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प्रक्रिया को ताक पर रख खरीद दी दवाएं!
Updated Sat, 09 Sep 2017 11:00 PM IST
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चंपावत। लोहाघाट के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं की स्थानीय स्तर पर खरीद (एलपी) में कायदे-कानूनों को ताख पर रखा गया है। इन दवाओं की खरीद प्रक्रिया को फार्मेसिस्टों के बजाय स्टाफ नर्सों द्वारा किया गया है। मामले के संज्ञान में आने के बाद डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन ने सीएमओ को ज्ञापन देकर जांच की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि पब्लिक-प्राइवेट पाटनर्शिप (पीपीपी) मोड के लोहाघाट अस्पताल को नवंबर 2016 में सरकारी स्वामित्व में लाया गया था। इसके बाद अस्पताल में कुछ दवाओं को स्थानीय स्तर पर खरीदा गया। ये वे दवाएं थीं, जो अस्पताल में उपलब्ध नहीं थीं। अस्पताल ने करीब एक लाख रुपये की दवाएं खरीद की। मगर इन दवाओं की स्थानीय स्तर पर खरीद की प्रक्रिया स्टाफ नर्स और चिकित्साधीक्षक द्वारा किए जाने की जानकारी सूचना के अधिकार के जरिये मिली है।
डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि नियम के मुताबिक दवाओं के भंडारण व रखरखाव की जिम्मेदारी फार्मेसिस्ट की होती है। फार्मेसिस्ट ही बाहर से खरीदी दवाओं को प्रमाणित कर बिल के भुगतान की संस्तुति करता है। लेकिन यहां दवा खरीद में इस पूरी प्रक्रिया को ताख पर रख दिया गया है। एसोसिएशन के मुख्य संयोजक मुकुल कुमार राय और सह संयोजक विष्णु गिरि गोस्वामी ने सीएमओ से अनियमितता और नियमों के उल्लंघन की जांच करने की मांग की है।
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कोट
स्थानीय खरीद की ज्यादातर दवाएं गर्भवती महिलाओं और एक साल की उम्र के बच्चों से संबंधित हैं। भर्ती मरीजों के लिए दवाओं की तात्कालिक जरूरत को देखते हुए स्टाफ नर्स के जरिये क्रय कराया गया है। इसमें गड़बड़ी का आरोप निराधार है।
डॉ.मंजीत सिंह, तत्कालीन चिकित्साधीक्षक,
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, लोहाघाट।
कोट
लोहाघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं की स्थानीय खरीद के मामले में फार्मेसिस्ट एसोसिएशन की शिकायत की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद जो भी उचित होगा, नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
डॉ. एमएस बोहरा मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।
ज्ञापन में कहा गया है कि पब्लिक-प्राइवेट पाटनर्शिप (पीपीपी) मोड के लोहाघाट अस्पताल को नवंबर 2016 में सरकारी स्वामित्व में लाया गया था। इसके बाद अस्पताल में कुछ दवाओं को स्थानीय स्तर पर खरीदा गया। ये वे दवाएं थीं, जो अस्पताल में उपलब्ध नहीं थीं। अस्पताल ने करीब एक लाख रुपये की दवाएं खरीद की। मगर इन दवाओं की स्थानीय स्तर पर खरीद की प्रक्रिया स्टाफ नर्स और चिकित्साधीक्षक द्वारा किए जाने की जानकारी सूचना के अधिकार के जरिये मिली है।
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डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि नियम के मुताबिक दवाओं के भंडारण व रखरखाव की जिम्मेदारी फार्मेसिस्ट की होती है। फार्मेसिस्ट ही बाहर से खरीदी दवाओं को प्रमाणित कर बिल के भुगतान की संस्तुति करता है। लेकिन यहां दवा खरीद में इस पूरी प्रक्रिया को ताख पर रख दिया गया है। एसोसिएशन के मुख्य संयोजक मुकुल कुमार राय और सह संयोजक विष्णु गिरि गोस्वामी ने सीएमओ से अनियमितता और नियमों के उल्लंघन की जांच करने की मांग की है।
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स्थानीय खरीद की ज्यादातर दवाएं गर्भवती महिलाओं और एक साल की उम्र के बच्चों से संबंधित हैं। भर्ती मरीजों के लिए दवाओं की तात्कालिक जरूरत को देखते हुए स्टाफ नर्स के जरिये क्रय कराया गया है। इसमें गड़बड़ी का आरोप निराधार है।
डॉ.मंजीत सिंह, तत्कालीन चिकित्साधीक्षक,
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, लोहाघाट।
कोट
लोहाघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं की स्थानीय खरीद के मामले में फार्मेसिस्ट एसोसिएशन की शिकायत की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद जो भी उचित होगा, नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
डॉ. एमएस बोहरा मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।