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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Books not reached at school, 100 meters away

100 मीटर दूर स्कूल, पर नहीं पहुंची पुस्तकें

Tue, 11 Apr 2017 09:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत Updated Tue, 11 Apr 2017 09:19 PM IST
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Books not reached at school, 100 meters away
किताबों के अभाव के बाद भी पढ़ाई करते बच्चे। - फोटो : अमर उजाला

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 सब पढ़े-सब बढ़े का नारा जोरों पर है। स्कूल चलो अभियान के तहत जगह-जगह रैलियां निकल रही है पर पहले से ही सरकारी प्राथमिक स्कूलों में प्रवेश ले चुके छात्र-छात्राओं को पुस्तकें नहीं मिल पा रही है। नए सत्र को शुरू हुए 11 दिन बीत गए, लेकिन किताबें कब मिलेंगी, इसका अता-पता नहीं। अभी तक एक भी पुस्तक स्कूलों तक नहीं पहुंच सकी है।

नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकों की जिला मुख्यालय पहुंची 31 पुस्तकों में से एक भी स्कूल तक नहीं पहुंच सकी है। और तो और पाठ्य पुस्तकों के गोदाम से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित केंद्रीय प्राथमिक विद्यालय तक भी किताब नहीं पहुंच सकी है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं प्राइवेट स्कूलों से कैसे मुकाबला करेंगे
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नि:शुल्क पुस्तक योजना के तहत पहली कक्षा से आठवीं तक के छात्रों को किताबें दी जाती है। मगर ये पुस्तकें अभी तक नहीं मिल सकी है। जिले के 601 प्राथमिक और जूनियर हाइस्कूलों के छात्र नए शिक्षा सत्र में हर रोज स्कूल जा रहे हैं। कक्षाएं भी चल रही हैं, लेकिन ये बच्चें किताबों के बगैर पढ़ नहीं पा रहे हैं। न घर पर और नहीं स्कूल में। जिले के करीब 25 हजार छात्र इसके चलते प्रभावित हो रहे हैं। 55 विषयों की पुस्तकों के स्थान पर अभी मात्र 31 विषयों की पुस्तकें यहां पहुंच गई हैं, लेकिन इनमें से एक भी किताब स्कूल तक नहीं पहुंच सकी है। कमजोर वर्ग के इन बच्चों का भविष्य अधर में लटका है। बीते तीन वर्षों में नि:शुल्क पुस्तकें अप्रैल के बाद ही पहुंच सकी थी।
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केंद्रीय प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक कीर्ति बल्लभ गहतोड़ी का कहना है कि अभी एक भी पुस्तक स्कूल में नहीं मिली है। इस वजह से छात्र-छात्राओं को नई पुस्तकें वितरित नहीं की जा सकी है। काम चलाने के लिए कुछ पुरानी पुस्तकों से काम चलाया जा रहा है। एक पुस्तक से कई छात्र पढ़ रहे हैं।

 वर्ष         पुस्तकों की संख्या
2014         30812
2015         28005
2016         26889
2017         24997


घर में नहीं हो पा रही है पढ़ाई
केंद्रीय प्राथमिक स्कूल की चौथी कक्षा में पढ़ने वाले इरफान, निहाल, पांचवीं के छात्र अंजलि, पीयूष हर रोज स्कूल आ रहे हैं, मगर किताब नहीं होने से पढ़ाई नहीं हो पा रही है। इन छात्रों का कहना है कि स्कूल में तो किसी तरह पुरानी पुस्तकों से पढ़ाई हो रही है, लेकिन घर में पढ़ाई नहीं हो पा रही है।


यहां किताबें नहीं, प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई भी शुरू
सरकारी स्कूलों में तो किताबें नहीं पहुंची है, लेकिन प्राइवेट स्कूलों में बाकायदा पढ़ाई शुरू हो गई है। देर से किताब मिलने सहित कई दूसरी वजहों से सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता कमतर है। सरकारी विद्यालयों के विपरीत प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई बाकायदा शुरू हो गई है।



आठवीं कक्षा तक के कुल 55 विषयों में से 31 पुस्तकें जिले में पहुंच चुकी है। लेकिन ये पुस्तकें अभी जिला मुख्यालय के सर्वशिक्षा के गोदाम में हैं। यहां से ये पुस्तकें आपदा के वाहन से न्याय पंचायत केंद्रों में भेजी जाएगी। फिलहाल पुरानी पुस्तकों से स्कूल को काम चलाने को कहा गया है।
अजय कुमार चौबे, जिला समन्वयक, एसएसए चंपावत।
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