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अंशु ने जुटाए सात सौ से अधिक दुर्लभ सिक्के
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
Updated Mon, 16 Nov 2015 11:29 PM IST
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आज के युवा जहां दिशा से भटक रहे हैं। वहीं कुछ ऐसे युवा हैं, जिनका अपना अलग ही शौक है। डीएवी की 12वीं कक्षा के छात्र और नगर के प्रतिष्ठित व्यवसायी हरीश ओली के पुत्र दिव्यांशु उर्फ अंशु ओली को दुर्लभ सिक्कों के संग्रह का अनोखा और जुनूनी शौक है।
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इन्होंने अपने पास करीब सात सौ दुर्लभ सिक्कों का संग्रह किया है। अंशु के पास मुगलकालीन, सन 1880 समेत भारत का सौ रुपये का सिक्का, देश की आजादी की 25वीं वर्षगांठ पर जारी चांदी का सिक्का भी है।
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विदेशी मुद्रा में यूके, यूएस, अफ्रीका, कनाडा, आस्ट्रिया, फिलीपींस, हांगकांग, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, चीन, नाइजीरिया, जापान, रूस, भूटान, फ्रांस देशों के सिक्के, करेंसी हैं।
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अंशु को यह शौक छह वर्ष पहले अपने दादा स्व. चेतराम ओली की प्रेरणा से पैदा हुआ। उसकी मम्मी ज्योति ओली, चाचा दीपक ओली, मौसी गीता ओली इस शौक को पूरा करने में मदद कर रहे हैं।
अंशु अपने सिक्कों शौक के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। इन्होंने अपने सिक्कों की वैल्यू आंकने के लिए जब ओएलएक्स की वेबसाइट पर डाला तो इन्हें मुगलकालीन सिक्के के 70 हजार, सौ रुपये के डॉलर के 25 हजार रुपये देने के ऑफर मिलने लगे, लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया। अंशु का इरादा अपना नाम लिम्का और गिनीज बुक में दर्ज कराने का है।