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दहशत ऐसी कि रातभर नहीं सोए आसपास के लोग
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बृहस्पतिवार को हुए हादसे के एक दिन बाद टनकपुर रेलवे मार्ग पर परिवर्तित रास्ता और निगरानी करता पु?
- फोटो : TANAKPUR
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टनकपुर (चंपावत)। बरेली के संजयनगर निवासी मोहित कश्यप (17) पूर्णागिरि देवी के दर्शन कर ट्रेन से बरेली जाने के लिए रेलवे स्टेशन गया था। ट्रेन निकलने के बाद मोहित बस स्टेशन जाने के लिए आ गया। इस बीच वह पाकड़ के पेड़ के नीचे फास्ट फूड वाली दुकान में रुक गया। इस दौरान पेड़ के नीचे दबकर मोहित की मौत हो गई। ये बताते हुए मोहित के मौसेरे भाई पारस कश्यप रुआंसे हो जाते हैं। कहते हैं कि वह भी दुकान के पास थे, लेकिन किस्मत से जान बच गई।
वहीं पेड़ हादसे में जान गंवाने वाले मोहम्मद उमर अपने बड़े भाई हनीफ के साथ न्यूरिया से मनिहारगोठ में अपनी बहन के घर किसी कार्यक्रम में आए थे। कार्यक्रम निपटने के बाद दोनों भाई ई-रिक्शे से बस स्टेशन जा रहे थे। इस पेड़ के नीचे आने से मोहम्मद उमर की मौत हो गई जबकि भाई हनीफ बच गए।
आंधी से नुकसान होने की पुष्टि के बाद हर मृतक के परिजनों को चार-चार लाख रुपये दिए जाएंगे। साथ ही घायलों को भी इलाज के लिए राशि दी जाएगी।
विनीत तोमर, डीएम, चंपावत
चश्मदीद की जुबानी: दहशत से रातभर नहीं सोए आसपास के लोग
टनकपुर (चंपावत)। रेलवे रोड पर गिरे पाकड़ के पेड़ के नीचे दबने से दो लोगों की मौत के बाद उस इलाके के लोग रातभर नहीं सो सके। घटना के चश्मदीद और स्थानीय निवासी उत्तम कुमार बताते हैं कि पेड़ गिरने के वक्त वह मुश्किल से 30 मीटर दूर थे। पेड़ गिरते ही मौके पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
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उत्तम कुमार बताते हैं कि पेड़ अगर सड़क की ओर न गिरकर दूसरी दिशा में जाता तो काफी मकान होने से वहां ज्यादा नुकसान होता। वह बताते हैं कि इलाके के लोगों ने पिछले साल रेलवे क्षेत्र के नजदीक पेड़ गिरने से तीन मौतों के बाद इस पाकड़ के पेड़ सहित खतरे वाले पेड़ों को कटवाने के लिए पालिका प्रशासन से गुहार लगाई थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अगर प्रशासन इसे गंभीरता से लेता तो शायद यह दिन न देखना पड़ता।
उप जिला अस्पताल में एक्सरे तक की सुविधा भी नहीं
टनकपुर (चंपावत)। उप जिला अस्पताल में तकनीशियन नहीं होने से एक्सरे तक की सुविधा नहीं है। सबसे बड़ी दिक्कत दो एंबुलेंस के लिए चालक का नहीं होना है। टनकपुर अस्पताल में तीन एंबुलेंस हैं, लेकिन इनके संचालन के लिए महज एक चालक है। ये चालक एंबुलेंस के साथ पूर्णागिरि धाम मेले में ड्यूटी पर हैं। संसाधन न होने के बावजूद अस्पताल स्टाफ ने पूरी संजीदगी से घायलों का इलाज किया।
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वहीं पेड़ हादसे में जान गंवाने वाले मोहम्मद उमर अपने बड़े भाई हनीफ के साथ न्यूरिया से मनिहारगोठ में अपनी बहन के घर किसी कार्यक्रम में आए थे। कार्यक्रम निपटने के बाद दोनों भाई ई-रिक्शे से बस स्टेशन जा रहे थे। इस पेड़ के नीचे आने से मोहम्मद उमर की मौत हो गई जबकि भाई हनीफ बच गए।
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आंधी से नुकसान होने की पुष्टि के बाद हर मृतक के परिजनों को चार-चार लाख रुपये दिए जाएंगे। साथ ही घायलों को भी इलाज के लिए राशि दी जाएगी।
विनीत तोमर, डीएम, चंपावत
चश्मदीद की जुबानी: दहशत से रातभर नहीं सोए आसपास के लोग
टनकपुर (चंपावत)। रेलवे रोड पर गिरे पाकड़ के पेड़ के नीचे दबने से दो लोगों की मौत के बाद उस इलाके के लोग रातभर नहीं सो सके। घटना के चश्मदीद और स्थानीय निवासी उत्तम कुमार बताते हैं कि पेड़ गिरने के वक्त वह मुश्किल से 30 मीटर दूर थे। पेड़ गिरते ही मौके पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
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उत्तम कुमार बताते हैं कि पेड़ अगर सड़क की ओर न गिरकर दूसरी दिशा में जाता तो काफी मकान होने से वहां ज्यादा नुकसान होता। वह बताते हैं कि इलाके के लोगों ने पिछले साल रेलवे क्षेत्र के नजदीक पेड़ गिरने से तीन मौतों के बाद इस पाकड़ के पेड़ सहित खतरे वाले पेड़ों को कटवाने के लिए पालिका प्रशासन से गुहार लगाई थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अगर प्रशासन इसे गंभीरता से लेता तो शायद यह दिन न देखना पड़ता।
उप जिला अस्पताल में एक्सरे तक की सुविधा भी नहीं
टनकपुर (चंपावत)। उप जिला अस्पताल में तकनीशियन नहीं होने से एक्सरे तक की सुविधा नहीं है। सबसे बड़ी दिक्कत दो एंबुलेंस के लिए चालक का नहीं होना है। टनकपुर अस्पताल में तीन एंबुलेंस हैं, लेकिन इनके संचालन के लिए महज एक चालक है। ये चालक एंबुलेंस के साथ पूर्णागिरि धाम मेले में ड्यूटी पर हैं। संसाधन न होने के बावजूद अस्पताल स्टाफ ने पूरी संजीदगी से घायलों का इलाज किया।