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कृषि बीमा योजना से ज्यादातर किसानों को मोह नहीं
Updated Wed, 10 Oct 2018 11:02 PM IST
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चंपावत। कृषि फसल बीमा योजना जिले के काश्तकारों को नहीं लुभा पा रही है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू होने के बावजूद मुट्ठी भर किसान ही इससे जुड़ पा रहे हैं। वजह फसल का नुकसान होने पर लाभ नहीं मिल पाना है।
जिले में 26 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती होती है। करीब 32 हजार काश्तकार खेती में लगे हैं। जिले में मुख्य रूप से धान, गेहूं, मड़ुवा, आलू, अदरक, टमाटर, सिटरस फल आदि मुख्य फसलें हैं।
इनमें से आलू, अदरक, सिटरस फल नकदी फसल हैं। जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में रबी में गेहूं और खरीफ में धान और मड़ुवा शामिल हैं, जबकि पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना में मिर्च, अदरक, आलू, टमाटर, फ्रांसबीन को शामिल किया गया है। जिले में कृषि बीमा का क्षेत्र में कवरेज बेहद मामूली है। 2018 की खरीफ फसल में 325 काश्तकारों ने 78.63 हेक्टेयर क्षेत्र का बीमा कराया है।
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इसके लिए 39312 रुपये की प्रीमियम उन्होंने चुकता की है, जबकि 2017 में 866 काश्तकारों ने धान और मड़ुवा के 100 हेक्टेयर क्षेत्रफल का बीमा कराया। वहीं रबी की फसल में 412 काश्तकारों ने 291.12 हेक्टेयर एरिया की गेहूं की फसल का बीमा कराया। इसके लिए इन किसानों ने 1.81 लाख रुपये की प्रीमियम दी।
इसी तरह पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना में मिर्च, अदरक, आलू, टमाटर, फ्रांसबीन बोने वाले 3702 काश्तकारों ने 2482.75 हेक्टेयर क्षेत्रफल का बीमा कराया। मगर बीमा पाने वालों का प्रतिशत निहायत कम है। अब तक बमुश्किल 70 काश्तकारों को ही बीमे का लाभ मिल सका है।
किसानों के लिए बीमा बेमानी है। नुकसान होने के बावजूद इसका लाभ 90 प्रतिशत से अधिक काश्तकारों को नहीं मिल पा रहा है। इसके मानकों में बदलाव जरूरी है।
नवीन करायत, जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन
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जिले में 26 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती होती है। करीब 32 हजार काश्तकार खेती में लगे हैं। जिले में मुख्य रूप से धान, गेहूं, मड़ुवा, आलू, अदरक, टमाटर, सिटरस फल आदि मुख्य फसलें हैं।
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इनमें से आलू, अदरक, सिटरस फल नकदी फसल हैं। जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में रबी में गेहूं और खरीफ में धान और मड़ुवा शामिल हैं, जबकि पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना में मिर्च, अदरक, आलू, टमाटर, फ्रांसबीन को शामिल किया गया है। जिले में कृषि बीमा का क्षेत्र में कवरेज बेहद मामूली है। 2018 की खरीफ फसल में 325 काश्तकारों ने 78.63 हेक्टेयर क्षेत्र का बीमा कराया है।
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इसके लिए 39312 रुपये की प्रीमियम उन्होंने चुकता की है, जबकि 2017 में 866 काश्तकारों ने धान और मड़ुवा के 100 हेक्टेयर क्षेत्रफल का बीमा कराया। वहीं रबी की फसल में 412 काश्तकारों ने 291.12 हेक्टेयर एरिया की गेहूं की फसल का बीमा कराया। इसके लिए इन किसानों ने 1.81 लाख रुपये की प्रीमियम दी।
इसी तरह पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना में मिर्च, अदरक, आलू, टमाटर, फ्रांसबीन बोने वाले 3702 काश्तकारों ने 2482.75 हेक्टेयर क्षेत्रफल का बीमा कराया। मगर बीमा पाने वालों का प्रतिशत निहायत कम है। अब तक बमुश्किल 70 काश्तकारों को ही बीमे का लाभ मिल सका है।
किसानों के लिए बीमा बेमानी है। नुकसान होने के बावजूद इसका लाभ 90 प्रतिशत से अधिक काश्तकारों को नहीं मिल पा रहा है। इसके मानकों में बदलाव जरूरी है।
नवीन करायत, जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन