{"_id":"115-44083","slug":"Champawat-44083-115","type":"story","status":"publish","title_hn":"समेकित जलागम प्रबंध को 8.78 करोड़ का प्रस्ताव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
समेकित जलागम प्रबंध को 8.78 करोड़ का प्रस्ताव
Champawat
Updated Sun, 11 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंपावत। जिले में समेकित जलागम प्रबंध कार्यक्रम के चौथे चरण में कुल आठ करोड़ 78 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया है। कार्यक्रम के तहत माइक्रो वाटरशेड तैयार किए जाएंगे। डउरा, घटगाड़ और जुगरागाड़ जलागम क्षेत्रों का इसके लिए चयन किया गया है। वन विभाग को कार्यदायी संस्था बनाया गया है।
जिलाधिकारी श्रीधर बाबू अद्दांकी की अध्यक्षता में हुई बैठक में कार्यक्रम के लिए जलागम क्षेत्रों का चयन करने और कार्यदायी संस्था को तय करने पर से चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने कहा कि चौथे चरण के कामों को संपन्न कराने के लिए वन विभाग को कार्यदायी संस्था बनाया जा रहा है। प्रभागीय वनाधिकारी एके उपाध्याय नोडल अधिकारी के रूप में काम करेंगे। बैठक में तय किया गया कि कार्यक्रम में डउरा, घटगाड़ और जुगरागाड़ जलागम क्षेत्र चयनित किए जा रहे हैं। माइक्रो वाटरशेड की मदद से 5854 हेक्टेअर जमीन को आच्छादित किया जाएगा। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी जेके तिवारी, उपजिलाधिकारी प्रत्यूष सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. पीएस यादव, जिला उद्यान अधिकारी एमएस धपोला, मुख्य कृषि अधिकारी एके उपाध्याय, तकनीकी विशेषज्ञ डा. अमित कुमार सिंह समेत तमाम लोग मौजूद थे। जिलाधिकारी ने कहा कि सभी काम पारदर्शी तरीके से किए जाने चाहिए। काम में किसी प्रकार की लापरवाही होने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।
विज्ञापन
जिलाधिकारी श्रीधर बाबू अद्दांकी की अध्यक्षता में हुई बैठक में कार्यक्रम के लिए जलागम क्षेत्रों का चयन करने और कार्यदायी संस्था को तय करने पर से चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने कहा कि चौथे चरण के कामों को संपन्न कराने के लिए वन विभाग को कार्यदायी संस्था बनाया जा रहा है। प्रभागीय वनाधिकारी एके उपाध्याय नोडल अधिकारी के रूप में काम करेंगे। बैठक में तय किया गया कि कार्यक्रम में डउरा, घटगाड़ और जुगरागाड़ जलागम क्षेत्र चयनित किए जा रहे हैं। माइक्रो वाटरशेड की मदद से 5854 हेक्टेअर जमीन को आच्छादित किया जाएगा। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी जेके तिवारी, उपजिलाधिकारी प्रत्यूष सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. पीएस यादव, जिला उद्यान अधिकारी एमएस धपोला, मुख्य कृषि अधिकारी एके उपाध्याय, तकनीकी विशेषज्ञ डा. अमित कुमार सिंह समेत तमाम लोग मौजूद थे। जिलाधिकारी ने कहा कि सभी काम पारदर्शी तरीके से किए जाने चाहिए। काम में किसी प्रकार की लापरवाही होने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।
विज्ञापन