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वेतन में कमी से भड़के ऊर्जा निगम कर्मी
Updated Thu, 21 Dec 2017 11:29 PM IST
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चंपावत। उत्तराखंड ऊर्जा निगम के कर्मचारी-अधिकारी इन दिनों सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक ही कार्य कर रहे हैं। पांच जनवरी तक ये कर्मचारी वर्क टू रूल (नियमानुसार कार्य) के तहत सात घंटे की अवधि में ही कार्य कर रहे हैं। इसकी वजह निगम कर्मियों की वेतन में कमी किया जाना है।
जिले में ऊर्जा निगम की सभी चार यूनियनें (उत्तराखंड कामगार संगठन, उत्तराखंड ऑफिसर्स सुपरवाइजर संगठन, उत्तराखंड पावर जूनियर इंजीनियर्स संगठन और उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स संगठन) वर्क टू रूल के तहत हड़ताल पर हैं। निगम के प्रांतीय पदाधिकारियों ने 20 नवंबर को वेतन में कटौती सहित कुछ मांगों को लेकर हड़ताल पर जाने का नोटिस दिया था। मांगें नहीं माने जाने पर पांच जनवरी से बेमियादी हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी गई है।
अधिशासी अभियंता राजेश कुमार का कहना है कि निगम कर्मियों को एश्योर्ड करिअर प्रमोशन (एसीपी) के तीन लाभ 9 वर्ष, 14 वर्ष व 19 वर्ष में मिलते थे, लेकिन अब इसे 10 वर्ष, 20 वर्ष व 30 वर्ष कर दिया गया है। वहीं अलग राज्य बनने पर उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड सरकार के बीच यह सहमति हुई थी कि राज्य के बिजली कर्मियों का वेतन यूपी के बिजली कर्मियों से कम नहीं होगा। मगर अब यहां के कर्मियों का वेतन यूपी से कम हो जाएगा। ऊर्जा कामगार संगठन के नेता सुरेश चंद्र पनेरू का कहना है कि बिजली कर्मी कम स्टाफ में ही नहीं, कठिन परिस्थितियों में भी काम करते हैं। ऐसे में वे कर्मी वर्क टू रूल के बाद भी सरकार द्वारा सुध नहीं लेने पर पांच जनवरी से हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।
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वर्क टू रूल से उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ी
वर्क टू रूल (नियमानुसार काम) का अर्थ निर्धारित सात घंटे (सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे) तक ही कार्य करना है। ईई राजेश कुमार का कहना है कि विभाग बिजली पूर्ति में खामी आने पर दिन-रात किसी भी वक्त मरम्मत के लिए कर्मियों को भेजता है। मगर वर्क टू रूल के अंतर्गत शाम पांच बजे से अगले दिन सुबह 10 बजे तक कर्मी न कोई काम करेंगे और नहीं विभागीय मोबाइल फोन खुला रखेंगे। इसके चलते दूरदराज ही नहीं, कई शहरी क्षेत्र में भी गड़बड़ी आने पर उपभोक्ताओं को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
जिले में ऊर्जा निगम की सभी चार यूनियनें (उत्तराखंड कामगार संगठन, उत्तराखंड ऑफिसर्स सुपरवाइजर संगठन, उत्तराखंड पावर जूनियर इंजीनियर्स संगठन और उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स संगठन) वर्क टू रूल के तहत हड़ताल पर हैं। निगम के प्रांतीय पदाधिकारियों ने 20 नवंबर को वेतन में कटौती सहित कुछ मांगों को लेकर हड़ताल पर जाने का नोटिस दिया था। मांगें नहीं माने जाने पर पांच जनवरी से बेमियादी हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी गई है।
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अधिशासी अभियंता राजेश कुमार का कहना है कि निगम कर्मियों को एश्योर्ड करिअर प्रमोशन (एसीपी) के तीन लाभ 9 वर्ष, 14 वर्ष व 19 वर्ष में मिलते थे, लेकिन अब इसे 10 वर्ष, 20 वर्ष व 30 वर्ष कर दिया गया है। वहीं अलग राज्य बनने पर उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड सरकार के बीच यह सहमति हुई थी कि राज्य के बिजली कर्मियों का वेतन यूपी के बिजली कर्मियों से कम नहीं होगा। मगर अब यहां के कर्मियों का वेतन यूपी से कम हो जाएगा। ऊर्जा कामगार संगठन के नेता सुरेश चंद्र पनेरू का कहना है कि बिजली कर्मी कम स्टाफ में ही नहीं, कठिन परिस्थितियों में भी काम करते हैं। ऐसे में वे कर्मी वर्क टू रूल के बाद भी सरकार द्वारा सुध नहीं लेने पर पांच जनवरी से हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।
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वर्क टू रूल से उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ी
वर्क टू रूल (नियमानुसार काम) का अर्थ निर्धारित सात घंटे (सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे) तक ही कार्य करना है। ईई राजेश कुमार का कहना है कि विभाग बिजली पूर्ति में खामी आने पर दिन-रात किसी भी वक्त मरम्मत के लिए कर्मियों को भेजता है। मगर वर्क टू रूल के अंतर्गत शाम पांच बजे से अगले दिन सुबह 10 बजे तक कर्मी न कोई काम करेंगे और नहीं विभागीय मोबाइल फोन खुला रखेंगे। इसके चलते दूरदराज ही नहीं, कई शहरी क्षेत्र में भी गड़बड़ी आने पर उपभोक्ताओं को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।