{"_id":"115-90241","slug":"Champawat-90241-115","type":"story","status":"publish","title_hn":"खत्म नहीं हुआ अंधेरा छंटने का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खत्म नहीं हुआ अंधेरा छंटने का इंतजार
Champawat
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:33 AM IST
विज्ञापन
चंपावत। ज्यादातर घरों में अब दिवाली की रात बिजली झालरों से रोशन होती है, लेकिन यहां कुछ गांव ऐसे हैं, जहां के लोगों की दिवाली माटी के दियों से ही जगमगाएगी। ये इन गांवों की मजबूरी है। बिजली के पोल, तार और ट्रांसफार्मर लगे होने के बावजूद इन इलाकों में रात को अंधेरा है।
वैला, खिरद्वारी, गंगसीर, चूका, कलढुंगा, पोथ, पुनियाल आदि गांवों में चार वर्ष पूर्व विद्युतीकरण हो चुका है, लेकिन ग्रामीणों के घरों तक बिजली की जगमगाहट अभी भी नहीं पहुंच सकी है। वैला के प्रधान केशव मौनी, नारायण दत्त, उमेश चंद्र, भीम सिंह बिजली नहीं होने से यहां के नागरिक अंधेरे में रात काटने को मजबूर हैं। स्कूली बच्चों की पढ़ाई से लेकर टीवी की दुनियां इनके लिए अनजान है। और तो और इन इलाकों में गेहूं पिसाने के लिए चक्की को लेकर भी दुश्वारी है।
अनेकाें बार बिजली के उजाले को लेकर ग्रामीण कई बार बिजली विभाग से लेकर प्रशासन तक के दरवाजे में दस्तक दे चुके हैं, लेकिन फिर भी उनका अंधेरा नहीं छंट सका है और ग्रामीणों की दिवाली इस बार भी उजाले से दूर है। वे रात को माटी के दीये और मोमबत्ती से उजाला करने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
वैला, खिरद्वारी, गंगसीर, चूका, कलढुंगा, पोथ, पुनियाल आदि गांवों में चार वर्ष पूर्व विद्युतीकरण हो चुका है, लेकिन ग्रामीणों के घरों तक बिजली की जगमगाहट अभी भी नहीं पहुंच सकी है। वैला के प्रधान केशव मौनी, नारायण दत्त, उमेश चंद्र, भीम सिंह बिजली नहीं होने से यहां के नागरिक अंधेरे में रात काटने को मजबूर हैं। स्कूली बच्चों की पढ़ाई से लेकर टीवी की दुनियां इनके लिए अनजान है। और तो और इन इलाकों में गेहूं पिसाने के लिए चक्की को लेकर भी दुश्वारी है।
विज्ञापन
अनेकाें बार बिजली के उजाले को लेकर ग्रामीण कई बार बिजली विभाग से लेकर प्रशासन तक के दरवाजे में दस्तक दे चुके हैं, लेकिन फिर भी उनका अंधेरा नहीं छंट सका है और ग्रामीणों की दिवाली इस बार भी उजाले से दूर है। वे रात को माटी के दीये और मोमबत्ती से उजाला करने को मजबूर हैं।
विज्ञापन