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रोडवेज की केंद्रीय कार्यशाला की घोषणा खारिज
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टनकपुर रोडवेज की कार्यशाला। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। रोडवेज की केंद्रीय कार्यशाला चंपावत के लिए सपना बन गया। मुख्यमंत्री रहते त्रिवेंद्र सिंह रावत ने केंद्रीय कार्यशाला की घोषणा की थी जिसे बाद में खारिज कर दिया गया। अब ये घोषणा पूरी तरह विलोपित कर दी गई है।
उत्तर प्रदेश के दौर का परिवहन निगम का टनकपुर का क्षेत्रीय कार्यालय 16 क्षेत्रीय कार्यालयों में से एक है लेकिन राज्य बनने के 22 साल बाद भी इसमें खास सुधार नहीं हो सका है। इस कार्यशाला से संबद्ध तीन (टनकपुर, लोहाघाट और पिथौरागढ़) डिपो के जरिये 185 से अधिक बस सेवाएं पांच हजार से अधिक मुसाफिरों को रोजाना मंजिल तक पहुंचाती हैं। कार्यशाला के लिए जिले के प्रवेशद्वार टनकपुर में पर्याप्त सरकारी जमीन होने के साथ ही बेहतर आधारभूत ढांचा भी है। इसी कारण टनकपुर में क्षेत्रीय कार्यशाला को उत्तराखंड रोडवेज की केंद्रीय कार्यशाला में बदलने की मांग उठती रही है।
बता दें कि पिछले डेढ़ दशक में कई मंत्रियों ने इसके सुधार के एलान किए। यहां तक कि मुख्यमंत्री भी इसमें पीछे नहीं रहे। 18 जुलाई 2017 को मुख्यमंत्री रहते त्रिवेंद्र सिंह रावत ने टनकपुर कार्यशाला को रोडवेज की केंद्रीय कार्यशाला में परिवर्तित करने की घोषणा की थी लेकिन पांच साल से अधिक समय बीतने के बावजूद इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ। उल्टा पिछले साल इस घोषणा को ही खारिज कर दिया गया। लोगों का कहना है कि केंद्रीय कार्यशाला बनने से बसों का निर्माण तो होता ही स्थानीय लोगों के लिए प्रत्यक्ष और परोक्ष रोजगार की संभावना भी बढ़ती।
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तैयार बसें मिलने से केंद्रीय कार्यशाला अधर में
चंपावत। उत्तराखंड परिवहन निगम के टनकपुर में केंद्रीय कार्यशाला नहीं बनाने के पीछे पूरी तरह से तैयार बसों का सीधे कंपनी से मिलना भी बताया जा रहा है। रोडवेज के एजीएम केएस राणा का कहना है कि अब कंपनियां पूरी तरह से तैयार बसें दे रही हैं जबकि पहले केंद्रीय कार्यशाला में बसों का चेसिस मिलता था। बसों की बॉडी को केंद्रीय कार्यशाला में बनाया जाता था। संवाद
उत्तराखंड रोडवेज की टनकपुर में केंद्रीय कार्यशाला की घोषणा विलोपित की जा चुकी है। इस घोषणा को परिवहन निगम की आख्या के आधार पर पिछले साल शासन विलोपित कर चुका है।
-हिमांशु कफल्टिया, एसडीएम, टनकपुर।
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उत्तर प्रदेश के दौर का परिवहन निगम का टनकपुर का क्षेत्रीय कार्यालय 16 क्षेत्रीय कार्यालयों में से एक है लेकिन राज्य बनने के 22 साल बाद भी इसमें खास सुधार नहीं हो सका है। इस कार्यशाला से संबद्ध तीन (टनकपुर, लोहाघाट और पिथौरागढ़) डिपो के जरिये 185 से अधिक बस सेवाएं पांच हजार से अधिक मुसाफिरों को रोजाना मंजिल तक पहुंचाती हैं। कार्यशाला के लिए जिले के प्रवेशद्वार टनकपुर में पर्याप्त सरकारी जमीन होने के साथ ही बेहतर आधारभूत ढांचा भी है। इसी कारण टनकपुर में क्षेत्रीय कार्यशाला को उत्तराखंड रोडवेज की केंद्रीय कार्यशाला में बदलने की मांग उठती रही है।
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बता दें कि पिछले डेढ़ दशक में कई मंत्रियों ने इसके सुधार के एलान किए। यहां तक कि मुख्यमंत्री भी इसमें पीछे नहीं रहे। 18 जुलाई 2017 को मुख्यमंत्री रहते त्रिवेंद्र सिंह रावत ने टनकपुर कार्यशाला को रोडवेज की केंद्रीय कार्यशाला में परिवर्तित करने की घोषणा की थी लेकिन पांच साल से अधिक समय बीतने के बावजूद इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ। उल्टा पिछले साल इस घोषणा को ही खारिज कर दिया गया। लोगों का कहना है कि केंद्रीय कार्यशाला बनने से बसों का निर्माण तो होता ही स्थानीय लोगों के लिए प्रत्यक्ष और परोक्ष रोजगार की संभावना भी बढ़ती।
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तैयार बसें मिलने से केंद्रीय कार्यशाला अधर में
चंपावत। उत्तराखंड परिवहन निगम के टनकपुर में केंद्रीय कार्यशाला नहीं बनाने के पीछे पूरी तरह से तैयार बसों का सीधे कंपनी से मिलना भी बताया जा रहा है। रोडवेज के एजीएम केएस राणा का कहना है कि अब कंपनियां पूरी तरह से तैयार बसें दे रही हैं जबकि पहले केंद्रीय कार्यशाला में बसों का चेसिस मिलता था। बसों की बॉडी को केंद्रीय कार्यशाला में बनाया जाता था। संवाद
उत्तराखंड रोडवेज की टनकपुर में केंद्रीय कार्यशाला की घोषणा विलोपित की जा चुकी है। इस घोषणा को परिवहन निगम की आख्या के आधार पर पिछले साल शासन विलोपित कर चुका है।
-हिमांशु कफल्टिया, एसडीएम, टनकपुर।