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पंचेश्वर बांध परियोजना से भातर-नेपाल के सीमांत क्षेत्र में आएगी खुशहाली: अजय टम्टा
Updated Sun, 09 Jul 2017 11:11 PM IST
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टनकपुर (चंपावत)। केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा ने कहा कि पंचेश्वर बांध परियोजना से दोनों देशों में खुशहाली आएगी। इससे दोनों देशों को बिजली के अलावा सिंचाई और जल परिवहन की सुविधा मिलेगी। यह बांध बड़ा नहीं, लंबा जरूर है। जिससे किसी तरह के नुकसान की संभावना नहीं है। कांग्रेस के लोग खौफ दिखाकर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।
सिंचाई विभाग के विश्राम गृह में हुई पत्रकार वार्ता में केंद्रीय राज्य मंत्री टम्टा ने कहा कि पंचेश्वर बांध परियोजना पड़ोसी देश के साथ रोटी-बेटी के रिश्तों का प्रमाण है। जिसे लेकर दोनों देशों के प्रभावित हो रहे सीमांत क्षेत्र के लोग तो उत्साहित हैं। लेकिन कांग्रेस के लोग उन्हें बरगलाने की कोशिश में जुटे हैं। क्योंकि कांग्रेस ने 55 साल सत्ता में रहकर कभी पड़ोसी देशों का विश्वास जीतने का काम ही नहीं किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले पड़ोसी देशों की यात्रा कर पड़ोसी देशों का विश्वास जीतने का काम किया है। इसी का नतीजा है कि पांच हजार चार सौ मेगावाट बिजली उत्पादन की प्रस्तावित पंचेश्वर बांध परियोजना के लिए नेपाल ने भी भारत पर विश्वास जताया है। इस परियोजना से भारत के 151 राजस्व गांव प्रभावित हो रहे हैं, इन गांवों के लोगों के विस्थापन की केंद्र और प्रदेश सरकार ने योजना तैयार कर ली है। केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि दुनिया चौड़े और बड़े बांधों का विरोध कर रही है, लेकिन पंचेश्वर परियोजना में बनने वाला बांध चौड़ा नहीं लंबा होगा।
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करीब अस्सी किमी. लंबे इस बांध से पर्यटन के विकास के साथ ही सिंचाई की सुविधा मुहैया होगी। उन्होंने कहा कि बांध का ऐसा डिजाइन तैयार करने का सुझाव दिया गया है, जिससे जल परिवहन किया जा सके। ताकि सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को स्टीमर, नाव या अन्य जल परिवहन के संसाधनों के माध्यम से कम समय में अधिक दूरी तय की सुविधा मिल पाए। टम्टा ने कहा कि परियोजना की डीपीआर तैयार हो चुकी है, जिस पर दोनों देशों के बीच उच्च स्तर में मंथन चल रहा है।
2015 की तत्कालीन सरकार के प्रस्ताव पर हुई है सहमति
टनकपुर (चंपावत)। उत्तर प्रदेश के साथ परिसंपत्ति बंटवारे पर केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा ने कहा कि यूपी और उत्तराखंड बड़े व छोटे भाई की तरह हैं। संपत्ति बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच किसी तरह का मतभेद नहीं पनपने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 2015 में तत्कालीन सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश से मांगी गई संपत्ति के प्रस्ताव पर यूपी ने बनबसा स्थित सिंचाई विभाग की 90 प्रतिशत संपत्ति उत्तराखंड को देने पर सहमति जताई है। राज्य में स्थित अन्य संपत्तियों को लेकर कोई विरोधाभास है तो उसे भी शीघ्र दूर कराया जाएगा।
सिंचाई विभाग के विश्राम गृह में हुई पत्रकार वार्ता में केंद्रीय राज्य मंत्री टम्टा ने कहा कि पंचेश्वर बांध परियोजना पड़ोसी देश के साथ रोटी-बेटी के रिश्तों का प्रमाण है। जिसे लेकर दोनों देशों के प्रभावित हो रहे सीमांत क्षेत्र के लोग तो उत्साहित हैं। लेकिन कांग्रेस के लोग उन्हें बरगलाने की कोशिश में जुटे हैं। क्योंकि कांग्रेस ने 55 साल सत्ता में रहकर कभी पड़ोसी देशों का विश्वास जीतने का काम ही नहीं किया।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले पड़ोसी देशों की यात्रा कर पड़ोसी देशों का विश्वास जीतने का काम किया है। इसी का नतीजा है कि पांच हजार चार सौ मेगावाट बिजली उत्पादन की प्रस्तावित पंचेश्वर बांध परियोजना के लिए नेपाल ने भी भारत पर विश्वास जताया है। इस परियोजना से भारत के 151 राजस्व गांव प्रभावित हो रहे हैं, इन गांवों के लोगों के विस्थापन की केंद्र और प्रदेश सरकार ने योजना तैयार कर ली है। केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि दुनिया चौड़े और बड़े बांधों का विरोध कर रही है, लेकिन पंचेश्वर परियोजना में बनने वाला बांध चौड़ा नहीं लंबा होगा।
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करीब अस्सी किमी. लंबे इस बांध से पर्यटन के विकास के साथ ही सिंचाई की सुविधा मुहैया होगी। उन्होंने कहा कि बांध का ऐसा डिजाइन तैयार करने का सुझाव दिया गया है, जिससे जल परिवहन किया जा सके। ताकि सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को स्टीमर, नाव या अन्य जल परिवहन के संसाधनों के माध्यम से कम समय में अधिक दूरी तय की सुविधा मिल पाए। टम्टा ने कहा कि परियोजना की डीपीआर तैयार हो चुकी है, जिस पर दोनों देशों के बीच उच्च स्तर में मंथन चल रहा है।
2015 की तत्कालीन सरकार के प्रस्ताव पर हुई है सहमति
टनकपुर (चंपावत)। उत्तर प्रदेश के साथ परिसंपत्ति बंटवारे पर केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा ने कहा कि यूपी और उत्तराखंड बड़े व छोटे भाई की तरह हैं। संपत्ति बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच किसी तरह का मतभेद नहीं पनपने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 2015 में तत्कालीन सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश से मांगी गई संपत्ति के प्रस्ताव पर यूपी ने बनबसा स्थित सिंचाई विभाग की 90 प्रतिशत संपत्ति उत्तराखंड को देने पर सहमति जताई है। राज्य में स्थित अन्य संपत्तियों को लेकर कोई विरोधाभास है तो उसे भी शीघ्र दूर कराया जाएगा।