फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Barriers to the process of learning being removed from extra classes

अमर उजाला अभियान: अतिरिक्त कक्षाओं से हटा रहे सीखाने की प्रक्रिया के अवरोधक

Wed, 23 Mar 2022 12:04 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत Published by: हल्द्वानी ब्यूरो Updated Wed, 23 Mar 2022 12:04 AM IST
सार

चंपावत जिले में ऑनलाइन पढ़ाई में छात्रों के मुकाबले छात्राओं की उपस्थिति सात प्रतिशत कम रही लेकिन ऑफलाइन पढ़ाई में उनकी उपस्थिति पांच प्रतिशत ज्यादा है। अभिभावक मोबाइल फोन न होने को इसकी वजह बताते हैं।

विज्ञापन
Barriers to the process of learning being removed from extra classes
चंपावत के स्कूल में पढ़ते नन्हें विद्यार्थी। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : CHAMPAWAT

विस्तार

कोरोना संक्रमण ने मार्च 2020 से छात्र-छात्राओं के सीखने की प्रक्रिया पर लंबा विराम लगाया है। स्कूल बंद होने से ज्यादातर समय ऑनलाइन शिक्षण हुआ लेकिन इस ऑनलाइन पढ़ाई में भी मोबाइल नेटवर्क की कमी, फोन न होने सहित कई कारणों से उपस्थिति 45.82 प्रतिशत (15367 छात्र-छात्राओं में से 6981) से भी कम रही।

विज्ञापन


हालांकि अब स्कूल खुलने के बाद छात्र-छात्राओं की संख्या में वृृद्धि हो रही है। इस वक्त करीब 83 प्रतिशत छात्र-छात्राओं की उपस्थिति है। प्रभारी सीईओ भानु प्रताप सिंह का कहना है कि जिले में एक भी ड्राप आउट नहीं है। कोरोना काल में पढ़ाई पर पड़े असर की भरपाई अतिरिक्त कक्षाओं के जरिये की जा रही है।

विज्ञापन

चंपावत जिले में ऑनलाइन पढ़ाई में छात्रों के मुकाबले छात्राओं की उपस्थिति सात प्रतिशत कम रही लेकिन ऑफलाइन पढ़ाई में उनकी उपस्थिति पांच प्रतिशत ज्यादा है। अभिभावक मोबाइल फोन न होने को इसकी वजह बताते हैं। साथ ही स्कूलों में छात्राओं की अधिक उपस्थिति को पढ़ाई में उनकी अधिक दिलचस्पी लेने को बताया गया है।

कई अभिभावकों का कहना है कि छात्राओं ने ऑनलाइन पढ़ाई से दूरी की भरपाई खुद और परिवार के बड़े सदस्यों द्वारा की गई पढ़ाई से की। चंपावत के उदयन इंटरनेशनल स्कूल के प्रधानाचार्य विपिन पांडे बताते हैं कि कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई कराने के बावजूद विद्यार्थियों को समझाने में दिक्कतें आईं। इस प्रक्रिया में लगातार सुधार किया गया। कई बच्चों को पिछले साल के कई टॉपिक पढ़ाए गए। इसके अलावा रविवार सहित कई अवकाश रद्द किए गए।

जीजीआईसी की प्रधानाचार्या निधि सक्सेना का कहना है कि कोरोना काल में छात्राओं की पढ़ाई की भरपाई अतिरिक्त कक्षाएं चलाकर कराने का प्रयास किया जा रहा है। सेवानिवृत्त पीएमएस डॉ. आरके जोशी का कहना है कि एक साथ पढ़ने-खेलने की प्रक्रिया में आई बाधा से याददाश्त पर भी असर पड़ता है। छोटी कक्षा के कई बच्चों के साथ पढ़ाया हुआ याद न रहने की भी दिक्कत आई।

ऑनलाइन पढ़ाई से दूर के गांवों की शिक्षकों ने मदद की

चंपावत। कोरोना काल में कुछ शिक्षकों ने विद्यार्थियों को पढ़ाने और सिखाने में मदद की। दिल्ली में कोचिंग कराने वाले शिक्षक दिनेश जोशी ने अपने स्तर से चंपावत जिले के 400 से ज्यादा बच्चों को ऑनलाइन शिक्षण कराया। इनमेें से ज्यादातर वे हिस्से थे, जहां मोबाइल नेटवर्क की दिक्कत थी। ऐसी जगहों में शिक्षक जोशी ने सप्ताह के पांच दिन तीन-चार घंटे व्हाट्सएप पर वीडियो भेजकर ऑफलाइन शिक्षण कराया। जोशी बताते हैं कि उन्हें ये विचार अपने गांव तल्लादेश में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने पर आया। इसके अलावा भिंगराड़ा सहित कुछ जगह कोरोना काल में बच्चों को एक जगह एकत्र कर सामाजिक दूरी का पालन करते हुए भी पढ़ाई कराई गई।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed