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आखिरी बार पिता का चेहरा नहीं देख पाया बेटा नंदन

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 23 Feb 2022 11:44 PM IST
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Accident in Kaknai
ककनई के कठौती में इस झोपड़ी में रहता है जीप हादसे के मृतक लक्ष्मण सिंह का परिवार। संवाद न्यूज एजे? - फोटो : TANAKPUR
ककनई (चंपावत)। जर्जर झोपड़ी में रहने वाले 60 साल के लक्ष्मण सिंह के परिवार की जिंदगी अब अधर में है। घर में खेतीबाड़ी और मजदूरी कर कमाने वाले अकेले शख्स के जीप हादसे में मौत के बाद परिवार गमगीन है। यहां तक कि राजस्थान के उदयपुर में होटल में काम करने वाला उनका इकलौता बेटा नंदन सिंह भी आखिरी बार अपने पिता का मुंह नहीं देख सका। नंदन बुधवार दोपहर बाद घर पहुंच सका।
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गरीबी का आलम यह कि उनकी क्रिया की रस्में भी उनके अपने घर में न होकर 300 मीटर दूर उनके भाई के घर में किया जा रहा है। पत्नी सहित पूरा परिवार सदमे में है। पीएम आवास योजना के लिए लक्ष्मण सिंह जिंदगी भर प्रयास करते रहे, लेकिन उन्हें आज तक इस योजना की रकम नहीं मिल सकी। रुपये नहीं मिलने से पक्का मकान बनाने का सपना भी पूरा नहीं कर सके।
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ईश्वरी की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
ककनई (चंपावत)। ककनई गांव में 40 साल के ईश्वरी सिंह भी सोमवार रात को हुई बरात की जीप हादसे के शिकार हुए। उनकी मौत से गरीब और बेरोजगार इस परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा पड़ा है। पत्नी मुन्नी देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। 15 साल का बेटा दिव्यांग है। अब परिवार को अपने इस लाडले की फिक्र है।
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