{"_id":"5a734ec04f1c1b83268b7d30","slug":"171517506240-champawat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेलबंद्धगोठ में काष्ठकला उद्योग प्रशिक्षण शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेलबंद्धगोठ में काष्ठकला उद्योग प्रशिक्षण शुरू
Updated Thu, 01 Feb 2018 11:00 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बनबसा (चंपावत)। सीमांत क्षेत्र विकास योजना के तहत यहां बेलबंद्धगोठ में साठ दिवसीय काष्ठकला उद्योग का प्रशिक्षण शुरू किया गया। इसके अंतर्गत निर्धन वर्ग के ग्रामीणों को बेकार या निष्प्रयोज्य वस्तुओं से बेहतर कलाकृति बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बृहस्पतिवार को बेलबंद्धगोठ में गुदमी के ग्रामप्रधान अरूण कुमार की अध्यक्षता और निधि संस्था के डॉ. सुनील पांडेय के संचालन में काष्ठकला उद्योग प्रशिक्षण का शुभारंभ किया गया। मुख्य अतिथि बीडीसी सदस्य महेश जोशी ने प्रशिक्षण का स्वागत किया। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक जीवी जोशी ने उद्योग विभाग से ग्रामीणों को दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारियां दी। कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार और कुटीर उद्योग से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों द्वारा तैयार काष्ठ कलाकृतियों के विपणन की व्यवस्था जिला उद्योग केंद्र ही करता है। आरसेटी के निदेशक जनार्दन चिलकोटी ने ग्रामीणों को स्वरोजगार की ओर अग्रसर होने में सरकार और बैंकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। काष्ठ कला उद्योग के प्रशिक्षक (मास्टर ट्रेनर) कैलाश पंत ने ग्रामीणों को बेकार, निष्प्रयोज्य वस्तुओं को तराश कर उसे सुंदर कलाकृति का रूप से देने के बारे बताया। प्रशिक्षण का आयोजन निधि संस्था और प्रायोजन जिला उद्योग केंद्र के द्वारा किया जा रहा है। प्रशिक्षण के लिए 35 ग्रामीणों का चयन किया गया। इस मौके पर समाज सेविका सुनीता मुरारी ने आभार जताया।
बृहस्पतिवार को बेलबंद्धगोठ में गुदमी के ग्रामप्रधान अरूण कुमार की अध्यक्षता और निधि संस्था के डॉ. सुनील पांडेय के संचालन में काष्ठकला उद्योग प्रशिक्षण का शुभारंभ किया गया। मुख्य अतिथि बीडीसी सदस्य महेश जोशी ने प्रशिक्षण का स्वागत किया। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक जीवी जोशी ने उद्योग विभाग से ग्रामीणों को दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारियां दी। कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार और कुटीर उद्योग से जोड़ना है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों द्वारा तैयार काष्ठ कलाकृतियों के विपणन की व्यवस्था जिला उद्योग केंद्र ही करता है। आरसेटी के निदेशक जनार्दन चिलकोटी ने ग्रामीणों को स्वरोजगार की ओर अग्रसर होने में सरकार और बैंकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। काष्ठ कला उद्योग के प्रशिक्षक (मास्टर ट्रेनर) कैलाश पंत ने ग्रामीणों को बेकार, निष्प्रयोज्य वस्तुओं को तराश कर उसे सुंदर कलाकृति का रूप से देने के बारे बताया। प्रशिक्षण का आयोजन निधि संस्था और प्रायोजन जिला उद्योग केंद्र के द्वारा किया जा रहा है। प्रशिक्षण के लिए 35 ग्रामीणों का चयन किया गया। इस मौके पर समाज सेविका सुनीता मुरारी ने आभार जताया।
विज्ञापन