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अधिशासी अधिकारी के बगैर पूर्णागिरि मेले के बेस कैंप की नगर पालिका
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चंपावत। 23 मार्च से मां पूर्णागिरि धाम का मेला शुरू हो जाएगा। लेकिन इस मेले के बेस कैंप टनकपुर की नगर पालिका की हालत बेहद खराब है। पहली फरवरी से पालिका अधिशासी अधिकारी (ईओ) के बगैर है। यहां न सफाई निरीक्षक है और नहीं सफाई वाहनों को चलाने के लिए पर्याप्त चालक। पांच वाहनों के सापेक्ष महज एक ही चालक है।
मां पूर्णागिरि धाम के मेले का सबसे ज्यादा असर टनकपुर की व्यवस्थाओं पर पड़ता है। सफाई से लेकर पथ प्रकाश तक की व्यवस्थाओं को संवारने का जिम्मा टनकपुर नगर पालिका का है। लेकिन यहां स्टाफ की भारी कमी है। 31 जनवरी को ईओ जयवीर सिंह राठी के सेवानिवृत्त होने के बाद से यहां ईओ की कुर्सी खाली है। फिलहाल ईओ का अतिरिक्त कार्यभार बनबसा के ईओ को दिया गया है।
मेले के दौरान गंदगी से शहर को निजात दिलाने के लिए न पर्याप्त स्वच्छक हैं और नहीं सफाई निरीक्षक। महज 28 स्वच्छकों से काम चल रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी चालकों की कमी से हो रही है। पांच कूड़ा वाहनों के संचालन के लिए महज एक ड्राइवर है। ईओ नौनी राम का कहना है कि कुछ अन्य कर्मियों से वाहनों का संचालन कराया जा रहा है। नगर पालिका अध्यक्ष विपिन कुमार का कहना है कि नगर पालिका में अधिशासी अधिकारी, सफाई निरीक्षक सहित कई महत्वपूर्ण पद रिक्त है। मेले के मद्देनजर रिक्त पदों को भरने के लिए शासन से आग्रह किया गया है।
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चंपावत के लेखाकार और लोहाघाट के अनुसेवक से चल रही बनबसा नगर पंचायत
बनबसा (चंपावत)। बनबसा की चार साल पुरानी नगर पंचायत के हाल टनकपुर से भी बदतर है। यहां अधिशासी अधिकारी के अलावा कोई स्थायी कर्मी नहीं है। चंपावत से संबद्ध लेखाकार से यहां का काम चलाया जा रहा है। इसी तरह लोहाघाट से यहां अनुसेवक को संबद्ध किया गया है।
ईओ नौनी राम का कहना है कि कर्मियों की कमी से यहां करों की वसूली से लेकर साफ-सफाई तक प्रभावित हो रही है। उपनल से तीन बहुउद्देश्यीय कर्मी और एक लाइनमैन तथा एक माली रखे गए हैं। ईओ ने बताया कि भवन कर लागू करने के लिए सर्वे चल रहा है। अलबत्ता अनुदान के अलावा लाइसेंस शुल्क की आय से पंचायत की व्यवस्था चल रही है। इधर नगर पंचायत अध्यक्ष रेणु अग्रवाल का कहना है कि रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
मां पूर्णागिरि धाम के मेले का सबसे ज्यादा असर टनकपुर की व्यवस्थाओं पर पड़ता है। सफाई से लेकर पथ प्रकाश तक की व्यवस्थाओं को संवारने का जिम्मा टनकपुर नगर पालिका का है। लेकिन यहां स्टाफ की भारी कमी है। 31 जनवरी को ईओ जयवीर सिंह राठी के सेवानिवृत्त होने के बाद से यहां ईओ की कुर्सी खाली है। फिलहाल ईओ का अतिरिक्त कार्यभार बनबसा के ईओ को दिया गया है।
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मेले के दौरान गंदगी से शहर को निजात दिलाने के लिए न पर्याप्त स्वच्छक हैं और नहीं सफाई निरीक्षक। महज 28 स्वच्छकों से काम चल रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी चालकों की कमी से हो रही है। पांच कूड़ा वाहनों के संचालन के लिए महज एक ड्राइवर है। ईओ नौनी राम का कहना है कि कुछ अन्य कर्मियों से वाहनों का संचालन कराया जा रहा है। नगर पालिका अध्यक्ष विपिन कुमार का कहना है कि नगर पालिका में अधिशासी अधिकारी, सफाई निरीक्षक सहित कई महत्वपूर्ण पद रिक्त है। मेले के मद्देनजर रिक्त पदों को भरने के लिए शासन से आग्रह किया गया है।
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चंपावत के लेखाकार और लोहाघाट के अनुसेवक से चल रही बनबसा नगर पंचायत
बनबसा (चंपावत)। बनबसा की चार साल पुरानी नगर पंचायत के हाल टनकपुर से भी बदतर है। यहां अधिशासी अधिकारी के अलावा कोई स्थायी कर्मी नहीं है। चंपावत से संबद्ध लेखाकार से यहां का काम चलाया जा रहा है। इसी तरह लोहाघाट से यहां अनुसेवक को संबद्ध किया गया है।
ईओ नौनी राम का कहना है कि कर्मियों की कमी से यहां करों की वसूली से लेकर साफ-सफाई तक प्रभावित हो रही है। उपनल से तीन बहुउद्देश्यीय कर्मी और एक लाइनमैन तथा एक माली रखे गए हैं। ईओ ने बताया कि भवन कर लागू करने के लिए सर्वे चल रहा है। अलबत्ता अनुदान के अलावा लाइसेंस शुल्क की आय से पंचायत की व्यवस्था चल रही है। इधर नगर पंचायत अध्यक्ष रेणु अग्रवाल का कहना है कि रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।