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Champawat News: गुलजार हुआ वन विभाग का जलीय जैव विविधता केंद्र
Wed, 10 May 2023 11:34 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Wed, 10 May 2023 11:34 PM IST
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टनकपुर में शारदा बैराज के पास बना वन विभाग का जलीय जैव विविधता केंद्र फिर गुलजार हो गया है।
टनकपुर (चंपावत)। शारदा बैराज के पास बना वन विभाग का जलीय जैव विविधता केंद्र फिर गुलजार हो गया है। दो साल पहले नेपाल के लिए नहर के निर्माण के वक्त बैराज में हुए 52 दिन के क्लोजर से केंद्र उजड़ गया था जिसे विभाग ने सौंदर्यीकरण कर पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना दिया है।
हल्द्वानी वन प्रभाग ने वर्ष 2017 में बैराज के पास शारदा रेंज की चार हेक्टेयर भूमि पर विभिन्न प्रजाति के जलीय पौधों और जीवों के संरक्षण के लिए जलीय जैव विविधता केंद्र का निर्माण कराया था जो वर्ष 2021 में टनकपुर बैराज से नेपाल के लिए बनी नहर के हेड रेगुलेटर निर्माण के वक्त नदी के 52 दिनी क्लोजर से सूख गया था।
केंद्र में बने तालाब पानी की आपूर्ति के अभाव में सूख गए थे। उनमें संरक्षित विभिन्न प्रजाति के जलीय पौधे और जीवों का संग्रह भी खत्म हो गया था लेकिन अब विभाग ने फिर इस केंद्र को संवारकर जलीय पौधे और जीवों का संरक्षण शुरू कर दिया है। वन क्षेत्राधिकारी महेश सिंह बिष्ट ने बताया कि केंद्र में बने तालाबों में विभिन्न प्रजाति के पौधों के साथ ही मछलियां, कछुए आदि जीव संरक्षित किए जा रहे हैं।
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छह साल पहले मिले थे थ्री कील्ड लैंड प्रजाति के दो कछुए
टनकपुर (चंपावत)। जैव विविधता केंद्र बनाने के बाद विभाग को छह साल पहले थ्री कील्ड लैंड प्रजाति के दो कछुए मिले थे जिन्हें शोध के लिए संरक्षित किया था। कछुए की यह प्रजाति दुर्लभ है जो सूची एक में आते हैं। यह प्रजाति अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की रेड डाटा बुक में दर्ज है।
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हल्द्वानी वन प्रभाग ने वर्ष 2017 में बैराज के पास शारदा रेंज की चार हेक्टेयर भूमि पर विभिन्न प्रजाति के जलीय पौधों और जीवों के संरक्षण के लिए जलीय जैव विविधता केंद्र का निर्माण कराया था जो वर्ष 2021 में टनकपुर बैराज से नेपाल के लिए बनी नहर के हेड रेगुलेटर निर्माण के वक्त नदी के 52 दिनी क्लोजर से सूख गया था।
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केंद्र में बने तालाब पानी की आपूर्ति के अभाव में सूख गए थे। उनमें संरक्षित विभिन्न प्रजाति के जलीय पौधे और जीवों का संग्रह भी खत्म हो गया था लेकिन अब विभाग ने फिर इस केंद्र को संवारकर जलीय पौधे और जीवों का संरक्षण शुरू कर दिया है। वन क्षेत्राधिकारी महेश सिंह बिष्ट ने बताया कि केंद्र में बने तालाबों में विभिन्न प्रजाति के पौधों के साथ ही मछलियां, कछुए आदि जीव संरक्षित किए जा रहे हैं।
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छह साल पहले मिले थे थ्री कील्ड लैंड प्रजाति के दो कछुए
टनकपुर (चंपावत)। जैव विविधता केंद्र बनाने के बाद विभाग को छह साल पहले थ्री कील्ड लैंड प्रजाति के दो कछुए मिले थे जिन्हें शोध के लिए संरक्षित किया था। कछुए की यह प्रजाति दुर्लभ है जो सूची एक में आते हैं। यह प्रजाति अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की रेड डाटा बुक में दर्ज है।