{"_id":"5be862cfbdec2269a7717075","slug":"21541956303-champawat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"छठ पर्व को लेकर पूर्वांचल के लोगों में उत्साह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छठ पर्व को लेकर पूर्वांचल के लोगों में उत्साह
Updated Sun, 11 Nov 2018 10:41 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टनकपुर (चंपावत)। दीपावली के छह दिन बाद शुरू होने वाले पूर्वांचल के प्रमुख छठ पर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। यहां रह रहे पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं बिहार के लोगों में छठ पर्व को लेकर खासा उत्साह बना है। पर्व पर होने वाली भव्य पूजा की तैयारियां जोरशोर से चल रही है। व्रतधारी 13 नवंबर को शारदा स्नानघाट पर अस्त होते भगवान सूर्य की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे।
पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं बिहार का प्रमुख छठ पर्व हर साल यहां भी हर्षोल्लास एवं विधि-विधान से मनाया जाता है। क्षेत्र में रह रहे पूर्वांचल के लोगों ने उत्साह के साथ छठ पूजा की तैयारियां शुरू कर दी है। कार्तिक मास की चतुर्थी से यह पर्व शुरू होगा। विशिष्टता और पवित्रता का पर्याय यह पर्व हर साल परंपरागत तरीके से मनाते हुए परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इस पर्व पर साधकों को व्रत की कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ता है।
व्रतधारी व्रत समाप्त होने तक न सिर्फ परिवार से अलग रहते हैं, बल्कि 24 घंटे तक निर्जल रहकर तीसरे दिन विधि-विधान से पहले अस्त होते एवं दूसरे दिन उदय होते भगवान सूर्य की पूजा करने के बाद ही जल ग्रहण करते हैं। बिहार मूल के देवेंद्र सिंह, अनिल प्रसाद सिन्हा आदि ने बताया कि पूजा के लिए शारदा स्नानघाट पर छठ पूजा की तैयारी की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं बिहार का प्रमुख छठ पर्व हर साल यहां भी हर्षोल्लास एवं विधि-विधान से मनाया जाता है। क्षेत्र में रह रहे पूर्वांचल के लोगों ने उत्साह के साथ छठ पूजा की तैयारियां शुरू कर दी है। कार्तिक मास की चतुर्थी से यह पर्व शुरू होगा। विशिष्टता और पवित्रता का पर्याय यह पर्व हर साल परंपरागत तरीके से मनाते हुए परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इस पर्व पर साधकों को व्रत की कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ता है।
विज्ञापन
व्रतधारी व्रत समाप्त होने तक न सिर्फ परिवार से अलग रहते हैं, बल्कि 24 घंटे तक निर्जल रहकर तीसरे दिन विधि-विधान से पहले अस्त होते एवं दूसरे दिन उदय होते भगवान सूर्य की पूजा करने के बाद ही जल ग्रहण करते हैं। बिहार मूल के देवेंद्र सिंह, अनिल प्रसाद सिन्हा आदि ने बताया कि पूजा के लिए शारदा स्नानघाट पर छठ पूजा की तैयारी की गई है।
विज्ञापन