यताओं से लोकप्रिय है। अधिकांश मंदिरों में मनौती और मनोकामना पूर्ण करने के लिए छत्र, ध्वज, पताका, श्रीफल, घंटी आदि चढ़ाए जाते हैं लेकिन ब्यानधूरा धाम में आज भी धनुष बाण चढ़ाए और पूजे जाते हैं। यहां हर वर्ष मकर संक्रांति पर हजारों श्रद्धालुओं का रेला उमड़ता है। महाभारत काल से ही ऐतिहासिक घटनाओं के साक्षी रहे इस क्षेत्र को अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने अपना ठिकाना बनाया था और अर्जुन के गांडीव धनुष सहित अन्य अस्त्र शस्त्र छिपाए थे।
ब्यानधूरा चोटी का आकार भी धनुष बाण की तरह ही है। तीन जिलों चंपावत, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर की सीमा से लगे सेनापानी जंगल स्थित ब्यानधूरा क्षेत्र वीरान इलाका है। महाभारत काल में पांडव कूर्मांचल के इस हिस्से में अज्ञातवास के दौरान रहे और अर्जुन ने अपना गांडीव धनुष छिपाया।
कहते हैं वह धनुष आज भी मौजूद है और ऐड़ी देव के अवतार ही उसे उठा पाते हैं। महाभारत काल के अलावा भी इस क्षेत्र में मुगल और हूणकाल में बाहरी आक्रमणकारियों ने हमले किए थे, लेकिन यह आक्रमणकारी ब्यानधूरा धाम तक नहीं पहुंच पाए थे। संवाद
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आज भी मिलते है मूर्तियों के अवशेष
चंपावत। ब्यानधूरा के सेनापानी क्षेत्र में आज भी मानव बस्तियो और मूर्तियों के अवशेष देखे जा सकते हैं। इतिहासकार डॉ. प्रशांत जोशी के अनुसार तमाम इतिहासकारों ने यहां की ऐतिहासिक महत्ता को अपनी पुस्तकों में उकेरा है। यह क्षेत्र हमेशा से इतिहासकारों के लिए शोध का विषय रहा है। ब्यानधूरा को एड़ी देवता के रूप में पूजा जाता है। धाम के पुजारी पंडित शंकर दत्त जोशी बताते है कि यहां देव डंगरिये अवतरित होकर आशीर्वाद देते हैं। रक्षा और दुख निवारण के लिए अधिकांश लोग ऐड़ी देव की शरण में जाते हैं। मान्यता है कि ब्यानधूरा धाम में जलते दीपक के साथ रात्रि जागरण करने से मनोकामना पूरी होती हैं। संवाद
कुमाऊं आयुक्त आज करेंगे धाम का भ्रमण
चंपावत। कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत मकर संक्रांति पर रविवार को ब्यानधूरा धाम का भ्रमण करेंगे। एडीएम हेमंत कुमार वर्मा ने बताया कि आयुक्त धाम में पूजा अर्चना करने के साथ ही विभिन्न निर्माण कार्य का निरीक्षण भी करेंगे। संवाद
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ब्यानधूरा चोटी का आकार भी धनुष बाण की तरह ही है। तीन जिलों चंपावत, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर की सीमा से लगे सेनापानी जंगल स्थित ब्यानधूरा क्षेत्र वीरान इलाका है। महाभारत काल में पांडव कूर्मांचल के इस हिस्से में अज्ञातवास के दौरान रहे और अर्जुन ने अपना गांडीव धनुष छिपाया।
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कहते हैं वह धनुष आज भी मौजूद है और ऐड़ी देव के अवतार ही उसे उठा पाते हैं। महाभारत काल के अलावा भी इस क्षेत्र में मुगल और हूणकाल में बाहरी आक्रमणकारियों ने हमले किए थे, लेकिन यह आक्रमणकारी ब्यानधूरा धाम तक नहीं पहुंच पाए थे। संवाद
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आज भी मिलते है मूर्तियों के अवशेष
चंपावत। ब्यानधूरा के सेनापानी क्षेत्र में आज भी मानव बस्तियो और मूर्तियों के अवशेष देखे जा सकते हैं। इतिहासकार डॉ. प्रशांत जोशी के अनुसार तमाम इतिहासकारों ने यहां की ऐतिहासिक महत्ता को अपनी पुस्तकों में उकेरा है। यह क्षेत्र हमेशा से इतिहासकारों के लिए शोध का विषय रहा है। ब्यानधूरा को एड़ी देवता के रूप में पूजा जाता है। धाम के पुजारी पंडित शंकर दत्त जोशी बताते है कि यहां देव डंगरिये अवतरित होकर आशीर्वाद देते हैं। रक्षा और दुख निवारण के लिए अधिकांश लोग ऐड़ी देव की शरण में जाते हैं। मान्यता है कि ब्यानधूरा धाम में जलते दीपक के साथ रात्रि जागरण करने से मनोकामना पूरी होती हैं। संवाद
कुमाऊं आयुक्त आज करेंगे धाम का भ्रमण
चंपावत। कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत मकर संक्रांति पर रविवार को ब्यानधूरा धाम का भ्रमण करेंगे। एडीएम हेमंत कुमार वर्मा ने बताया कि आयुक्त धाम में पूजा अर्चना करने के साथ ही विभिन्न निर्माण कार्य का निरीक्षण भी करेंगे। संवाद