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सांसद निधि से मंजूर हुए 124 लाख रुपये के 59 कार्य
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
Updated Thu, 25 May 2017 11:02 PM IST
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अच्छे दिन के वायदे के साथ केंद्र की सत्ता पर काबिज हुई मोदी सरकार के तीन साल का कार्यकाल पूरा हो गया है। इन तीन सालों में चंपावत जिले में लोकसभा सांसद अजय टम्टा की सांसद निधि से 124 लाख रुपये के 59 कार्यों को मंजूरी मिली है। जिसमें 93.23 लाख रुपये की धनराशि अवमुक्त हो चुकी है और 18 कार्य पूर्ण होने के साथ 41 योजनाओं में कार्य प्रगति पर है।
मुख्य विकास अधिकारी हरगोविंद भट्ट ने बताया कि सांसद निधि खर्च करने के मामले में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद महेंद्र सिंह माहरा सबसे आगे रहे हैं। उन्होंने अपनी सांसद निधि से 618.60 लाख रुपये के 176 कार्य मंजूर किए हैं। जिसमें 415.80 लाख रुपये की धनराशि कार्यदायी संस्थाओं को अवमुक्त हो चुके हैं और 66 कार्य पूर्ण होने के साथ 110 योजनाओं के कार्य प्रगति पर हैं। भाजपा के पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय ने दो कार्यों के लिए दस लाख रुपये की सांसद निधि दी है।
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जिसमें 9.38 लाख रुपये अवमुक्त होने के साथ एक कार्य पूर्ण और एक कार्य प्रगति पर है। इसी प्रकार नैनीताल से लोकसभा सांसद बनने से पूर्व भाजपा के राज्यसभा सांसद रहे भगत सिंह कोश्यारी ने पांच लाख रुपये के दो कार्यों को मंजूरी दी, जो कि पूर्ण हो चुके हैं। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा सांसद निधि खर्च करने में फिसड्डी रहे हैं। उन्होंने एक कार्य के लिए 1.59 लाख रुपये की सांसद निधि मंजूर की है। मुख्य विकास अधिकारी के अनुसार तीन सालों में जिले में सांसद निधि से कुल 240 कार्य स्वीकृत हुए हैं, जिनमें 85 कार्य पूर्ण होने के साथ 155 कार्य प्रगति पर हैं। जिनके लिए स्वीकृत 607.54 लाख की धनराशि के सापेक्ष 523.76 लाख रुपये की धनराशि कार्यदायी संस्थाओं को अवमुक्त कर दी गई है।
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सांसद निधि से होता है स्थाई परिसंपत्तियों का निर्माण
चंपावत। सांसद निधि योजना वर्ष 1993-94 से शुरू की गई थी। प्रारंभ में सांसद निधि की धनराशि पांच लाख रुपए सालाना होती थी, जो साल दर साल बढ़ते हुए दो करोड़ रुपये तक कर दी गई। सांसद निधि की धनराशि वर्ष 2012-13 में यूपीए सरकार के कार्यकाल में दो करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये सालाना कर दिया गया। सांसद निधि के तहत सांसदों को अधिकार होता है कि वे अपने क्षेत्रों की जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप ऐसे कार्यों की संस्तुति कर सकें, जिनसे स्थायी सामुदायिक परिसंपत्ति का निर्माण हो सके। इसके तहत पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, साफ-सफाई और सड़क जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के कार्यों के लिए सांसद सिफारिशें कर सकते हैं।