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चार ठेकेदारों ने जमा नहीं कराया शुल्क, आरसी काटेगी पंचायत
Updated Thu, 29 Mar 2018 11:07 PM IST
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चंपावत। पिछले वर्ष मई-जून में हुई शराब की दुकान के लिए हुई लॉटरी में हिस्सा लेने वाले आवेदकों से जिला पंचायत को 2.85 लाख रुपये की रकम मिली है। यह राजस्व शराब के कारोबारियों से पहली बार मिला है। वहीं चार आवेदकों ने ठेकेदारी लाइसेंस की रकम जमा नहीं कराई है। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि इन आवेदकों को अंतिम नोटिस भेज आरसी काटने की कार्रवाई की जाएगी।
चंपावत जिले की शराब की 14 दुकानों में से 7 दुकानें ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की इन 7 दुकानों की लॉटरी प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाले ठेकेदारों के लिए जिला पंचायत का ठेकेदारी लाइसेंस अनिवार्य किया गया था। जिला पंचायत के नियमों के तहत सभी 61 आवेदकों को आवेदन से पूर्व ठेकेदारी लाइसेंस जिला पंचायत से लेना अनिवार्य था। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्र के हर आवेदक को लाइसेंस शुल्क के रूप में पांच हजार रुपये जिला पंचायत में जमा कराने थे। 2017 में शराब की 7 दुकानों के लिए 61 लोगों ने आवेदन किया था। मगर कई बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद अभी भी चार लोगों ने रकम जमा नहीं कराई है।
कोट
इन चार आवेदकों को अंतिम नोटिस भेजा जाएगा। इसके बावजूद लाइसेंस शुल्क की रकम जमा नहीं कराए जाने पर राजस्व प्रमाणपत्र (आरसी) का सहारा लिया जाएगा।
राजेश कुमार, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, चंपावत।
चंपावत जिले की शराब की 14 दुकानों में से 7 दुकानें ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की इन 7 दुकानों की लॉटरी प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाले ठेकेदारों के लिए जिला पंचायत का ठेकेदारी लाइसेंस अनिवार्य किया गया था। जिला पंचायत के नियमों के तहत सभी 61 आवेदकों को आवेदन से पूर्व ठेकेदारी लाइसेंस जिला पंचायत से लेना अनिवार्य था। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्र के हर आवेदक को लाइसेंस शुल्क के रूप में पांच हजार रुपये जिला पंचायत में जमा कराने थे। 2017 में शराब की 7 दुकानों के लिए 61 लोगों ने आवेदन किया था। मगर कई बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद अभी भी चार लोगों ने रकम जमा नहीं कराई है।
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कोट
इन चार आवेदकों को अंतिम नोटिस भेजा जाएगा। इसके बावजूद लाइसेंस शुल्क की रकम जमा नहीं कराए जाने पर राजस्व प्रमाणपत्र (आरसी) का सहारा लिया जाएगा।
राजेश कुमार, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, चंपावत।