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टपक रही छत, पन्नियों से सड़ने से बचा रहे अनाज
Updated Sun, 09 Jul 2017 11:03 PM IST
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चंपावत। चंपावत में तीन दिन में 161 मिलीमीटर बारिश हुई। इस बारिश से आए मलबे से कई मार्ग तो बंद हुए ही, यहां पूर्ति विभाग के गोदाम पर भी खतरा पैदा हो गया है। बारिश के चलते खाद्य गोदाम की छत टपकने से यहां रखे राशन को सुरक्षित रखना चुनौती बन रहा है। विभाग किसी तरह प्लास्टिक की पन्नी डालकर इसे बचाने की कवायद कर रहा है।
चंपावत के गोदाम में इस वक्त 50 किलोग्राम मात्रा के करीब 3500 कट्टे गेहूं और चावल हैं। टिन की छत के टपकने और सीलन की वजह से इस राशन को बचाना कठिन हो रहा है। छत के टपकने से गोदाम की फर्श के काफी हिस्से में पानी है। पूर्ति विभाग के निरीक्षक प्रकाश सिंह फर्त्याल का कहना है कि खाद्यान्न को बचाने के लिए प्लास्टिक की पन्नी का सहारा लिया गया है। गेहूं व चावल के ढेर के ऊपर पन्नियों को बांधा गया है। अभी मानसून सीजन का यह पहला महीना है। बारिश के दो महीने से अधिक बाकी है। ऐसे में गोदाम के अनाज को बर्बादी से बचाना बड़ी चुनौती होगी।
लटका है छत की मरम्मत का प्रस्ताव
पूर्ति विभाग के गोदाम की छत की खस्ता हालत को देखते हुए इसकी मरम्मत का प्रस्ताव भेजा गया था। पूर्ति निरीक्षक प्रकाश सिंह फर्त्याल ने बताया कि करीब ग्रामीण अभियंत्रण सेवा से तीन साल पूर्व छत का आगणन भेजा गया था। मगर 14 लाख रुपये की लागत से मरम्मत का यह प्रस्ताव अब भी ठंडे बस्ते में है।
चंपावत के गोदाम में इस वक्त 50 किलोग्राम मात्रा के करीब 3500 कट्टे गेहूं और चावल हैं। टिन की छत के टपकने और सीलन की वजह से इस राशन को बचाना कठिन हो रहा है। छत के टपकने से गोदाम की फर्श के काफी हिस्से में पानी है। पूर्ति विभाग के निरीक्षक प्रकाश सिंह फर्त्याल का कहना है कि खाद्यान्न को बचाने के लिए प्लास्टिक की पन्नी का सहारा लिया गया है। गेहूं व चावल के ढेर के ऊपर पन्नियों को बांधा गया है। अभी मानसून सीजन का यह पहला महीना है। बारिश के दो महीने से अधिक बाकी है। ऐसे में गोदाम के अनाज को बर्बादी से बचाना बड़ी चुनौती होगी।
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लटका है छत की मरम्मत का प्रस्ताव
पूर्ति विभाग के गोदाम की छत की खस्ता हालत को देखते हुए इसकी मरम्मत का प्रस्ताव भेजा गया था। पूर्ति निरीक्षक प्रकाश सिंह फर्त्याल ने बताया कि करीब ग्रामीण अभियंत्रण सेवा से तीन साल पूर्व छत का आगणन भेजा गया था। मगर 14 लाख रुपये की लागत से मरम्मत का यह प्रस्ताव अब भी ठंडे बस्ते में है।
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