फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   patient was transported to the road in a dolly made of bedsheet in champawat

पीड़ा: लकड़ी पर चादर बांधकर मरीज के लिए बनाई एंबुलेंस, बीमार महिला को उबड़-खाबड़ रास्ते से ले गए ग्रामीण

Tue, 04 Mar 2025 10:38 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, चंपावत
अमर उजाला नेटवर्क, चंपावत Updated Tue, 04 Mar 2025 10:38 AM IST
सार

आजादी के 77 साल बाद भी चंपावत जिले के सीमांत मरथपला गांव तक सड़क नहीं पहुंची है। इससे मरीजों और गर्भवती महिलाओं को बेजान की तरह लाठी-डंडे में बांधकर मोटर मार्ग तक लाना और ले जाना पड़ रहा है।

विज्ञापन
patient was transported to the road in a dolly made of bedsheet in champawat
बीमार महिला को डंडे के सहारे घर ले जाते ग्रामीण। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सिस्टम की नाकामी की जरा सी बानगी देखिए। आजादी के 77 साल बाद भी चंपावत जिले के सीमांत मरथपला गांव तक सड़क नहीं पहुंची है। इससे मरीजों और गर्भवती महिलाओं को बेजान की तरह लाठी-डंडे में बांधकर मोटर मार्ग तक लाना और ले जाना पड़ रहा है।

विज्ञापन


ताजा मामला मरथपला गांव की 70 वर्षीय चंचला देवी का है। वह गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। अस्पताल से इलाज कराने के बाद मंच से गांव तक (लगभग 15 किलोमीटर) डंडे और चादर से बनाई गई डोली (एंबुलेंस) के सहारे घर लाया गया।
विज्ञापन


जिले के सीमांत क्षेत्र मंच तक ही सड़क है, जिसकी वजह से छह से लेकर 15 किलोमीटर दूर तक मरथपला गांव हो या बकोड़ा गांव के बीच निवास करने वाली 1500 से लेकर 2000 तक की आबादी परेशान है। ग्रामीण संजय सिंह, अर्जुन सिंह, रविंद्र सिंह ने बताया कि सड़क तक मरीज को ले जाने और लाने में ही पांच से छह घंटे लग जाते हैं। ग्राम पंचायत बकोड़ा के प्रशासक महेंद्र रावत ने बताया कि सड़क की गुहार लगाते-लगाते थक गए हैं अब तो इसे नियति मान लिया है। सामर्थ्यवान ताे गांव छोड़कर शहर चले गए जबकि लाचार ग्रामीण आज भी मुसीबत झेलने के लिए विवश हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


सड़क नहीं होने से बढ़ा पलायन
लोक निर्माण विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो करीब 800 से ज्यादा गांवों तक सड़क नहीं पहुंची है। कई गांवों की तरह मंच बकोड़ा सड़क का भी सर्वे कई बार हो चुका है लेकिन वर्षों से यह रोड फाइलों पर बन और बिगड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां पहले गांव में लोग खेती करते थे, आज वहां की भूमि बंजर पड़ी है। सड़क के अभाव में लोग अपनी माटी और पुरखों का घर छोड़ रहे हैं।


सीमांत तल्ला देश के मंच -बकोड़ा सड़क के लिए सर्वे हो चुका है, लेकिन वन भूमि नहीं मिलने के कारण मामला लटका है। पूर्व में सड़क निर्माण के बदले जिस भूमि का चयन किया गया था, उसे लेकर केंद्र की आपत्ति आई थी। अब नई भूमि की तलाश की जा रही है। - मोहन पलड़िया, ईई, लोनिवि, चंपावत।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed