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सता विरोधी रहा है चंपावत जिले का इतिहास
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अल्मोड़ा लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले चंपावत जिले का इतिहास आम तौर पर सत्ता विरोधी रहा है। दो विधानसभा सीट वाले चंपावत जिले में जिस दल का विधायक रहा उसके विरोधी दल को लीड मिली है। इसमें बस एक बार लोहाघाट विधानसभा सीट अपवाद बनी है। भाजपा का विधायक होने के बावजूद 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां भाजपा को ही लीड मिली।
अल्मोड़ा लोकसभा सीट के तहत आने वाली कुल 14 विधानसभा सीटों में से लोहाघाट और चंपावत इस जिले की है। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से इस जिले में एंटी इनकंबेंसी फैक्टर प्रमुख रहा है। राज्य में जिस दल की सरकार रही है, लोकसभा चुनाव में उसके खिलाफ वोट पड़ा है। जिले की दोनों विधानसभा सीटों में कमोबेश विधायक के खिलाफ जनादेश रहा है।
2004 से 2014 तक के तीन लोकसभा चुनाव के परिणाम विधायकों के खिलाफ ही रहे। 2004 और 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार थी लेकिन इस सीट से जीत भाजपा प्रत्याशी की हुई। जबकि 2007 से 2012 तक प्रदेश में भाजपा की सरकार थी, लेकिन 2009 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान जिले की दोनों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस आगे रही।
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लोकसभा चुनाव में चंपावत जिले में कांग्रेस-भाजपा का प्रदर्शन:
2004 में उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार लेकिन भाजपा 1650 वोटों से आगे रही।
2009 में उत्तराखंड में भाजपा की सरकार लेकिन कांग्रेस 1953 मतों से आगे रही।
2014 में उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार लेकिन भाजपा 22612 वोटों से आगे रही।
जिस दल का विधायक, उसके खिलाफ लोकसभा चुनाव में मिली लीड:
2002-07 तक चंपावत से विधायक कांग्रेस का लेकिन 2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 225 वोटों की बढ़त।
लोहाघाट सीट में विधायक कांग्रेस का लेकिन लोकसभा चुनाव में भाजपा को 202 वोटों की लीड।
2007-12 तक चंपावत से विधायक भाजपा का लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 3160 की लीड।
लोहाघाट सीट से विधायक कांग्रेस का लेकिन भाजपा को 1207 वोटों की लीड।
2012-17 तक चंपावत सीट से विधायक कांग्रेस का मगर 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की लीड 15854 वोटों की रही।
सत्ता विरोधी रुझान का इकलौता अपवाद:
2012-17 तक लोहाघाट में भाजपा का विधायक होते हुए 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 11032 वोटों की लीड मिली।
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अल्मोड़ा लोकसभा सीट के तहत आने वाली कुल 14 विधानसभा सीटों में से लोहाघाट और चंपावत इस जिले की है। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से इस जिले में एंटी इनकंबेंसी फैक्टर प्रमुख रहा है। राज्य में जिस दल की सरकार रही है, लोकसभा चुनाव में उसके खिलाफ वोट पड़ा है। जिले की दोनों विधानसभा सीटों में कमोबेश विधायक के खिलाफ जनादेश रहा है।
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2004 से 2014 तक के तीन लोकसभा चुनाव के परिणाम विधायकों के खिलाफ ही रहे। 2004 और 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार थी लेकिन इस सीट से जीत भाजपा प्रत्याशी की हुई। जबकि 2007 से 2012 तक प्रदेश में भाजपा की सरकार थी, लेकिन 2009 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान जिले की दोनों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस आगे रही।
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लोकसभा चुनाव में चंपावत जिले में कांग्रेस-भाजपा का प्रदर्शन:
2004 में उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार लेकिन भाजपा 1650 वोटों से आगे रही।
2009 में उत्तराखंड में भाजपा की सरकार लेकिन कांग्रेस 1953 मतों से आगे रही।
2014 में उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार लेकिन भाजपा 22612 वोटों से आगे रही।
जिस दल का विधायक, उसके खिलाफ लोकसभा चुनाव में मिली लीड:
2002-07 तक चंपावत से विधायक कांग्रेस का लेकिन 2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 225 वोटों की बढ़त।
लोहाघाट सीट में विधायक कांग्रेस का लेकिन लोकसभा चुनाव में भाजपा को 202 वोटों की लीड।
2007-12 तक चंपावत से विधायक भाजपा का लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 3160 की लीड।
लोहाघाट सीट से विधायक कांग्रेस का लेकिन भाजपा को 1207 वोटों की लीड।
2012-17 तक चंपावत सीट से विधायक कांग्रेस का मगर 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की लीड 15854 वोटों की रही।
सत्ता विरोधी रुझान का इकलौता अपवाद:
2012-17 तक लोहाघाट में भाजपा का विधायक होते हुए 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 11032 वोटों की लीड मिली।