फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Before many years Almora seat had one district only

अब चार जिले, कभी अल्मोड़ा सीट में था सिर्फ एक जिला

Sat, 23 Mar 2019 10:48 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन अमर उजाला ब्यूरो चंपावत।
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत। Published by: बृजमोहन बृजमोहन Updated Sat, 23 Mar 2019 10:48 PM IST
विज्ञापन
Before many years Almora seat had one district only
प्रतीकात्मक - फोटो : अमर उजाला

अल्मोड़ा लोकसभा सीट में अब चार जिले हैं लेकिन वर्षों पूर्व इस सीट में इकलौता अल्मोड़ा जिला शामिल था। उसी जिले के नाम पर लोकसभा सीट का नाम भी था। वहीं दो जिलों को बनाने वाली बहुजन समाज पार्टी के लिए अल्मोड़ा संसदीय सीट फायदेमंद नहीं रही। यहां उसकी कमजोर ताकत के लिए जिले का निर्माण भी कामयाबी की सीढ़ी नहीं बन सका।

विज्ञापन


अल्मोड़ा लोकसभा सीट में अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चंपावत जिले शामिल हैं लेकिन 1952 और 1957 के चुनाव में इस सीट के अंतर्गत मात्र एक अल्मोड़ा जिला शामिल था। फरवरी 1962 में पिथौरागढ़ जिला बना। इसके 35 वर्ष बाद सितंबर 1997 में पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर से काटकर चंपावत और अल्मोड़ा से अलग कर बागेश्वर जिले को बनाया गया था।
विज्ञापन


उत्तर प्रदेश के दौर में बसपा सरकार की मुखिया मायावती ने इन जिलों को निर्माण किया था। जिला बनने के बाद यहां की जमीन की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई। साथ ही कारोबारी गतिविधियां में भी इजाफा हुआ। सरकारी कार्यालय भी खूब खुले लेकिन बसपा को राजनीतिक रूप से इन जिलों का लाभ नहीं मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन



13 चुनाव में महज एक बार बच सकी जमानत
जिला बनने के बाद हुए पांच लोकसभा (1998, 1999, 2004, 2009 और 2014) और चार विधानसभा (2002, 2007, 2012 और 2017) चुनाव में बसपा को न केवल करारी शिकस्त खानी पड़ी बल्कि एक बार को छोड़ कभी जमानत भी नहीं बच सकी। 2002 के विधानसभा चुनाव में चंपावत सीट से 2501, 2007 में 3120, 2012 में 6438 वोट और 2017 में 928 वोट मिले थे। लोहाघाट सीट पर भी 2002 में बसपा को 3432, 2007 में 3120, 2012 में 2178 और 2017 के चुनाव में 713 वोट मिले। 2012 में चंपावत सीट को छोड़कर अन्य बार पार्टी की जमानत तक नहीं बच सकी। इसी तरह जिला बनने के बाद हुए पांचों लोकसभा चुनाव में बसपा फिसड्डी रही। हर बार उसके प्रत्याशियों को जमानत तक गंवानी पड़ी।


बहुजन समाज पार्टी ने चंपावत और बागेश्वर जिले बनाए लेकिन उसे इसका लाभ नहीं मिल सका। पार्टी संगठन को ताकतवर बनाने के साथ प्रभावी रूप से पार्टी की नीतियां लोगों तक नहीं पहुंच पाई। दिनेश चौड़ाकोटी, जिलाध्यक्ष, बसपा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed