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जल संरक्षण का नमूना है बालेश्वर नौला

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 21 Mar 2021 11:20 PM IST
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Baleshwar Naula is a sample of water conservation
स्वच्छता के मद्देनजर चंपावत के बालेश्वर नौले में सामान्य समय में ताला लगाया जाता है। - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। गर्मी और जल स्तर के रसातल पर पहुंचने के बावजूद यहां बालेश्वर का नौला लबालब भरा रहता है। नौले से लोगों को भरपूर पानी मिल रहा है। नौले का उपयोग करने से पहले हर रोज नौले से 100 मीटर दूर बालेश्वर मंदिर में जलाभिषेक किया जाता है।
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चंद राजा थोर चंद द्वारा 1272 में निर्मित बालेश्वर नौला इतिहास की धरोहर तो है ही, साथ ही लोगों की प्यास बुझाने में भी इसका अहम रोल है। भीषण गर्मी में भी इसमें भरपूर पानी रहता है। करीब चार फीट गहराई वाले इस नौले में जल संवर्द्धन और गंदगी से बचाव को तमाम उपाय उठाए गए हैं। पानी निकालने के लिए एक विशेष बाल्टी है। इससे दूसरे बर्तनों में पानी भरा जाता है। जल वितरण से पहले हर रोज नौले के जल से बालेश्वर में जलाभिषेक किया जाता है।
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बालेश्वर मंदिर के पुजारी पवन गिरि बताते हैं कि बालेश्वर नौले के संरक्षण की पहल करीब तीन दशक पहले की गई थी। नौले के भीतर से सीधे पानी नहीं निकाला जाता है, बल्कि नौले की बाल्टी से दूसरे बर्तनों में पानी डाला जाता है। जलाभिषेक के बाद सुबह डेढ़ घंटे और शाम दो घंटे तक पानी निकाला जाता है। सरकारी स्तर पर नौलों का सौंदर्यीकरण तो खूब हुआ, लेकिन नौलों से लगातार पानी मिल सके, ऐसे उपाय खास नहीं किए गए। जल पोषक बांज और उतीस के पौधों को लगाने में भी सरकारी दिलचस्पी कम ही रही।
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जल संरक्षण नहीं होने का खामियाजा भुगत रहे शहर
चंपावत। जल संरक्षण के खास उपाय नहीं करने का खामियाजा चंपावत जिला भुगत रहा है। मार्च में ही पेयजल का भरपूर संकट है। जिले के नगरीय क्षेत्रों को 109.90 लाख लीटर रोजाना के पानी की मांग के सापेक्ष आपूर्ति बमुश्किल 36.80 लाख लीटर ही हो रही है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति थोड़ी बेहतर है। यहां 68.77 लाख लीटर के सापेक्ष 41.59 लाख लीटर मिल रहा है। जल संस्थान के ईई विलाल युनूस का कहना है कि छीड़ापानी, ललुवापानी, रौखेत, च्यूराखर्क, चौड़ादेव, दियारखोला, सौड़ाखोला, थूम, थैण, दुधारी और सिमाल स्रोत में 55 प्रतिशत तक गिरावट आई है। ऐसे में ज्यादातर लोग जिले में लगे 770 हैंडपंपों के अलावा नौलों और गधेरों से पानी पीने को मजबूर हैं। इसके लिए लोगों को लंबी दौड़ लगानी पड़ रही है। नागरिकों का कहना है कि पेयजल स्रोतों का संवद्र्धन करने वाली ग्राम पंचायतों और सामाजिक संगठन को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कृत करने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
पानी की कमी से पाटी में नहीं हो पा रहे हैं गर्भवती महिलाओं के प्रसव
चंपावत/पाटी। चंपावत जिला अस्पताल और पाटी के अस्पताल में मार्च के शुरू से ही पेयजल संकट गहरा गया है। पेयजल स्रोत का जल स्तर बेहद कम होने से यहां पेयजल लाइन से पानी नहीं मिल पा रहा है। अलबत्ता जल संस्थान वैकल्पिक उपाय करते हुए टैंकरों से पानी की आपूर्ति कर रहा है।
पानी की आपूर्ति प्रभावित होने से साफ-सफाई प्रभावित होने से लेकर मरीजों और तीमारदारों के साथ ही अस्पताल स्टाफ को परेशानी हो रही है। पीएमएस डॉ. आरके जोशी का कहना है कि अस्पताल के नलों में पानी नहीं आ रहा है। अस्पताल में हर दिन चार हजार लीटर पानी की खपत होती है। इससे आंशिक रूप से व्यवस्था प्रभावित हुई है। अलबत्ता जल संस्थान हर रोज दो टैंकर पेयजल आपूर्ति की जा रही है।

वहीं पाटी अस्पताल में पेयजल किल्लत का असर अस्पताल की व्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. आभाष सिंह ने बताया कि पेयजल नहीं होने से अस्पताल में प्रसव कराना संभव नहीं हैं। इसके चलते गर्भवती महिलाओं को लोहाघाट अस्पताल रेफर किया जा रहा है। बताया कि एक प्रसव में 300 लीटर पानी की आवश्यकता होती हैं, साथ ही दिनभर में अस्पताल में लगभग 1000 से 1200 लीटर पानी की जरूरत होती है।
चंपावत जिले में पेयजल की प्रमुख मांग
स्थान मांग (लाख लीटर में) पूर्ति
चंपावत नगर 23.60 5.00
लोहाघाट नगर 20.70 7.20
टनकपुर नगर 49.10 19.40
बनबसा नगर 16.50 5.20
कुल योग 70.89 36.80
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