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दस माह बीते, एक रुपये का उपयोग नहीं हुआ

Sun, 11 Feb 2018 10:29 PM IST
Updated Sun, 11 Feb 2018 10:29 PM IST
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दस माह बीते, एक रुपये का उपयोग नहीं हुआ

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चंपावत। मौजूदा वित्त वर्ष 2017-18 के बीतने में अब दो माह से भी कम समय बचा है। लेकिन उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (उरेडा) अभी तक जिला योजना के एक भी रुपये का उपयोग नहीं कर सका है। विभाग को अब बचे वक्त में इस रकम को खर्च करना होगा।

चंपावत जिले की 40.97 करोड़ रुपये की इस वित्त वर्ष की योजना में से उरेडा को 30 लाख रुपये का अनुमोदन हुआ था। इस रकम से सोलर स्ट्रीट लाइट, सोलर पावर प्लांट, सोलर वाटर हीटर, सोलर थर्मल मरम्मत व रखरखाव आदि होने थे। लेकिन वित्त वर्ष के दस महीने से अधिक बीत जाने के बावजूद अभी काम तक शुरू नहीं हो सका है, जबकि उसे अनुमोदित 30 लाख रुपये में से 15 लाख रुपये पहले ही दिया जा चुका है। चंपावत का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे पिथौरागढ़ के उरेडा परियोजना अधिकारी अखिलेश शर्मा का कहना है कि जिला योजना के स्वीकृत कार्यों को शुरू कराए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा कर इस माह काम भी शुरू करा दिया जाएगा।
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चंपावत के पीओ की मौत भी बनी खर्च न होने की वजह
चंपावत के परियोजना अधिकारी ओम कुमार की हरिद्वार में पिछले साल अक्तूबर में नदी में डूबने से मौत हो गई थी। इसके बाद कुछ समय तक यहां के पीओ का पद रिक्त रहा। निदेशक ने यहां की जिम्मेदारी ऊधमसिंह नगर के पीओ को दी, लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य गत कारणों से यहां का कार्यभार ग्रहण नहीं किया। और अब कुछ समय पूर्व चंपावत का अतिरिक्त दायित्व पिथौरागढ़ के अधिकारी अखिलेश शर्मा के जिम्मे है।
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अवमुक्त नहीं हुई 29 प्रतिशत रकम
चंपावत की मौजूदा वित्त वर्ष की 40.97 करोड़ रुपये की जिला योजना मेें से जनवरी माह तक 22.17 करोड़ ही उपयोग में आ सका है। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी एनके बचखेती ने बताया कि जनवरी तक 29.18 करोड़ रुपये अवमुक्त हुए हैं। इसमेें से 76.35 प्रतिशत व्यय किया जा चुका है।
जिला योजना में कृषि विभाग की धन खर्च करने की गति खासी धीमी है। विभाग को 80 लाख रुपये के सापेक्ष 49.17 लाख रुपये मिल चुका है, लेकिन उसने खर्च महज 25.45 लाख (51 प्रतिशत) ही किया है। वैसे जिला योजना की अनुमोदित राशि में से 11.79 करोड़ रुपये (28.79 प्रतिशत) अभी अवमुक्त होना बाकी है।

140.60 करोड़ की राज्य योजना में से 82.33 करोड़ रुपये अवमुक्त हुआ है। जबकि जनवरी तक खर्च 66.87 करोड़ रुपये किया जा चुका है। 149.44 करोड़ रुपये की केंद्र पोषित योजना में से 93.95 करोड़ रुपये अवमुक्त हुए हैं। जिसमें 80.46 करोड़ रुपये का उपयोग किया गया है। वाह्य सहायतित योजना के अंतर्गत स्वीकृत 30 लाख रुपये में से एशिया विकास बैंक एक भी रुपये का उपयोग नहीं कर सका है।
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