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हुड्डीनदी गांव व वनों के लिए बनी खतरा
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बनबसा की हुड्डीनदी में खनिज का चुगान न होने के कारण नदी से हो रहे भूकटाव से गिरे पेड़।
- फोटो : TANAKPUR
बनबसा (चंपावत)। क्षेत्र के पश्चिमी छोर पर बहने वाली बरसाती हुड्डीनदी तीन गांवों समेत वनों के लिए खतरा बन गई है। चुगान नहीं होने से वर्षों से नदी में जमा मलबा (रिवर बेड मेटिरियल) क्षेत्र के लिए खतरा बन चुका है। बरसात में उफनाई नदी बनबसा में बाढ़ की वजह बनती है। नदी के पश्चिमी छोर के जंगलों को भी नुकसान हो रहा है।
पिछले ढाई दशकों से हुड्डनदी बनबसा के लिए खतरा बन गई है। बरसात में कलौनिया, गुलियापानी, टनकपुर, किरोड़ा से आने वाले बरसाती पानी से हुड्डीनदी उफान पर बहने लगती है। वर्षों से नदी में जमे मलबे (आरबीएम) से बरसाती पानी गांव की ओर बहने लगता है। इससे चंदनी, आनंदपुर, बमनपुरी गांव के किनारे काफी कट चुके हैं। राजस्व उपनिरीक्षक अमर सिंह मंगला ने बताया कि करीब ढाई दशकों में चंदनी, आनंदपुर, बमनपुरी गांव की करीब 40 बीघा भूमि नदी की भेंट चढ़ चुकी है। वहीं उफान में बहने वाली नदी से वनों को भी नुकसान हो रहा है। हजारों पेड़ बह, गिर चुके हैं। ग्रामीण वर्षों से हुड्डीनदी से चुगान कराने की मांग शासन प्रशासन से कर चुके हैं। पूर्वी तराई वन प्रभाग खटीमा के एसडीओ बाबू लाल ने बताया कि नदी से चुगान की अनुमति केंद्र सरकार से मिलती है, जिसके लिए राज्य सरकार को पहल करनी होगी।
बनबसा (चंपावत)। चंदनी निवासी कृषक केसर सिंह ने दस वर्षों के अथक प्रयासों से पत्थरों (बोल्डरों) को उठाकर नदी किनारे सलीके से वायरक्रेट के रूप में जमा करते आ रहे हैं। उनके इस प्रयास से गांव की ओर बहने वाली नदी का रुख बदल गया और नदी की वजह से होने वाला भूकटाव भी काफी हद तक रुक गया है। पिछले दस वर्षों से रोजाना सुबह तीन घंटे और बरसात में शाम को दो घंटे तक वह नदी से पत्थरों को नदी किनारे एकत्र कर रहे हैं।
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पिछले ढाई दशकों से हुड्डनदी बनबसा के लिए खतरा बन गई है। बरसात में कलौनिया, गुलियापानी, टनकपुर, किरोड़ा से आने वाले बरसाती पानी से हुड्डीनदी उफान पर बहने लगती है। वर्षों से नदी में जमे मलबे (आरबीएम) से बरसाती पानी गांव की ओर बहने लगता है। इससे चंदनी, आनंदपुर, बमनपुरी गांव के किनारे काफी कट चुके हैं। राजस्व उपनिरीक्षक अमर सिंह मंगला ने बताया कि करीब ढाई दशकों में चंदनी, आनंदपुर, बमनपुरी गांव की करीब 40 बीघा भूमि नदी की भेंट चढ़ चुकी है। वहीं उफान में बहने वाली नदी से वनों को भी नुकसान हो रहा है। हजारों पेड़ बह, गिर चुके हैं। ग्रामीण वर्षों से हुड्डीनदी से चुगान कराने की मांग शासन प्रशासन से कर चुके हैं। पूर्वी तराई वन प्रभाग खटीमा के एसडीओ बाबू लाल ने बताया कि नदी से चुगान की अनुमति केंद्र सरकार से मिलती है, जिसके लिए राज्य सरकार को पहल करनी होगी।
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बनबसा (चंपावत)। चंदनी निवासी कृषक केसर सिंह ने दस वर्षों के अथक प्रयासों से पत्थरों (बोल्डरों) को उठाकर नदी किनारे सलीके से वायरक्रेट के रूप में जमा करते आ रहे हैं। उनके इस प्रयास से गांव की ओर बहने वाली नदी का रुख बदल गया और नदी की वजह से होने वाला भूकटाव भी काफी हद तक रुक गया है। पिछले दस वर्षों से रोजाना सुबह तीन घंटे और बरसात में शाम को दो घंटे तक वह नदी से पत्थरों को नदी किनारे एकत्र कर रहे हैं।
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