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बाल वैज्ञानिकों ने जानी पुरानी शैली के भवनों की खूबियां
Updated Thu, 22 Nov 2018 11:40 PM IST
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लोहाघाट (चंपावत)। बाराकोट विकासखंड के राजकीय इंटर कॉलेज बापरू के बाल वैज्ञानिकों ने बापरू गांव का भ्रमण कर पुरानी शैली के भवनों की खूबियां जानीं। रसायन विज्ञान के प्रवक्ता राजेंद्र गड़कोटी के दिशा-निर्देशन में गए दल में शामिल बाल वैज्ञानिक सचिन उपाध्याय, हिमांशु उपाध्याय, सचिन पांडेय, मोहित कुमार, मीनाक्षी फर्त्याल, भावना बोहरा आदि ने लकड़ी और पत्थरों से बने पुराने मकानों की विशेषताओं को जाना। शिक्षक गहतोड़ी ने बताया कि पुराने भवन मौसम के अनुकूल होते हैं। साथ ही पर्यावरणीय नजरिये से भी लाभप्रद हैं।
बताया कि लकड़ी, पत्थरों से बने मकानों में गर्मी के दिनों शीतलता और जाड़ों में काफी गरमाहट रहती है। पत्थरों से बने मकानों में कोयला जलाने से गैस का अंदेशा कम रहता है। बाल वैज्ञानिकों ने ग्रामीणों को संकेतों के माध्यम से वर्षा तथा जलवायु की पहचान बताई। छात्रों नेे ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बन रहे सीमेंट के घरों को लेकर चिंता जताई। सीमेंट, टाइल्स लगे मकानों में रहने के नुकसानों की जानकारी दी। इस दौरान हरीश चंद्र कलौनी, कृष्ण चंद्र जोशी आदि ने भी बाल वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण जानकारी दी।
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बताया कि लकड़ी, पत्थरों से बने मकानों में गर्मी के दिनों शीतलता और जाड़ों में काफी गरमाहट रहती है। पत्थरों से बने मकानों में कोयला जलाने से गैस का अंदेशा कम रहता है। बाल वैज्ञानिकों ने ग्रामीणों को संकेतों के माध्यम से वर्षा तथा जलवायु की पहचान बताई। छात्रों नेे ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बन रहे सीमेंट के घरों को लेकर चिंता जताई। सीमेंट, टाइल्स लगे मकानों में रहने के नुकसानों की जानकारी दी। इस दौरान हरीश चंद्र कलौनी, कृष्ण चंद्र जोशी आदि ने भी बाल वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण जानकारी दी।
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