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..और दो माह बाद सच में मार दी गोली!

Fri, 16 Mar 2018 10:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूराे चंपावत।
अमर उजाला ब्यूराे चंपावत। Updated Fri, 16 Mar 2018 10:52 PM IST
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.. and two months later shot really shot!
ाजेंद्र वर्मा की मौत पर चंपावत में रोते बिलखते परिजन। - फोटो : अमर उजाला
 पिथौरागढ़ जिला सहकारी बैंक की खेतीखान शाखा के परिचारक (चपरासी) राजेंद्र लाल वर्मा को दो माह पहले बैंक के सनकीगार्ड दिनेश बोहरा ने गोली मारने की धमकी दी थी। उसकी इस बात को राजेंद्र ने गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने इसकी जानकारी अपनी पत्नी गीता वर्मा को जरूर दी। रोते-रोते गीता और भतीजे गौरव वर्मा इस बात को कह रहे थे कि काश! इस धमकी की गंभीरता को समझा होता तो शायद ये दिन न देखना पड़ता। पति की जान बच गई होती। बैंक के गार्ड ने 16 मार्च को अपनी धमकी को हकीकत में बदल डाला।
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चंपावत के मल्लीहाट के रहने वाले राजेंद्र लाल शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे घर से बैंक के लिए निकले थे। उन्होंने शनिवार शाम को वापस आने की बात कही थी। वे कमरा लेकर खेतीखान में ही रहते थे लेकिन इन दिनों सीबीएसई की चल रही परीक्षा में बेटी की मदद के लिए वे अक्सर शाम को घर आ जाते थे। बेटी काजल का परीक्षा केंद्र लोहाघाट था। शाम को जब वह घर पहुंची तो उसके पांव तले जमीन खिसक गई। बीएससी कर रही बड़ी बेटी भारती व काजल के साथ मां और 78 साल की बुजुर्ग मां देवकी देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। लोहाघाट, पाटी व बनबसा में सेवा देने के बाद राजेंद्र लाल बीते चार वर्ष से खेतीखान में तैनात थे। लोग उनके अच्छे व्यवहार व सहयोगी प्रवृत्ति के मुरीद थे।
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गार्ड ने बैंक के बाहर राजेंद्र लाल वर्मा को गोली मारकर परिवार को ऐसा घाव दिया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। राजेंद्र के बड़े भाई देवीलाल वर्मा और छोटे भाई हरीश लाल वर्मा दोनों का चंपावत में स्वर्ण आभूषणों का कारोबार है। पूरा परिवार और मोहल्ले के लोग राजेंद्र की मौत से गमगीन हैं।
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इंद्रदेव ने दिया प्रबंधक को जीवनदान!
चंपावत। तेज बारिश और अंधड़ के साथ बृहस्पतिवार शाम मौसम खराब न होता तो डीसीबी की खेतीखान शाखा के प्रबंधक नरेश लाल का जीवन भी खतरे में पड़ सकता था। वह जिला सहकारी बैंक के मुख्यालय पिथौरागढ़ से वापसी में शुक्रवार सुबह बापरू पहुंचे थे कि बैंक की लोहाघाट शाखा के लिपिक ने करीब 10.45 बजे फोन कर नरेश लाल को वारदात की जानकारी दी। खबर सुनते ही उनका मोबाइल उनके हाथ से छिटक गया। साथ आ रहे चंपावत शाखा के प्रबंधक गजेंद्र राणा और बाराकोट के प्रबंधक आनंद प्रसाद ने उन्हें सहारा दिया। बैंक के दो साथियों की जिंदगी जाने के गम के साथ अपनी जीवित होने के अहसास पर उन्हें यकीन नहीं था।
शुक्रवार की सुबह बैंक के गार्ड ने बैंक के दो कर्मियों की हत्या करने के बाद गुस्से में प्रबंधक और सहकारी समिति के सचिव को निशाना बनाने की बात कही लेकिन उस वक्त बैंक में न शाखा प्रबंधक थे और नहीं समिति के सचिव। पिथौरागढ़ जिला सहकारी बैंक के महाप्रबंधक राम अवध बताते हैं कि बृहस्पतिवार को पिथौरागढ़ बैंक मुख्यालय में सभी शाखाओं के प्रबंधकों की बैठक थी। बैठक शाम करीब पांच बजे तक चली। इसके बाद ये लोग वापस आने को हुए कि अचानक मौसम बिगड़ गया। उन्हें यात्रा स्थगित करने को मजबूर होना पड़ा। इसके चलते वे शुक्रवार को करीब 11 बजे लोहाघाट पहुंच सके। इस बीच बापरू के पास उन्हें बैंक में हुए इस दोहरे हत्याकांड की जानकारी मिली।

इस बीच बैंक में हत्याकांड की भनक लगने पर प्रबंधक नरेश लाल के चंपावत मांदली स्थित आवास में अफरातफरी मच गई। आशंका के चलते परिवार के लोग इधर-उधर पूछताछ करने में जुटे। नरेश लाल के सुरक्षित होने की जानकारी मिलने पर पत्नी व परिवार की जान में जान आई। पत्नी के अलावा नरेश लाल के दो बेटे व एक बेटी है।
 
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