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चंपावत जिले के 43 हैंडपंप उखाड़े

Fri, 20 Apr 2018 10:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूराे चंपावत।
अमर उजाला ब्यूराे चंपावत। Updated Fri, 20 Apr 2018 10:51 PM IST
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43 handpumps in Champawat district
बारहमासी सड़क से जमींदोज हुआ धुरा का हैंडपंप। - फोटो : अमर उजाला

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 बारहमासी सड़क कटिंग के चलते  टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के किनारे बने तमाम हैंडपंपों को उख्ााड़ दिया गया है। सड़क के विस्तारीकरण के चलते यह स्थति आई है। इस वजह से यहां चार हजार से अधिक लोग पेयजल संकट का सामना करने को मजबूर हैं।  

इन दिनों यहां टनकपुर से पिथौरागढ़ तक के 150 किलोमीटर हिस्से में बारहमासी सड़क को 12 मीटर से अधिक चौड़ा किया जा रहा है। इस वजह से सड़क के आड़े आने वाले हैंडपंपों को उखाड़ दिया गया है। इसके चलते जिले में लगे 767 हैंडपंपों में से 43 हैंडपंप जमींदोज हो चुके हैं। जल संस्थान के चंपावत डिवीजन के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार का कहना है कि बारहमासी सड़क की कटिंग से बस्टिया, धुरा, बृजनगर, सिन्याड़ी, चल्थी, स्वांला, धौन, चंपावत, खूना, लोहाघाट, बापरू सहित एनएच के किनारे लगे हैंडपंप प्रभावित हुए हैं।  
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पानी को भटक रहे हैं ग्रामीण  
एनएच के किनारे कई जगह पेयजल लाइन नहीं होने के चलते हैडंपप लोगों के लिए इकलौता सहारा थे। मगर अब इनको हटा दिए जाने से आम ग्रामीणों ओर मार्ग के किनारे बनी ज्यादातर दुकानों के संचालकों की परेशानी बढ़ गई है। ग्रामीण महेश चौड़ाकोटी, संजय चौड़ाकोटी, प्रकाश जोशी, महेश, जगदीश चौड़ाकोटी, नवीन, शंकर जोशी, नारायण दत्त, श्याम दत्त, योगेश, राजेंद्र सिंह, दिनेश, कृष्णानंद, हयात सिंह, नाथ सिंह राना, भुवन चौड़ाकोटी, मुकेश चौड़ाकोटी आदि का कहना है कि हैंडपंपों के टूटने के बाद से उन्हें पानी के लिए 200 मीटर से सवा किमी दूर जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने हैंडपंप लगाए जाने तक वैकल्पिक उपाय करने की जल संस्थान से मांग की है।  
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कोट  
राष्ट्रीय राजमार्ग में बारहमासी सड़क की कटिंग के चलते हटाए गए हैंडपंपों को अभी लगा पाना तकनीकी तौर पर संभव नहीं है। अलबत्ता सड़क का काम पूरा होने के बाद जल्द से जल्द ये हैंडपंप उन्हीं जगह लगा दिए जाएंगे।  
प्रशांत वर्मा, अपर सहायक अभियंता,  जल संस्थान, चंपावत।
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