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डेढ़ साल से मानदेय के लिए तरस रहे हैं साक्षरता प्रेरक
Updated Thu, 09 Nov 2017 11:40 PM IST
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चंपावत। जिले में बंद हो चुके लोक साक्षरता केंद्रों में तैनात साक्षरता प्रेरकों को बीते डेढ़ साल से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। प्रेरकों में रोष व्याप्त है। बृहस्पतिवार को मानेश्वर में हुई बैठक में प्रेरकों ने लंबे समय से मानदेय का भुगतान नहीं होने पर रोष जताया। उनका कहना था कि पिछली सरकार के कार्यकाल में उन्हें समय से मानदेय का भुगतान हो जाता था, लेकिन वर्तमान में कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
पिछली सरकार ने प्रेरकों को मिलने वाले दो हजार रुपये प्रतिमाह के मामूली मानदेय को बढ़ाकर तीन हजार रुपये प्रतिमाह किया था, लेकिन अभी तक बढ़े हुए मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। प्रेरकों का कहना था कि एक ओर जहां सरकारी कर्मचारियों का वेतन दिन-प्रतिदिन बढ़ाया जा रहा है, वहीं प्रेरकों को अभी भी मामूली मानदेय दिया जा रहा है।
समय से भुगतान नहीं होने से प्रेरकों को आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ रहा है। बैठक में चौड़ाराजपुरा के कंचन जोशी, मझेड़ा के विपिन पचौली, उषा जोशी आदि ने प्रेरकों का मासिक मानदेय बीस हजार रुपये किए जाने, केंद्रीय कर्मचारी घोषित किए जाने और उनका बीमा कराए जाने की मांग को प्रमुखता से उठाया।
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पिछली सरकार ने प्रेरकों को मिलने वाले दो हजार रुपये प्रतिमाह के मामूली मानदेय को बढ़ाकर तीन हजार रुपये प्रतिमाह किया था, लेकिन अभी तक बढ़े हुए मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। प्रेरकों का कहना था कि एक ओर जहां सरकारी कर्मचारियों का वेतन दिन-प्रतिदिन बढ़ाया जा रहा है, वहीं प्रेरकों को अभी भी मामूली मानदेय दिया जा रहा है।
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समय से भुगतान नहीं होने से प्रेरकों को आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ रहा है। बैठक में चौड़ाराजपुरा के कंचन जोशी, मझेड़ा के विपिन पचौली, उषा जोशी आदि ने प्रेरकों का मासिक मानदेय बीस हजार रुपये किए जाने, केंद्रीय कर्मचारी घोषित किए जाने और उनका बीमा कराए जाने की मांग को प्रमुखता से उठाया।
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