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बर्ड फ्लू का कहर:वन विभाग पक्षियों पर रख रहा है नजर
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चंपावत के काली कुमाऊं वन रेंज में बर्ड फ्लू को लेकर पक्षियों पर रखी जा रही है खास नजर।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। उत्तराखंड राज्य में कोरोना वायरस के साए के बीच बर्ड फ्लू ने भी दस्तक दे दी है। पिछले दिनों देहरादून और कोटद्वार में मृत मिले पक्षियों के सैंपलों की जांच में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। प्रदेश में जहां बर्ड फ्लू के मामले सामने आने पर वन विभाग ने रेड अलर्ट जारी कर दिया है। बर्ड फ्लू के कहर से बचने के लिए वन विभाग की ओर से पक्षियों पर नजर रखी जा रही है।
चंपावत वन प्रभाग के सभी सातों रेंजों में आसमानी परिंदों के साथ ही नदी-घाटी वाले क्षेत्रों में पक्षियों की गतिविधियों पर खास नजर रखी जा रही है। विभाग की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि कोई भी पक्षी मृत मिलने पर न तो उसे छुए और न ही उसे दफनाएं। पक्षी मृत मिलने पर इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर उसे वहां से हटाएगी और पक्षी के सैंपल लेगी। डीएफओ मयंक शेखर झा ने बताया कि सभी रेंजों में अनुभाग अधिकारियों के नेतृत्व में पक्षियों के झुंड में कमजोर और बीमार दिख रहे पक्षियों को चिह्नित कर खास नजर रखी जा रही है। हालांकि जिले में बर्ड फ्लू का कोई भी मामला प्रकाश में नहीं आया है। चिकित्सकों के अनुसार बर्ड फ्लू के संक्रमण की चपेट में आने पर व्यक्ति को खांसी, डायरिया, रेस्पिरेटरी में परेशानी, बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, बेचैनी, नाक बहना या गले में खराश की समस्या हो सकती है।
चंपावत वन प्रभाग के काली कुमाऊं सहित सभी रेंजों में कई जगह आसमानी परिंदों में नजर बनाए रखी जा रही है। लोगों को इसे लेकर सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। खासकर नदी घाटी वाले इलाकों में खास नजर रखी जा रही है।
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- बीडी जोशी, अनुभाग अधिकारी, काली कुमाऊं रेंज।
कुछ तरह (स्ट्रेन) के इंफ्लुएंजा वायरस जो मुख्य रूप से पक्षियों को संक्रमित करते हैं, लेकिन यह मनुष्यों को भी संक्रमित कर सकते हैं। इस तरह का फ्लू अक्सर ही बीमार पक्षियों के संपर्क में आने से होता है। यह व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकता है।
- डॉ. अमित सिंह, पशु चिकित्सक।
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चंपावत वन प्रभाग के सभी सातों रेंजों में आसमानी परिंदों के साथ ही नदी-घाटी वाले क्षेत्रों में पक्षियों की गतिविधियों पर खास नजर रखी जा रही है। विभाग की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि कोई भी पक्षी मृत मिलने पर न तो उसे छुए और न ही उसे दफनाएं। पक्षी मृत मिलने पर इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर उसे वहां से हटाएगी और पक्षी के सैंपल लेगी। डीएफओ मयंक शेखर झा ने बताया कि सभी रेंजों में अनुभाग अधिकारियों के नेतृत्व में पक्षियों के झुंड में कमजोर और बीमार दिख रहे पक्षियों को चिह्नित कर खास नजर रखी जा रही है। हालांकि जिले में बर्ड फ्लू का कोई भी मामला प्रकाश में नहीं आया है। चिकित्सकों के अनुसार बर्ड फ्लू के संक्रमण की चपेट में आने पर व्यक्ति को खांसी, डायरिया, रेस्पिरेटरी में परेशानी, बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, बेचैनी, नाक बहना या गले में खराश की समस्या हो सकती है।
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चंपावत वन प्रभाग के काली कुमाऊं सहित सभी रेंजों में कई जगह आसमानी परिंदों में नजर बनाए रखी जा रही है। लोगों को इसे लेकर सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। खासकर नदी घाटी वाले इलाकों में खास नजर रखी जा रही है।
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- बीडी जोशी, अनुभाग अधिकारी, काली कुमाऊं रेंज।
कुछ तरह (स्ट्रेन) के इंफ्लुएंजा वायरस जो मुख्य रूप से पक्षियों को संक्रमित करते हैं, लेकिन यह मनुष्यों को भी संक्रमित कर सकते हैं। इस तरह का फ्लू अक्सर ही बीमार पक्षियों के संपर्क में आने से होता है। यह व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकता है।
- डॉ. अमित सिंह, पशु चिकित्सक।