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बर्ड फ्लू से दूर लेकिन दहशत कम नहीं
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चंपावत। उत्तराखंड भले ही बर्ड फ्लू से दूर है, लेकिन देश के चार राज्यों में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने से मुर्गीपालन के क्षेत्र में काम कर रहे लोग दहशत में हैं। अलबत्ता इससे पहाड़ में मुर्गी के कारोबार में छिटपुट कमी आई है। वहीं पशुपालन विभाग ने भी एहतियातन निगरानी टीमों का गठन किया है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बीएस जंगपांगी का कहना है कि जिले में बर्ड फ्लू का कोई खतरा नहीं है। अलबत्ता निदेशालय के निर्देश पर एहतियातन तीन टीमें बनाई गई हैं। टनकपुर-बनबसा और चल्थी, लोहाघाट-बाराकोट और चंपावत-पाटी के लिए एक-एक टीम का गठन पशु चिकित्साधिकारियों के नेतृत्व में कि या गया है। विभाग निगरानी और नियंत्रण पर जोर दे रहा है। किसी भी क्षेत्र में बड़ी संख्या में मुर्गियों की अस्वाभाविक मौत होने की सूरत में मौत की वजह का पता लगाया जाएगा।
कोविड के बाद बर्ड फ्लू से पड़ रही है मुर्गीपालन पर मार
चंपावत जिले में मुर्गीपालन खासा लोकप्रिय रहा है। लेकिन इस बार कोविड के चलते मार्च 2020 से इस व्यवसाय को झटका लगा है। पहले लॉकडाउन से मुर्गी आहार मिलने में दिक्कत हुई, फिर बाजार में मांग ठंडी रही। और अब बर्ड फ्लू की दहशत से खरीदार भी कम हो रहे हैं। चंपावत जिले में हर दिन करीब आठ क्विंटल मुर्गी के मीट की मांग है। मीट कारोबारियों के मुताबिक इन दिनों मांग में 30 प्रतिशत गिरावट आ गई है। इसके बजाय बकरे की मीट की मांग बढ़ी है।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बीएस जंगपांगी का कहना है कि जिले में बर्ड फ्लू का कोई खतरा नहीं है। अलबत्ता निदेशालय के निर्देश पर एहतियातन तीन टीमें बनाई गई हैं। टनकपुर-बनबसा और चल्थी, लोहाघाट-बाराकोट और चंपावत-पाटी के लिए एक-एक टीम का गठन पशु चिकित्साधिकारियों के नेतृत्व में कि या गया है। विभाग निगरानी और नियंत्रण पर जोर दे रहा है। किसी भी क्षेत्र में बड़ी संख्या में मुर्गियों की अस्वाभाविक मौत होने की सूरत में मौत की वजह का पता लगाया जाएगा।
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कोविड के बाद बर्ड फ्लू से पड़ रही है मुर्गीपालन पर मार
चंपावत जिले में मुर्गीपालन खासा लोकप्रिय रहा है। लेकिन इस बार कोविड के चलते मार्च 2020 से इस व्यवसाय को झटका लगा है। पहले लॉकडाउन से मुर्गी आहार मिलने में दिक्कत हुई, फिर बाजार में मांग ठंडी रही। और अब बर्ड फ्लू की दहशत से खरीदार भी कम हो रहे हैं। चंपावत जिले में हर दिन करीब आठ क्विंटल मुर्गी के मीट की मांग है। मीट कारोबारियों के मुताबिक इन दिनों मांग में 30 प्रतिशत गिरावट आ गई है। इसके बजाय बकरे की मीट की मांग बढ़ी है।
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