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नेपाल के लिए चैनल निर्माण की कवायद शुरू
Updated Wed, 18 Jul 2018 10:33 PM IST
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टनकपुर (चंपावत)। नेपाल के साथ हुई संधि के तहत बनबसा बैराज की तर्ज पर जल्द ही टनकपुर बैराज से नेपाल को सिंचाई के लिए भी जलापूर्ति की जाएगी। इसके लिए चैनल (नहर) निर्माण की कवायद शुरू हो गई है। वन भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई के क्रम में बुधवार को हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ डॉ. चंद्रशेखर सनवाल एवं एनएचपीसी के टनकपुर पावर स्टेशन के महाप्रबंधक रईस मियां ने प्रस्तावित चैनल निर्माण की जद में आ रही वन भूमि का निरीक्षण किया।
नेपाल के साथ 1991 में हुई संधि के तहत टनकपुर बैराज से नेपाल को सिंचाई के लिए जलापूर्ति दी जानी है। इसके लिए नेपाल सीमा तक भारतीय क्षेत्र में चैनल का निर्माण भारत सरकार को करके देना है। नेपाल ने अपने क्षेत्र में चैनल का निर्माण शुरू कर दिया है, जबकि भारतीय क्षेत्र में चैनल निर्माण की कार्रवाई चल रही है।
शारदा रेंज के एसडीओ राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि चैनल निर्माण के लिए 1.2 किमी लंबी और 100 मीटर चौड़ी आरक्षित वन भूमि एनएचपीसी को हस्तांतरित की जानी है। एनएचपीसी की ओर से वन विभाग को मिले प्रस्ताव के बाद स्थलीय निरीक्षण किया गया है। उन्होंने बताया कि चैनल निर्माण में 12 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरित की जानी है, जबकि इसके दायरे में आ रहे 1700 पेड़ों का कटान होना है। भूमि हस्तांतरण की शर्त के मुताबिक इसके बदले दोगुनी भूमि पर दोगुने पेड़ों का प्लांटेशन किया जाएगा। प्लांटेशन के लिए चंपावत वन विभाग को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।
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नेपाल के साथ 1991 में हुई संधि के तहत टनकपुर बैराज से नेपाल को सिंचाई के लिए जलापूर्ति दी जानी है। इसके लिए नेपाल सीमा तक भारतीय क्षेत्र में चैनल का निर्माण भारत सरकार को करके देना है। नेपाल ने अपने क्षेत्र में चैनल का निर्माण शुरू कर दिया है, जबकि भारतीय क्षेत्र में चैनल निर्माण की कार्रवाई चल रही है।
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शारदा रेंज के एसडीओ राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि चैनल निर्माण के लिए 1.2 किमी लंबी और 100 मीटर चौड़ी आरक्षित वन भूमि एनएचपीसी को हस्तांतरित की जानी है। एनएचपीसी की ओर से वन विभाग को मिले प्रस्ताव के बाद स्थलीय निरीक्षण किया गया है। उन्होंने बताया कि चैनल निर्माण में 12 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरित की जानी है, जबकि इसके दायरे में आ रहे 1700 पेड़ों का कटान होना है। भूमि हस्तांतरण की शर्त के मुताबिक इसके बदले दोगुनी भूमि पर दोगुने पेड़ों का प्लांटेशन किया जाएगा। प्लांटेशन के लिए चंपावत वन विभाग को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।
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