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टैंकर देख पानी को दौड़ लगा रहे लोग
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चंपावत। चंपावत में पेयजल किल्लत के बीच लोगों को पानी के लिए भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शहर में हैंडपंप और नौलों के अलावा टैंकर और पिकअप जीपों से हो रही पेयजल आपूर्ति लोगों के लिए सहारा बना हुआ है। टैंकर देखते ही लोग पानी के लिए दौड़ लगाने को मजबूर हैं।
चंपावत क्षेत्र में रोजाना 25 लाख लीटर पानी की जरूरत है लेकिन इन दिनों महज सात लाख लीटर पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है। जिले के ज्यादातर मोहल्लों में नलों के जरिए एक दिन छोड़कर पानी मिल पा रहा है और दो दिन में भी ये पानी बमुश्किल आधा घंटा मिल पा रहा है। नागरिकों का कहना है कि भैरवां, जीआईसी मोहल्ले के अधिकतर हिस्सों में एक सप्ताह से पानी की एक बूंद नहीं आई है।
बुजुर्ग नारायण सिंह तड़ागी, हरक सिंह सहित कई नागरिकों का कहना है कि पेयजल किल्लत लोगों के लिए मुसीबत बन रही है। क्षेत्र के लोगों का काफी वक्त पानी ढोने में बर्बाद हो रहा है। वहीं जल संस्थान का कहना है कि पेयजल संकट से निपटने के लिए टैंकर और पिकअप जीपों से रोजाना 60 हजार लीटर पानी की आपूर्ति की जा रही है। इस पानी को पाने के लिए भी लोगों में होड़ मच रही है।
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तपिश के चलते जल स्रोतों में आई कमी से पानी की मात्रा एक-तिहाई से भी कम हो गई है। इस कारण क्षेत्र में हर रोज पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। टैंकर और पिकअप जीपों से लोगों को पानी पहुंचा कर वैकल्पिक व्यवस्था का प्रयास किया जा रहा है।
किशोर पंत, अपर सहायक अभियंता, जल संस्थान, चंपावत।
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चंपावत क्षेत्र में रोजाना 25 लाख लीटर पानी की जरूरत है लेकिन इन दिनों महज सात लाख लीटर पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है। जिले के ज्यादातर मोहल्लों में नलों के जरिए एक दिन छोड़कर पानी मिल पा रहा है और दो दिन में भी ये पानी बमुश्किल आधा घंटा मिल पा रहा है। नागरिकों का कहना है कि भैरवां, जीआईसी मोहल्ले के अधिकतर हिस्सों में एक सप्ताह से पानी की एक बूंद नहीं आई है।
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बुजुर्ग नारायण सिंह तड़ागी, हरक सिंह सहित कई नागरिकों का कहना है कि पेयजल किल्लत लोगों के लिए मुसीबत बन रही है। क्षेत्र के लोगों का काफी वक्त पानी ढोने में बर्बाद हो रहा है। वहीं जल संस्थान का कहना है कि पेयजल संकट से निपटने के लिए टैंकर और पिकअप जीपों से रोजाना 60 हजार लीटर पानी की आपूर्ति की जा रही है। इस पानी को पाने के लिए भी लोगों में होड़ मच रही है।
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तपिश के चलते जल स्रोतों में आई कमी से पानी की मात्रा एक-तिहाई से भी कम हो गई है। इस कारण क्षेत्र में हर रोज पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। टैंकर और पिकअप जीपों से लोगों को पानी पहुंचा कर वैकल्पिक व्यवस्था का प्रयास किया जा रहा है।
किशोर पंत, अपर सहायक अभियंता, जल संस्थान, चंपावत।