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सोशल मीडिया में वनाग्रि की भ्रामक खबर फैलाने पर होगी कार्रवाई

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 04 Feb 2021 12:15 AM IST
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Action will be taken on spreading misleading news of Vanagni on social media
चंपावत। जिले में 15 फरवरी से शुरू होने वाले फायर सीजन को लेकर वन विभाग की तैयारियां तेज हो गई हैं। करीब चार महीनों तक चलने वाले फायर सीजन में वनों में आग लगने की घटनाएं रोकने के लिए वन विभाग की ओर से 55 क्रू स्टेशन और वाच टावरों का सहारा लिया जाएगा।
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इसके लिए अस्थायी कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। इस दफा सोशल मीडिया के अलावा अन्य माध्यमों से वनाग्नि के संबंध में भ्रामक खबर फैलाने पर संबंधित के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। डीएम एसएन पांडेय के अनुसार सोशल मीडिया पर यदि कोई व्यक्ति वनाग्नि की भ्रामक खबर फैलाता है तो उसके खिलाफ पुलिस कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके अलावा वनाग्नि के कारण होने वाली पशु और मानवीय हानि से बचने के लिए डाक्टरों की टीम तैयार रखी जाएगी। साथ ही अस्पतालों में बर्न वार्ड की स्थापना की जाएगी। ताकि किसी भी परिस्थिति से निपटा जा सके।
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सड़कों से पिरूल हटाने का कार्य शुरू
चंपावत। वन विभाग की ओर से वनों के आसपास रहने वाले लोगों को वनाग्नि रोकने में सहयोग देने के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसके अलावा विभाग की ओर से कंट्रोल वर्निंग के तहत सड़कों से चीड़ के पिरूल हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया है।(संवाद)
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कड़ाके की सर्दी के बीच अब तक जले सात हेक्टेयर जंगल
चंपावत। जिले में 2020 में 15 फरवरी से 15 जून तक तीन माह के फायर सीजन में बीते एक दशक में सबसे कम वन संपदा को नुकसान हुआ है। इसकी मुख्य वजह कोरोना के बाद हुआ लॉकडाउन माना गया। इन तीन महीनों में महज तीन हेक्टेयर जंगल दावाग्नि की भेंट चढ़े। जबकि 2019 के फायर सीजन में 161.39 हेक्टेयर जंगल का नुकसान हुआ था। बताते चलें कि 2020 के फायर सीजन सेे अधिक जंगल नवंबर 2020 से जनवरी 2021 तक जले। कड़ाके की सर्दी के बीच अब तक सात हेक्टेयर से अधिक जंगल आग की भेंट चढ़ चुके हैं। वन विभाग का कहना है कि इसमें ज्यादातर जंगल आग लगाने वाले अराजक तत्वों के चलते जले हैं।(संवाद)

कोट
जिले की सभी कार्यदायी संस्थाओं से सड़कों और पैदल मार्गों के किनारों पर पड़े चीड़ के पिरूल को समय से हटाने को कहा गया है। जिससे वनाग्नि पर अंकुश लगाया जा सके।
मयंक शेखर झा, प्रभागीय वनाधिकारी, चंपावत।
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