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परंपरा और रोमांच से भरपूर रही बगवाल

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 12 Aug 2022 11:12 PM IST
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Bagwal was full of tradition and adventure
वाराही धाम में बगवाल मेले से पूर्व मंदिर की परिक्रमा करती चम्याल खाम। - फोटो : TANAKPUR
पाटी/देवीधुरा (चंपावत)। देवीधुरा के खोलीखांण दुबचौड़ा मैदान में कोरोना काल के दो साल बाद नजारा बदला हुआ था। आषाढ़ी कौतिकी (रक्षाबंधन) के दिन शुक्रवार को बगवाल (फल-फूलों से होने वाला युद्ध) पूरी रौ में थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अलावा 50 हजार से अधिक लोगों की मौजूदगी में चारों खामों (गहड़वाल, चम्याल, वालिग, लमगड़िया खाम) और सात थोकों के बीच करीब 9 मिनट 20 सेकेंड तक रोमांचित करने वाली बगवाल खेली गई। बगवाल मुख्य रूप से नाशपाति, सेब और अन्य फल-फूलों से हुई लेकिन अंतिम क्षणों में कई जोशीले योद्धाओं ने पत्थरों की बारिश भी की।
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मां वाराही धाम मंदिर के पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ शास्त्री की शंख ध्वनि के साथ दोपहर 1:49 बजे बगवाल का श्रीगणेश हुआ। बगवाल 1:58 बजे तक चली। इस बार बगवाल 2021 की अपेक्षा एक मिनट अधिक हुई। बगवाल के दौरान तेज धूप रही। हैरतअंगेज नजारा पेश करने वाली बगवाल में 201 बगवाली वीर और 29 दर्शक चोटिल हुए। तीन लोगों को हायर सेंटर रेफर किया गया है।
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मैदान में प्रवेश करने से पहले सभी चारों खामों और सात थोकों (गहड़वाल, चम्याल, लमगड़िया, वालिग, गोरना, कटना और फुलाराकोट) के योद्धाओं ने मां व्रज वाराही का जयकारा किया। केसरिया साफा पहनकर आए पान सिंह बिष्ट के नेतृत्व में गहड़वाल खाम के योद्धाओं ने सबसे पहले मैदान में प्रवेश किया। फिर सफेद साफा पहनकर वालिग खाम के वीर बद्री सिंह बिष्ट के नेतृत्व में योद्धाओं ने माता के जयकारे के साथ प्रवेश किया। इसके बाद गंगा सिंह चम्याल के नेतृत्व में चम्याल खाम के रणबांकुरों ने गुलाबी साफा पहनकर प्रवेश किया और अंत में वीरेंद्र सिंह लमगड़िया के नेतृत्व में पीला साफा पहनकर लमगड़िया खाम ने मैदान में दस्तक दी।
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मां के जयकारे के साथ व्रज वाराही के मंदिर की परिक्रमा करने के बाद चारों खामों के योद्धा अपने-अपने मोर्चे में डट गए। संकेत मिलते ही वालिग और लमगड़िया खाम ने फल-फूल बरसाकर बगवाल का श्रीगणेश किया जबकि दूसरी तरफ से चम्याल और गहड़वाल खाम मोर्चा ले रहा था। सात मिनट तक नाशपाती, सेब और फूलों से बगवाल हुई लेकिन आखिरी दो मिनट में फल खत्म होने पर पत्थर भी बरसे।
मंदिर के पीत वस्त्रधारी पुजारी धर्मानंद ने 1.58 बजे चंवर झूलाकर बगवाल समाप्त होने का संकेत किया। बगवाल पर विराम लगने के बाद चारों खामों के योद्धाओं ने गले मिलकर कुशलक्षेम पूछी। सकुशल वापसी के लिए सभी वीरों ने मां के सम्मुख शीश नवाया। इस दौरान 201 बगवाली वीर और 29 दर्शक घायल हुए। स्वास्थ्य शिविर में टनकपुर के अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉ. वीके जोशी के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इलाज किया। तीन लोगों को सिर पर अधिक चोट लगने से हल्द्वानी रेफर किया गया।
लमगड़िया खाम के साथ मंदिर कमेटी के मुख्य संरक्षक लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, खीम सिंह लमगड़िया, अजय सिंह लमगड़िया, तारा सिंह, उमेद सिंह, किशन सिंह, लाल सिंह, दीवान सिंह, वालिग खाम की ओर से मदन सिंह, शेर सिंह, गोपाल सिंह, राजू बिष्ट, चेतन भैय्या, चम्याल खाम में लाल सिंह चम्याल, बिशन सिंह, विनोद चम्याल, जगदीश सिंग्वाल, गौरव सिंग्वाल और गहड़वाल खाम की ओर से जोध सिंह बिष्ट, डूंगर सिंह बिष्ट, मोहन बिष्ट, दिनेश चम्याल, बद्री सिंह बिष्ट, खुशाल सिंह, माधो सिंह, गोपाल बिष्ट, लाल सिंह, पान सिंह आदि प्रमुख योद्धा थे।
बगवाल में करीब एक हजार लोगों ने शिरकत की। बगवाल देखने को मैदान ही नहीं दर्शक दीर्घा और आसपास के मकानों की छतें भी खचाखच भरी थी। बगवाल शुरू होने से पहले पंडित कीर्ति बल्लभ शास्त्री और डॉ.भुवन चंद्र जोशी ने मां वाराही देवी की पूजा-अर्चना की। पूजा में चारों खामों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

ये लोग मौजूद रहे
सांसद अजय टम्टा, पूर्व सांसद महेंद्र सिंह पाल, उत्तराखंड वन विकास निगम के अध्यक्ष कैलाश गहतोड़ी, विधायक खुशाल सिंह अधिकारी, राम सिंह कैड़ा, जिला पंचायत अध्यक्ष ज्योति राय, ब्लॉक प्रमुख सुमनलता, नरेंद्र सिंह लडवाल, चेतन चम्याल, सतीश पांडेय, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा, पूर्व दर्जा मंत्री हयात सिंह मेहरा, बाराकोट की प्रमुख विनीता फर्त्याल, चंपावत की प्रमुख रेखा देवी, प्रधान संगठन के प्रदेश महामंत्री राजू बिष्ट, मोहन सिंग्वाल, गौरव सिंग्वाल, ईश्वर सिंह बिष्ट, प्रकाश मेहरा, गिरीश सिंग्वाल, विजय सिंग्वाल, नवीन मेलकानी, पुष्कर भट्ट, अमित लमगड़िया, जितेंद्र सिंग्वाल, मंडलायुक्त दीपक रावत, एसपी देवेंद्र पींचा, मेलाधिकारी भगवत पाटनी, मेला मजिस्ट्रेट मनीष बिष्ट, सीओ बीसी पंत।
बगवाल मेला घंटे-दर-घंटे
5.00 बजे : पूजा-अर्चना शुरू हुई।
9:15 बजे : पूजा-अर्चना पूरी हुई।
11:45 बजे : खामों की फर्रों के साथ परिक्रमा शुरू हुई।
12:20 बजे : सबसे पहले केसरिया साफा पहने गहड़वाल खाम खोलीखांण दुबचौड़ा मैदान में पहुंचा।
12:35 बजे : सफेद साफ पहनकर वालिग खाम के वीरों ने माता के जयकारे के साथ प्रवेश किया।
12:58 बजे : गुलाबी साफा पहने चम्याल खाम के रणबांकुरों ने मैदान में प्रवेश करने के बाद मंदिर की परिक्रमा की।
1:28 बजे : पीले साफ के साथ लमगड़िया खाम ने मां वाराही के जयकारों के साथ मैदान में प्रवेश किया।
1:49 बजे : पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी ने शंखनाद के साथ बगवाल शुरू की।
1.58 बजे : मुख्य पुजारी धर्मानंद ने चंवर झूलाकर बगवाल समाप्त करने का संकेत दिया।
वर्ष बगवाल का समय चोटिल
2014 14 मिनट 150 योद्धा और 30 दर्शक
2015 10 मिनट 124 योद्धा और 25 दर्शक
2016 7 मिनट 59 योद्धा और 11 दर्शक
2017 8 मिनट 11 योद्धा और 323 दर्शक
2018 8 मिनट 112 योद्धा और 129 दर्शक
2019 9 मिनट 98 योद्धा और 24 दर्शक
2020 5 मिनट 3 योद्धा
2021 8 मिनट 75 योद्धा और 2 दर्शक
2022 9 मिनट 201 योद्धा और 29 दर्शक
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